Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Disaster in Shimla: शिमला में हुई आपदा की घटनाएं प्राकृतिक या मानवजनित?

30 हजार की आबादी के लिए बने शिमला में वर्तमान में दो लाख से ज्यादा लोग रहते हैं। हाल ही में कृष्णा नगर में हुए हादसे के बाद एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं कि कैसे जहां कूड़े के ढेर लगे रहते थे वहां घरों की कॉलोनी ही बन जाती है। बता दें कि जिस कृष्णा नगर में हादसा हुआ वहां पहले कूड़े का ढेर लगा रहता था, इसके बाद पहले एक घर बना और बाद में तो घरों की लाइन लग गई। शिमला शहर ने ऐसी तबाही कभी देखी नहीं थी। ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि क्या ऐसा प्राकृतिक आपदा के कारण संभव हुआ है या मानव निर्मित आपदा ने इसको स्वयं ही काल का ग्रास बनाने के लिए धकेला है।

Disaster in Shimla

अंग्रेजों ने किया था आधुनिक शिमला का विकास

आपदा से घिरे सवालों से पहले आपको शिमला का इतिहास बता देते हैं। hpshimla.nic.in के अनुसार, शिमला का विकास 1819 में अंग्रेजों द्वारा किया गया था। अंग्रेज शिमला को 'सिमला' कहते थे और अंग्रेजी में भी इसे Simla ही लिखा जाता था। 80 के दशक में हिमाचल सरकार ने इसे Shimla कर दिया। इसके बाद से ही लोग इसका नाम Shimla लिखने लगे। ब्रिटिश सेना के सैनिक, व्यापारी और सिविल सेवक मैदानी इलाकों की चिलचिलाती गर्मी से राहत पाने के लिए यहां आते थे। शिम​ला को बनाने का पूरा क्रेडिट चॉरीस प्रैट कैनेडी को जाता है। 1864 में इसे ऑफिशियल रूप से समर कैपिटल घोषित कर दिया गया था। वर्ष 1971 में हिमाचल प्रदेश अविभाजित पंजाब से अलग हो गया और शिमला हिमाचल की राजधानी बन गई।

Recommended Video

    Himachal: शिमला में भूस्खलन से कई घर ढह गए, एक व्यक्ति की मौत

    हालात बने हैं नाजुक

    इस बरसात में जिस तरह की आपदा शिमला ने देखी, शायद ऐसा कभी नहीं हुआ होगा। घर ढह गए, शिमला के समरहिल में स्थित एक मंदिर में हुई आपदा ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया। इस घटना में कई परिवारों ने अपनों को खोया। पर सवाल यह है कि क्या शिमला में हो रही ये घटनाएं प्राकृतिक हैं? शायद नहीं। क्योंकि जिस कृष्णा नगर में एक साथ कई मकान ढहने की घटना हुई थी, उस क्षेत्र को वरिष्ठ भू-वैज्ञानिकों ने वर्ष 2012 से लेकर 2017-18 तक सौंपी गई रिपोर्ट में असुरक्षित घोषित कर दिया था। ऐसे में प्रशासन ने 2012 की रिपोर्ट के बाद वहां बस्ती को खाली क्यों नहीं करवाया? क्यों सरकार और प्रशासन लापरवाही बरतती रही?

    क्या कहती है जियोलॉजिकल सर्वे की रिपोर्ट

    जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अनुसार, हिमाचल प्रदेश में 17 हजार से ज्यादा जगहों पर लैंडस्लाइडिंग का खतरा बना हुआ है। इसमें शिमला में ही 1357 जगहों पर भूस्खलन की आशंका सर्वे में जताई गई है। आपको बता दें कि फोरलेन बनाते वक्त मिट्टी को डंगों के भीतर या सड़क में डम्प किया गया था पर अब बारिश में मिट्टी फूल रही है जिसके कारण लैंडस्लाइड और सड़क धंसने की खबरें सामने आ रही हैं।

    मानदंडों का उल्लंघन

    मौजूदा समय में शिमला में कुछ इलाके 70 से 80 डिग्री के औसत ढाल पर स्थित हैं। आपको बता दें कि 45 डिग्री की ढलान से अधिक पर निर्माण की इजाजत ही नहीं होती है। ऐसे में यहां अधिकांश इमारतें सरकारी नियमों और भवन निर्माण मानदंडों का उल्लंघन करते हुए बनाई गई हैं। यहां तक कि भूकंपीय मानदंडों का भी पालन नहीं किया है। टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग के एक अधिकारी ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शिमला के रिज की उत्तरी ढलान धीरे-धीरे धंस रही है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर कोई बड़ा भूकंप आता है तो शिमला में 98 प्रतिशत से अधिक इमारतों के ढहने का खतरा है। ऐसे में सरकार को शीघ्र ही इन सब मानदंड के अनुरूप कार्य करते हुए अस्त-व्यस्त हुए शिमला को व्यवस्थित करना होगा।

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+