Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

Makar Sankranti: मकर संक्रांति का क्या है महत्व, क्यों बदल गया मकर संक्रांति का दिन?

मकर संक्रांति धार्मिक त्यौहार के साथ-साथ वैज्ञानिक पर्व भी है, जिस दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायन में प्रवेश करता है।

Makar Sankranti 2023 date time importance of Makar Sankranti significance

Makar Sankranti: भारत में प्रतिवर्ष अनेकों त्यौहार मनाये जाते हैं। इन त्यौहारों को मनाने के पीछे सिर्फ परंपरा या रूढ़िवादी बातें नहीं है, इनके पीछे ज्ञान, विज्ञान, स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था से जुड़े अनेक कारण हैं। इन्हीं त्यौहारों में से एक मकर संक्रांति पर्व है, जो अभी 14 जनवरी या 15 जनवरी को मनाया जाता है। यह भारत के विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। उत्तर प्रदेश व पश्चिम बिहार में इसे खिचड़ी पर्व के रूप में मनाते हैं। वहीं तमिलनाडु में पोंगल, आंध्र प्रदेश व कर्नाटक में मकर संक्रमामा, गुजरात में उत्तरायण, बुंदेलखंड में सकरात आदि नामों से यह संपूर्ण भारत में हर्षोल्लास से मनाया जाता हैं। भारत के अलावा यह अन्य देशों में विभिन्न नामों से भी मनाया जाता हैं। जैसे नेपाल में माघे संक्रांति, थाईलैंड में सोंग्क्रण, म्यांमार में थिन्ज्ञान, कंबोडिया में मोहा संग्क्रण, श्रीलंका में उलावर थिरुनाल और लाओस में पी मा लाओ नाम से मनाया जाता हैं। मकर संक्रांति का धार्मिक दृष्टि से भी और वैज्ञानिक आधार पर भी अपना महत्व है।

मकर संक्रांति का पौराणिक एवं ज्योतिषीय महत्व

हिंदू धर्म में अधिकतर त्यौहार चंद्रमा की गणना पर तिथियों के अनुसार मनाये जाते हैं, परंतु मकर संक्रांति का त्यौहार सूर्य पर आधारित गणना के आधार पर मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं अर्थात सूर्य दक्षियाणन से उत्तरायण होते है। मकर संक्रांति के त्यौहार से मौसम में बदलाव शुरू होने लगता है। सर्दी धीरे-धीरे कम होने लगती है और बसंत ऋतु का आगमन शुरू हो जाता है। मकर संक्रांति उपरांत दिन लंबे व रात छोटी होने लगती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति के दिन सूर्य देवता अपने पुत्र शनि के घर जाते हैं और पिता व पुत्र का मिलन होता है। महाभारत में भी इस पर्व का उल्लेख मिलता है, जो पितामह भीष्म के जीवन से जुड़ा है। जिसके अनुसार पितामह भीष्म को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था। जब वे वाणों की शैय्या पर लेटे थे तो इसी दिन का इंतजार कर रहे थे। सूर्य के उत्तरायण होने पर ही उन्होंने अपने प्राण त्यागे। श्रीमद्भागवत के आठवें अध्याय में भगवान कृष्ण ने भी कहा है कि उत्तरायण के 6 महीने में मृत्यु को प्राप्त होने वाले मोक्ष व दक्षिणायन के 6 महीने में देह त्यागने वाले वापिस जन्म-मृत्यु को प्राप्त होते हैं। इसलिए पितामह भीष्म के उत्तरायण में प्राण त्यागने से उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ।

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार मकर संक्रांति के दिन गंगा (नदी) को धरती पर लाने वाले राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों (महाराजा सगर के पुत्रों) को मुक्ति प्रदान की थी, इसके उपरांत गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। इसलिए गंगा सागर में आज भी मकर संक्रांति पर एक विशाल मेला लगता है।

मकर संक्रान्ति पर गंगा स्नान व दान को अत्यन्त शुभ माना गया है। इस दिन तिल का बहुत महत्व है। मान्यता है कि तिल मिश्रित जल से स्नान, तिल के तेल द्वारा मालिश, तिल की यज्ञ में आहुति, तिल मिश्रित जल का पीना, तिल का भोजन आदि के प्रयोग से मकर संक्रांति का पुण्य फल प्राप्त होता है और पाप नष्ट हो जाते हैं।

मकर संक्रांति का वैज्ञानिक महत्व

वैज्ञानिकों के अुनसार पृथ्वी की धुरी 23.5 अंश झुकी होने के कारण सूर्य 6 माह उत्तरी गोलार्द्ध (अर्थात उत्तरायण) के निकट व 6 माह दक्षिणी गोलार्द्ध (अर्थात दक्षिणायन) के निकट रहता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण में आना शुरू हो जाता है। सूर्य के उत्तरायण होने पर दिन बड़ा व रात छोटी होने लगती है। मकर संक्रांति, एक खगोलीय घटना पर आधारित त्यौहार है। ज्ञात हो कि विश्व की 90 प्रतिशत जनसंख्या पृथ्वी के उत्तरी गोलार्द्ध में ही रहती है। जिनको सूर्य के उत्तरायण होने पर सर्दी से राहत मिलनी शुरू हो जाती है।

क्यों है मकर संक्राति 15 जनवरी 2023 को?

सौर कैलेंडर के अनुसार हर वर्ष मकर संक्रांति का त्यौहार अधिकतर 14 जनवरी को मनाया जाता है। वहीं अबकी बार यह त्यौहार 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। दरअसल, हिंदू पंचांग के अनुसार सूर्यदेव 14 जनवरी 2023 की रात्रि 8.21 बजे पर मकर राशि में प्रवेश कर रहे हैं। इसलिए सूर्य उदय की तिथि 15 जनवरी होने के कारण इस वर्ष मकर संक्रांति 15 जनवरी 2023 को मनाई जा रही है।

मकर संक्रांति का इतिहास

वर्ष 2023 में मकर संक्रांति का यह त्यौहार 15 जनवरी को मनाया जा रहा है। ज्योतिष आचार्यों के अनुसार वर्ष 1902 में पहली बार 14 जनवरी व वर्ष 1964 में पहली बार 15 जनवरी को मकर संक्रांति मनायी गयी थी और वर्ष 2101 में 16 जनवरी को मनायी जायेगी। इसके अलावा 2012 व 2020 को भी मकर संक्राति 15 जनवरी को मनायी गयी थी। इससे पूर्व 18वीं सदी में 12 व 13 जनवरी को यह त्यौहार मनाया जाता था। वहीं ज्योतिष आचार्यों का कहना है कि राजा हर्षवर्द्धन के समय मकर संक्रांति 24 दिसंबर को, छत्रपति शिवाजी के समयकाल में 11 जनवरी को, मुगल बादशाह अकबर के समयकाल में 10 जनवरी को मनायी गयी थी।

मकर संक्रांति की तारीख में क्यों होता है बदलाव?

Recommended Video

    Makar Sankranti 2023: 14 या 15 जनवरी कब है मकर संक्रांति, जानें सही तारीख | वनइंडिया हिंदी *Religion

    वैज्ञानिकों के अुनसार जिस प्रकार पृथ्वी व अन्य ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते है, उसी प्रकार सूर्य भी आकाश गंगा के केंद्र की परिक्रमा करता है, जिसमें सूर्य को 22 से 25 करोड़ वर्ष लगते हैं। सूर्य के परिक्रमा वर्ष को निहारिका वर्ष भी कहा जाता है। सूर्य हर वर्ष धनु राशि से मकर राशि में 20 मिनट की देरी से प्रवेश करता हैं। इस आकलन अनुसार हर तीन साल बाद सूर्य 1 घंटे व 72 वर्षों में एक दिन की देरी से मकर राशि में प्रवेश करता है। जिस कारण मकर संक्रांति की तारीख में बदलाव होता है, क्योंकि हर तीसरे साल एक महीना अधिक होता है। इसलिए मकर संक्रांति त्यौहार की तारीख में बदलाव होता है।

    यह भी पढ़ें: मकर संक्रांति पर राशि के अनुसार क्या करें क्या न करें?

    More From
    Prev
    Next
    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+