PICS: जानिए कौन थे निडर पत्रकार जेम्स फॉली और स्टीवेन सोटलॉफ

बेंगलौर। आईएसआईएस ने पिछले दो हफ्तों में बर्बरता के साथ दो अमेरिकन पत्रकारों का सिर कलम कर दिया। अमेरिका के साथ साथ पूरी दुनिया इन घटनाओं से स्तब्ध है। जेम्स फॉली की हत्या को लोग जेहन से निकाल भी नहीं पाए थे कि आईएस आतंकियों ने स्टीवन सोटलॉफ के सिर कलम करने का वीडियो जारी कर दिया।

इन वीडियो में आतंकवादियों ने सीधे तौर पर अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने इराक पर हवाई हमले बंद नहीं किए तो इसी तरह अमेरिकी लोगों के सिर कलम होते रहेंगे। फॉली और सोटलॉफ की हत्या पर अमेरिका समेत पूरी दुनिया ने दुख जताया है।

लेकिन कौन थे ये निडर पत्रकार, जो खतरों के सामने भी डटकर खड़े रहे। दुनिया आज इनकी बहादुरी और पत्रकारिता के लिए इनके जज्बे को सलाम करती है।

जानिए कौन थे अमेरिका के निडर पत्रकार जेम्स फॉली और स्टिवन सोटलॉफ

बहादुर और अथक मेहनती

बहादुर और अथक मेहनती

फॉली ने अमरीकी अख़बार ग्लोबल पोस्ट और फ्रांस की समाचार एजेंसी एएफपी सहित कई मीडिया समूहों के लिए मध्य पूर्व एशिया की काफी रिपोर्टिंग की है। उन्हें 'बहादुर और अथक मेहनत' करने वाला पत्रकार माना जाता था।

युद्ध क्षेत्र की बातें आगे लाना है

युद्ध क्षेत्र की बातें आगे लाना है

साल 2012 में बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में फॉली ने कहा था, "मैं युद्ध क्षेत्र की अनसुनी कहानियों को दुनिया के सामने लाना चाहता हूं।" वे पत्रकारिता के प्रति पूरी तरह से समर्पित थे।

सीरिया में हुआ था अपहरण

सीरिया में हुआ था अपहरण

नवम्बर 2012 में सीरिया में उनका अपहरण कर लिया गया था। उत्तरी सीरिया के इबलिब प्रांत से गुजरते हुए उनकी गाड़ी को चरमपंथियों ने रोका था और उसके बाद वह दिखाई नहीं दिए।

गद्दाफी के खिलाफ रिर्पोटिंग

इराक़ जैसे देशों की हक़ीकत जानने की उत्सुकता ने उन्हें अमरीकी सैनिकों के साथ पत्रकारिता करने का रास्ता दिया। वर्ष 2011 में वह कर्नल मुअम्मर गद्दाफ़ी के ख़िलाफ़ विद्रोह की रिपोर्टिंग करने लीबिया गए थे। उन्होंने विद्रोही लड़ाकों के साथ रहकर रिपोर्टिंग की।

पत्रकार से पहले अध्यापक थे

चालीस वर्षीय फॉली अमरीका के न्यू हैम्पशर के रोचेस्टर शहर के रहने वाले थे। पत्रकारिता में आने से पहले वह एरिज़ोना, मैसाच्युसेट्स और शिकागो में अध्यापक थे।

आतंकियों को जानना चाहते थे

आतंकियों को जानना चाहते थे

उन्होंने सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के वफ़ादार सुरक्षा बलों के साथ रिपोर्टिंग करनी शुरू की। जेम्स का कहना था, ''वहां भारी हिंसा है लेकिन यह जानने की एक इच्छाशक्ति भी है कि आख़िर वे लोग हैं कौन। और मैं समझता हूं कि यही मुझे प्रेरित कर रहा है।''

बहादुर थे सोटलॉफ

बहादुर थे सोटलॉफ

स्टीवेन सोटलॉफ़ दूसरे अमरीकी पत्रकार हैं जिनका इस्लामिक स्टेट ने सिर कलम कर दिया। 31 वर्षीय सोटलॉफ़ का एक साल पहले सीरिया में अपहरण किया गया था।

कई पत्र-पत्रिकाओं में लिखते थे

कई पत्र-पत्रिकाओं में लिखते थे

स्वतंत्र पत्रकार सोटलॉफ़ ने टाइम्स पत्रिका, फ़ॉरेन पॉलिसी, क्रिश्चियन साइंस मॉनीटर और वर्ल्ड अफ़ेयर्स जर्नल समेत कई पत्र-पत्रिकाओं के लिए आर्टिकल लिखे थे।

खतरों को जानते हुए भी करते थे रिर्पोटिंग

खतरों को जानते हुए भी करते थे रिर्पोटिंग

वे मिस्र, लीबिया और सीरिया से रिपोर्टिंग कर चुके थे। उनके जानने वालों का कहना है कि उन्हें पत्रकारिता से प्यार था। और तमाम खतरों के बावजूद वो पत्रकारिता करते थे।

खतरों के सामने डटकर खड़े रहे

खतरों के सामने डटकर खड़े रहे

उनके एक दोस्त ने बताया, "स्टीवन बताते थे कि वहाँ हालात बहुत डरावने और ख़तरनाक़ थे। वहाँ रहना सुरक्षित नहीं था। ये जानते हुए भी वे वहाँ जाते रहते थे."उनके लेख बताते हैं कि ख़तरों के बावजूद वे ज़मीनी रिपोर्टिंग के लिए कितने प्रतिबद्ध थे।

यमन में रहते थे

लेखिका एन मारलो जो सोटलॉफ़ को लीबिया में किए गए उनके काम से जानती हैं बताती हैं, "वे यमन में रहते थे, अच्छी अरबी बोलते थे और इस्लामी दुनिया से ग़हरी मोहब्बत करते थे।"

लोगों के बीच जाकर लाते थे खबर

सोटलॉफ के जानने वाले बताते हैं, वो युद्ध क्षेत्र में आम लोगों के बीच जाकर खबरें लाना चाहते थे। वे देखी दिखाई खबरों से की सोचते थे। उन्हें पत्रकारिता से प्यार था।

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