नरेंद्र मोदी को घेरने के लिये मायावती की शतरंजी चाल

जी हां मायावती का हाथी जिस चाल से आगे बढ़ रहा है, उससे मोदी के लिये मुश्किलें खड़ी होने वाली हैं। मायावती यूपी की वो खिलाड़ी हैं, जो जातीय समीकरणों को बखूबी समझती हैं।
उत्तर प्रदेश में 6 प्रतिशत ब्राह्मण, 11 प्रतिशत अपर कास्ट और उनमें ओबीसी मिला लें तो कुल 58 फीसदी वोटों पर भाजपा की नजर है, लेकिन इस वोट बैंक पर सपा, बसपा और कांग्रेस भी डाका डालेंगी। वहीं बाकी का 42 प्रतिशत वोट, जिसमें मुसलमान, यादव और दलित आते हैं, उस पर मायावती की नजर है। चूंकि मुस्लिम समुदाय भी मायावती का सपोर्ट करता है, इसलिये उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में से भाजपा को 30 भी जीतने में बेहद मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
मायावती ने इन्हीं समीकरणों को ध्यान में रखते हुए 80 में से 40 टिकट ब्राह्मण और मुसलमानों को दिये, 8 ठाकुर, 17 दलितों को और 15 सीटों पर ओबीसी वर्ग को टिकट दिये हैं। इस प्रकार से टिकट वितरण करने के बाद मायावती साइलेंट मोड में चली गई हैं। उनके कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर वोटों को अपने पक्ष में करने में जुटे हुए हैं और बड़े स्तर पर मायावती किसी भी आपत्तिजनक य भड़काऊ बयानबाजी से बच रही हैं।
यूपी की मायावी टीम में कितने प्रतिशत किस वर्ग से-
मायावती की नजर यूपी के साइलेंट वोटरों पर है। ये वो वोटर हैं जो ऐन वक्त तक नहीं बताते हैं कि उनका मत किसे गिरने वाला है। माया को यूपी में फायदा सिर्फ इसलिये मिलता दिखाई दे रहा है, क्योंकि समाजवादी पार्टी से प्रदेश की जनता बेहद रुष्ट है। सपा के शासनकाल में गिरती कानून व्यवस्था, बढ़ते अपराध के बीच वोटर अपने पुराने दिन याद कर मायावती को वोट दे सकते हैं।












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