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Karunanidhi को समर्थक बुलाते थे 'कलाईनार', जानिए इसका मतलब

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      M. Karunanidhi को इस वजह से कहा जाता था kalaignar | वनइंडिया हिंदी

      चेन्नई। तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) अध्यक्ष एम करुणानिधि का शाम 6.10 पर निधन हो गया। पिछले दस दिन से वो चेन्‍नई के कावेरी हॉस्पिटल के आईसीयू में भर्ती थे। उनको यूरिनरी इन्फेक्शन के बाद कई और तरह की बीमारियों ने घेर लिया था।

      इसे भी पढ़ें:- तमिलनाडु के पूर्व सीएम एम करुणानिधि का निधन, शाम 6.10 पर ली आखिरी सांस

      तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे करुणानिधि

      तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे करुणानिधि

      दक्षिण की राजनीति के बहुत बड़े सितारे कहे जाने वाले करुणानिधि तमिलनाडु के 5 बार मुख्यमंत्री रहे। वो द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) के अध्यक्ष रहे। करुणानिधि का जन्म तिरुक्कुवलइ में 3 जून 1924 को हुआ था और बचपन में लोग उन्हें दक्षिणमूर्ति कहकर बुलाते थे।

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      'कलाईनार' यानी तमिल: कला का विद्वान

      'कलाईनार' यानी तमिल: कला का विद्वान

      मात्र 14 वर्ष की अवस्था में राजनीति में उतरने वाले करुणानिधि को लोग शब्दों का जादूगार कहते थे, वो एक सफल और मशहूर राजनेता के साथ वे तमिल सिनेमा जगत के एक नाटककार और पटकथा लेखक भी रहे। उनके प्रशंसक उन्हें 'कलाईनार' कहकर बुलाते थे यानी तमिल: कला का विद्वान। उन्होंने बहुत सारी हिट फिल्मों की पटकथा लिखी।

      हिंदी विरोधी लेख लिखे और काफी मशहूर हो गए...

      हिंदी विरोधी लेख लिखे और काफी मशहूर हो गए...

      दरअसल साल 1937 में हिन्दी भाषा को स्कूलों में अनिवार्य कर दिया गया था, जिसकी वजह से दक्षिण में इसका विरोध शुरु हो गया था। करुणानिधि भी हिंदी को अनिवार्य किए जाने के विरोध में थे और इसी वजह से उन्होंने उस वक्त इस आंदोलन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, इस दौरान इन्होंने कई हिंदी विरोधी लेख लिखे। मात्र 20 वर्ष की उम्र में उन्होंने तमिल फिल्म उद्योग की कंपनी 'ज्यूपिटर पिक्चर्स' में पटकथा लेखक के रूप में अपना करियर शुरू किया था। उनकी लिखीं 75 से अधिक फिल्में काफी हिट रहीं।

      'मुरासोली' नाम के एक समाचार पत्र का प्रकाशन किया...

      'मुरासोली' नाम के एक समाचार पत्र का प्रकाशन किया...

      1949 में नई पार्टी 'द्रविड़ मुनेत्र कड़गम' यानी डीएमके की स्थापना हुई। डीएमके की स्थापना के बाद एम. करुणानिधि की अन्नादुराई के साथ नजदीकियां बढ़ती चली गईं। 1957 में करुणानिधि पहली बार विधायक बने, इस दौरान वह तमिल फिल्म इंडस्ट्री में भी सक्रिय रहे और 1967 में पहली बार डीएमके सत्ता में आई और अन्नादुराई सीएम बने लेकिन मात्र दो साल बाद अन्नादुराई का देहांत हो गया। अन्नादुराई के देहांत के बाद सत्ता की कमान करुणानिधी ने संभाली। जिसके बाद 1971 में हुए चुनावों में अपने दम पर जीतकर आए और मुख्यमंत्री की कुर्सी संभाली। उन्होंने 'मुरासोली' नाम के एक समाचार पत्र का प्रकाशन भी किया था।

      इसे भी पढ़ें:- करुणानिधि: हीरो का कैरेक्टर लिखने से हीरो बनने तक का सफर

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      English summary
      M Karunanidhi is no more read entire profile why people fondly call him Kalaignar

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