Mamata Banerjee: ममता की पार्टी में कई शाहजहां शेख, तुष्टीकरण की राजनीति बनी जनता की आफत

Mamata Banerjee: संदेशखाली की महिलाओं के यौन शोषण के आरोपी टीएमसी नेता शाहजहां शेख को 29 फरवरी को बंगाल पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। लेकिन बंगाल पुलिस का कहना है कि शेख को संदेशखाली में बलात्कार और यौन उत्पीड़न की शिकायत के मामले में नहीं, बल्कि ईडी पर हमले के लिए गिरफ्तार किया गया है।

यानी पुलिस शाहजहां के खिलाफ गंभीर धाराएं नहीं लगाएगी। ममता बनर्जी विरोधी इसे ममता की मुस्लिम तुष्टीकरण नीति की पराकाष्ठा बता रहे हैं।

Mamata Banerjee

मुस्लिम वोटों को लेकर रस्साकशी

पश्चिम बंगाल के राजनीतिक दलों के बीच मुस्लिम वोटों को लेकर रस्साकशी दशकों से जारी है। पहले सीपीआई-एम के नेतृत्व वाले वाम मोर्चे ने अपने पाले में मुस्लिमों को करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी और अब ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने मुस्लिमपरक राजनीति को पूरी तरह से अपना रखा है। बंगाल में मुसलमानों की आबादी लगभग 25 प्रतिशत है।

दरअसल टीएमसी मुसलमानों में भाजपा के डर का प्रचार करके उनको एक तरह से अपने साथ बने रहने पर मजबूर कर रही है। ऑल इंडिया मजलिस एत्तेहाद ए मुसलमीन (एआईएमआईएम) का भी आरोप है कि राज्य की टीएमसी सरकार मुसलमानों को डरा धमका कर रख रही है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का भी मानना है ममता मुस्लिम वोटों में किसी भी तरह के विभाजन को रोकने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हो सकती है। कारण यह कि टीएमसी 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए काफी हद तक मुसलमानों पर निर्भर है।

लोकसभा चुनाव में बंगाल में टीएमसी और बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर होने की संभावना है। वोट शेयर में सिर्फ 1 फीसदी के अंतर से सीटों की गिनती बदल जानी है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने पिछली बार पश्चिम बंगाल में 294 सीटों वाली विधानसभा के चुनाव में 39 मुस्लिमों को टिकट दिया था।

मुसलमानों की स्थिति में फिर भी सुधार नहीं

कांग्रेस के ढाई दशक और वामपंथियों के 34 वर्षों के निर्बाध शासन के बावजूद, मुसलमानों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति में बहुत सुधार नहीं हुआ। न्यायमूर्ति राजिंदर सच्चर समिति की रिपोर्ट के अनुसार 2001 में राज्य की आबादी में मुसलमानों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत थी और सरकारी नौकरियों में मुस्लिम प्रतिनिधित्व मात्र 4.2 प्रतिशत था और न्यायपालिका में प्रमुख पदों में से केवल 5 प्रतिशत पर उनका कब्जा था।

ममता बनर्जी के प्रति मुसलमानों का झुकाव - 2008 के बाद से शुरू हो गया था। 2011 में टीएमसी की ऐतिहासिक सफलता के पीछे मुसलमानों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ममता ने भी एक समुदाय के रूप में उन्हें सीधे संबोधित करना शुरू किया और उनकी आकांक्षाओं को बढ़ने दिया। नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को बंगाल में लागू नहीं होने देने के ममता के ऐलान से भी मुसलमान का एक बड़ा वर्ग उनके साथ डट कर खड़ा है। मुस्लिमों के करीब जाने के लिए ममता को मुस्लिम समारोहों में हिजाब की तरह सिर के चारों ओर साड़ी लपेट कर शामिल होते भी देखा गया।

ममता की पार्टी में कई शाहजहां शेख

ममता बनर्जी की मुस्लिम पॉलिटिक्स ने पिछले कुछ सालों में बंगाल को एक डिस्टर्ब्ड स्टेट में बदल दिया है। आए दिन वहाँ मारपीट, दंगे फसाद और बम फेंकने, गोली चलाने की घटनाएं होती रहती हैं। अधिकतर घटनाओं में टीएमसी के मुस्लिम नेताओं की संलिप्तता होती है।

शाहजहां शेख जैसे कई नेताओं को ममता राज में संरक्षण मिला हुआ है। कुछ समय पहले ही अराबुल इस्लाम नाम के एक और नेता को गिरफ्तार किया गया था। वह एक दशक से भी अधिक समय से दक्षिण 24 परगना जिले में ममता की पार्टी का चेहरा था। उसे कोलकाता पुलिस ने इंडियन सेकुलर फ्रंट (आईएसएफ) के एक कार्यकर्ता की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया। अराबुल 2006 में टीएमसी के टिकट पर भांगर से चुनाव जीता था।

क्या ममता बनर्जी हिन्दू विरोधी हैं?

बीजेपी की चुनौती पर मंच से काली स्तुति का पाठ करने वाली ममता अपने फैसले से हिन्दू विरोधी होने की छाप ओढ़ कर चलती हैं। उनके कई निर्णय विरोधियों को यह प्रचार करने का अवसर देते हैं कि बंगाल की मुख्यमंत्री मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए हिन्दू विरोध की राजनीति करती हैं।

2017 में ममता ने मुहर्रम के कारण दुर्गा-पूजा मूर्ति विसर्जन पर रोक लगाई। टीएमसी सरकार ने विजयादशमी के दिन दुर्गा-पूजा मूर्ति विसर्जन को रात 10 बजे तक सीमित करने का निर्णय लिया और अगले दिन किसी भी तरह के विसर्जन पर रोक लगा दी, क्योंकि उसी दिन मुहर्रम था।

बशीरहाट में 2017 में हिंदुओं के खिलाफ हुए सांप्रदायिक दंगों पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं की गई। एक फेसबुक पोस्ट के बाद बशीरहार इलाके में हिंदुओं के खिलाफ सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। भीड़ ने 12 किमी क्षेत्र में घर, दुकानें और पुलिस वाहन जला दिए। भाजपा नेताओं ने ममता बनर्जी पर राजनीतिक कारणों से एक समुदाय को खुश करने के लिए बशीरहाट के दंगा प्रभावित इलाके में स्थिति को नियंत्रण से बाहर जाने देने का आरोप लगाया। दंगे के ज़्यादातर आरोपियों की गिरफ़्तारी नहीं हुई।

2023 में ममता ने मुस्लिम इमामों को 500 रुपये बढ़ाकर 3000 रुपये वजीफा करने और हिंदू पुजारियों को कोई वेतन नहीं देने का निर्णय किया। ममता बनर्जी सरकार ने पहली बार 9 अप्रैल 2012 को पश्चिम बंगाल के मस्जिद इमामों को मासिक वेतन या भत्ते के रूप में 2500 रुपये मंजूर किए थे और फिर मुअज़्ज़िनों को 1000 रुपये मासिक वेतन देने की घोषणा की थी। उन्होंने कभी भी हिंदू पुजारियों के लिए ऐसे किसी भत्ते की घोषणा नहीं की।

ममता बनर्जी ने मंत्री फिरहाद हकीम को तारकेश्वर विकास बोर्ड का अध्यक्ष नियुक्त किया। यह बोर्ड 288 साल पुराने तारकेश्वर मंदिर की देखभाल भी करता है। फ़िरहाद हकीम वही नेता हैं जिन्होंने एक बार कहा था कि कोलकाता में बंदरगाह क्षेत्र का एक हिस्सा मिनी पाकिस्तान जैसा है।

ममता बनर्जी के करीबी माने जाने वाले मौलाना नूरूर बरकती ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ फतवा जारी किया और पीएम की दाढ़ी काटने पर 25 लाख का इनाम देने की घोषणा की। बरकती ने यह भी कहा कि जो लोग मस्जिदों के बाहर जय श्री राम का नारा लगाते हैं, वे हिजड़े हैं।

इमाम ने कहा कि अगर मुस्लिम समुदाय का कोई भी सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) या भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होता है या उसके लिए काम करता है, तो उन्हें समुदाय से बाहर कर दिया जाएगा। और इतना ही नहीं, उनकी पिटाई भी की जायेगी। ममता ने उन्हें सजा दिलाने के बजाय लाल बत्ती की गाड़ी दी।

ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि सभी रोहिंग्या आतंकवादी नहीं हैं और उनका भारत में स्वागत किया जाना चाहिए। सिर्फ एक विशेष धर्म के लोगों को खुश करने के लिए उन्होंने इतना गैर जिम्मेदाराना बयान दिया। ममता की मुस्लिमपरक राजनीति की ये कुछ बानगियाँ भर हैं जिसका नुकसान बंगाल ही नहीं, पूरे देश को हो रहा है।

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