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Nirma Founder: संघर्ष से सफलता पाने की करसन भाई की कहानी, क्यों रखा वॉशिंग पाउडर का नाम निरमा?

एक जमाने में, चाहे सिनेमा हॉल में या टीवी पर, निर्माण वाशिंग पाउडर का विज्ञापन बहुत देखने को मिलता था। लेकिन निरमा कंपनी के मालिक करसन भाई के संघर्ष की कहानी कम लोगों को पता है।

Nirma Founder success story of Karsan Bhai why was washing powder named Nirma

वॉशिंग पाउडर में निरमा एक लोकप्रिय ब्रांड है और उसके निर्माता थे करसन भाई पटेल। इनका जन्म गुजरात के मेहसाणा के एक किसान परिवार में हुआ। बिजनेस से दूर-दूर तक कोई नाता ही नहीं था। पढ़ाई पूरी करने के बाद न्यू कॉटन मिल्स, अहमदाबाद में लैब टेक्नीशियन बन गए। कुछ समय बाद उन्हें गुजरात सरकार के खनन और भूविज्ञान विभाग में सरकारी नौकरी मिल गई। फिर एक हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी। स्कूल में पढ़ने वाली उनकी बेटी की एक हादसे में मौत हो गई। वह चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिख कर कुछ ऐसा करे कि पूरा देश उसे जाने। मगर होनी को कौन टाल सकता है।

ऐसे शुरू हुआ निरमा का सफर
अपनी बेटी की मौत से करसन भाई बिल्कुल टूट चुके थे और इसके साथ ही उनका अपनी बेटी को कुछ बनते देखने का सपना भी टूट गया था। बावजूद इसके, उन्होंने अपना मन बना लिया था कि वह अपनी बेटी को दुनिया में अमर कर देंगे और उन्होंने यह करके भी दिखाया। करसनभाई की बेटी का नाम निरूपमा था लेकिन प्यार से सब उसे निरमा कहते थे। इसी नाम से करसनभाई ने वॉशिंग पाउडर बनाने का फैसला किया। उनका मकसद अपनी इस कोशिश से अपनी बेटी के नाम को हमेशा जिंदा रखना था।

घर-घर जाकर बेचा निरमा
1969 में उन्होंने इसकी शुरुआत की। उस समय एक किलो का सर्फ का पैकेट 15 रूपये का था। जबकि करसन भाई निरमा पाउडर को सिर्फ साढ़े तीन रूपये प्रति किलो बेच रहे थे। करसन भाई की सरकारी नौकरी थी, जिसके चलते वे ऑफिस से आते-जाते वॉशिंग पाउडर बेचते थे। उनके माल की लोकप्रियता कैसे बढ़े, इसलिए उन्होंने एक तरकीब निकाली। दरअसल वे निरमा के हर पैकेट पर कपड़े साफ न होने पर पैसे वापस करने की गारंटी देने लगे। अच्छी क्वालिटी और कम दाम ने इसे जल्द ही पॉपुलर कर दिया।

छोड़ दी थी नौकरी
करसनभाई पटेल ने जब देखा कि उनका प्रॉडक्ट लोगों के बीच अपनी जगह बना रहा है तो उन्होंने अपना पूरा वक्त अपने बिजनेस को देने का निर्णय कर लिया। निरमा की शुरुआत के 3 साल बाद उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी। करसनभाई ने अहमदाबाद शहर के बाहरी इलाके में एक छोटी वर्कशॉप में दुकान भी खोली थी। शुरुआत करने के 10 सालों के अंदर ही निरमा भारत में सबसे ज्यादा बिकने वाला डिटर्जेंट बन गया।

माल बेचने में माहिर
मार्किट में निरमा पाउडर की डिमांड पैदा करने के लिए करसनभाई ने एक रोचक तकनीक अपनाई। इससे बिना कोई पैसा खर्च किये बाजार में निरमा पाउडर की बिक्री तेजी से बढ़ने लगी। दरअसल, करसनभाई ने अपनी फैक्ट्री के कर्मचारियों की पत्नियों से कहा कि वे नियमित रूप से अपने मोहल्ले, अड़ोस-पड़ोस के सभी जनरल स्टोर्स, किराने की दुकानों पर जाकर निरमा वॉशिंग पाउडर की मांग करें। जब दुकानदारों ने देखा कि इतनी सारी औरतें एक खास वॉशिंग पाउडर की ही डिमांड कर रही हैं तो निरमा के डिस्ट्रीब्यूटर जब उन दुकानों पर पहुंचते तो दुकानदार तुरंत ही निरमा का स्टॉक ले लेते।

जब घटने लगी सेल
कुछ ही सालों में गुजरात में निरमा ने बहुत जल्द अपनी पकड़ बना ली। वहीं जब उन्होंने इस काम को गुजरात के बाहर करने की सोची तो उन्हें काफी निराशा का सामना करना पड़ा क्योंकि दुकानदार उनसे उधार पर माल उठाते थे और जब पैसे देने का समय आता तो या तो दुकानदार, पैसे मांगने वाले को भगा देता या फिर अगले महीने पर टाल देता। उस समय बाजार में बड़े-बड़े ब्रांड के बीच निरमा टिक भी नहीं पा रहा था और धीरे धीरे उसका सेल्स का ग्राफ भी गिरने लगा था।

विज्ञापन ने बदली किस्मत
इतने भारी नुकसान के बाद करसन भाई ने अपनी टीम से मार्केट से अपने सारे वॉशिंग पाउडर के पैकेट को वापस लाने के लिए कह दिया। टीम को लगा कि शायद अब करसनभाई हार मान चुके हैं और वह अपना यह काम बंद कर देंगे। हालांकि, ऐसा नहीं था। करसन भाई के दिमाग में तो कुछ और ही चल रहा था। इसके बाद निरमा का विज्ञापन टीवी पर आया और रातों- रात इसने लोगों का ध्यान आकर्षित कर लिया। अब निरमा वॉशिंग पाउडर सिर्फ गुजरात में नहीं बल्कि पूरे देश में फेमस हो गया था।

खरीदी बड़ी बड़ी कंपनियां
एक समय ऐसा था कि निरमा चल नहीं रहा था तो वहीं एक समय ऐसा भी आया कि करसन भाई पटेल ने अमेरिका तक की कंपनियों को खरीद लिया। दरअसल, 2007 में निरमा ने अमेरिका की रॉ मैटेरियल कंपनी Searles Valley Minerals Inc को खरीद लिया था जिससे निरमा दुनिया के टॉप 7 सोडा ऐश मैन्युफैक्चरर्स में शामिल हो गई। पटेल और उनके परिवार ने साल 2011 में निरमा को डीलिस्ट कर एक प्राइवेट कंपनी में बदलने का फैसला किया। 2014 में ग्रुप ने निंबोल में एक प्लांट के जरिए सीमेंट की मैन्युफैक्चरिंग शुरू की। 2016 में ग्रुप ने लफार्ज इंडिया के सीमेंट एसेट्स को 1.4 अरब डॉलर में खरीद लिया।

भारत के 17वें सबसे अमीर व्यक्ति
2012 में करसनभाई पटेल ने लंबे समय तक निर्माण को संभालने के बाद, इसका संचालन अपने दोनों बेटों और दामाद को सौंप दिया। करसनभाई पटेल के नेटवर्थ की बात करें तो फोर्ब्स के अनुसार, दिसंबर 2022 तक करसनभाई पटेल $2.9 बिलियन डॉलर के साथ भारत के 17 वें सबसे अमीर व्यक्ति है। जबकि, दुनिया के सबसे अमीर लोगों की लिस्ट में फोर्ब्स ने उन्हें 1016वां स्थान दिया है।

कभी साइकिल पर चलने वाले करसन भाई पटेल ने 2013 में 40 करोड़ रुपए में एक छह सीटर हेलिकॉप्टर खरीदा था। अडानी समूह के अध्यक्ष गौतम अडानी और जाइडस समूह के प्रमोटर पंकज पटेल के बाद, करसनभाई पटेल हेलिकॉप्टर खरीदने वाले अहमदाबाद के तीसरे उद्योगपति थे।

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