Spring loaded Fans:कोटा में छात्रों को आत्महत्या से रोकने के लिए लगेंगे स्प्रिंग वाले पंखे,जानें इनके बारे में
12 अगस्त को कोटा के प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के बीच एक बैठक में आत्महत्या रोधी उपायों पर मंथन किया गया। इस बैठक में फैसला लिया गया कि कोटा में छात्रावासों की छत पर लगे पंखों पर एक स्प्रिंग डिवाइस लगाना अनिवार्य होगा। जिसके बाद 16 अगस्त को कोटा के उपायुक्त ओपी बुनकर ने इस निर्देश को सख्ती से पालन करने संबंधी आदेश जारी कर दिए।

दरअसल पिछले दिनों कोटा में इंजीनियरिंग कर रहे छात्रों के आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखते हुए वहां के स्थानीय प्रशासन ने हॉस्टल और पेइंग गेस्ट (पीजी) आवासों में स्प्रिंग-लोडेड पंखे लगाने के निर्देश जारी किए है। पंखे ऐसी ऊंचाई पर लगाए जाते हैं जो इतनी कम है कि कोई व्यक्ति उन पर लटक कर आत्महत्या नहीं कर सकता। इन पंखों को कोटा में छात्र आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या को कम करने के लिए लगाया जाएगा।
क्या होते है स्प्रिंग वाले पंखे?
स्प्रिंग वाले पंखे को स्प्रिंग-लोडेड पंखे या आत्महत्या निरोधक पंखे के नाम से भी जाना जाता है। ये पंखे साधारण पंखों से अलग होते हैं और इन पंखों से लटककर कोई भी व्यक्ति आत्महत्या नहीं कर सकता है, भले ही वह कितनी भी कोशिश क्यों न कर ले। ये पंखे ज्यादातर उन क्षेत्रों में लगाए जाते हैं जहां आत्महत्या का खतरा अधिक होता है, जैसे मानसिक स्वास्थ्य अस्पतालों में, छात्रावास या शैक्षणिक संस्थाओं में, हॉस्टलों या पेइंग गेस्ट निवासों में। इन पंखों का उद्देश्य आत्महत्याओं की बढ़ती संख्या को रोकना है, खासकर उन स्थितियों में जहां तत्काल मानवीय सहायता संभव नहीं है।
कैसे काम करते हैं ये पंखे?
स्प्रिंग पंखों के मैकेनिज्म में स्प्रिंग का उपयोग होता है, जिन्हें भार का पता चलने पर अपने आप छत से अलग होने के लिए डिजाइन किया जाता है। इन पंखों में स्प्रिंग मैकेनिज्म को लोड का पता चलते ही खोलने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे पंखे को छत से प्रभावी ढंग से अलग किया जा सके। जब पंखे पर 20 किलो से अधिक भार पड़ता है, जैसे कि कोई व्यक्ति खुद को लटकाने का प्रयास करता है, तो स्प्रिंग्स छूट जाती है और पंखे को छत से अलग कर देती है। यह पंखा साधारण पंखे की तरह पंखे को आत्महत्या के लिए सहारे के रूप में इस्तेमाल होने से रोकता है।
क्या है स्प्रिंग वाले पंखों के मुख्य फायदे
स्प्रिंग वाले पंखे किसी व्यक्ति के आत्महत्या करने के प्रयास को असफल तो करते ही हैं, साथ ही साथ इसके कुछ अन्य फायदे भी हैं। जैसे यदि कोई पंखे से लटक कर आत्महत्या करने की कोशिश करता है तो पंखे की बॉडी और छत से जुड़ा एक अरेस्टर केबल उस व्यक्ति को जमीन से ज्यादा दूरी पर नहीं छोड़ती है, जिससे उस व्यक्ति को चोट भी नहीं आती। दूसरा, यदि कोई व्यक्ति पंखे से लटकने की कोशिश करता है तो स्प्रिंग-फिट छत के पंखे न केवल नीचे आ जाएंगे, बल्कि आत्महत्या के प्रयास के बारे में एक हूटर भी बजाएंगे, हालांकि यह फीचर सबसे आधुनिक पंखों में ही मौजूद है।
स्प्रिंग वाले पंखे के कुछ नुकसान
स्प्रिंग वाले पंखे के कुछ नुकसान भी हैं, जैसे इसकी कीमत। मौजूदा सीलिंग पंखों को स्प्रिंग्स के साथ दोबारा लगाना महंगा पड़ता है, खासकर अगर बड़ी संख्या में पंखे हो तो खर्चा अधिक आता है। दूसरा इसका रखरखाव, स्प्रिंग पंखों को नियमित रखरखाव की आवश्यकता होती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि स्प्रिंग ठीक से काम कर रहे हैं और पंखे गिरने का खतरा नहीं है। तीसरा गलत अलार्म, यदि पंखे के रखरखाव के समय या उसकी सफाई करते समय गलती से पंखे पर झटका लग जाए तो गलत अलार्म बज सकता है।
कब हुई स्प्रिंग वाले पंखों की शुरुआत?
आत्महत्याओं को रोकने के लिए जो स्प्रिंग वाले पंखे बाजार में आए हैं, उनको ज्यादा समय नहीं हुआ है। हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2017 में कोटा में एक हॉस्टल एसोसिएशन ने छत के पंखे से लटककर होने वाली आत्महत्याओं को रोकने के लिए हॉस्टल के कमरों में सीलिंग पंखों में स्प्रिंग लगाने या उनकी जगह दीवार पंखे लगाने पर विचार किया था। रिसर्च गेट की रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में शोधकर्ताओं ने इस विचार की सराहना की और इस विचार में अपना योगदान देने का आह्वान किया।
स्प्रिंग वाली पंखा रॉड बनाने वाली कंपनी की शार्क टैंक में शिरकत
स्प्रिंग वाली पंखा रॉड बनाने वाली कंपनी ने शार्क टैंक इंडिया में भी शिरकत की है और कंपनी का नाम है गोल्ड लाइफ। गोल्ड लाइफ मुंबई में स्थित एक कंपनी है जिसने आत्महत्या रोधी फैन रॉड विकसित किया था। पंखे की रॉड को आत्महत्या से बचाव करने के लिए डिजाइन किया गया है। रॉड एक स्प्रिंग मैकेनिज्म का उपयोग करती है जो भार बढ़ने पर रॉड के दो हिस्सों को अलग कर देती है। इस उत्पाद ने शार्क टैंक इंडिया पर ₹50 लाख का निवेश जीता था। स्प्रिंग वाली पंखा रॉड की कीमत केवल ₹250 है।
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