Get Updates
Get notified of breaking news, exclusive insights, and must-see stories!

QuickHeal Founder: दसवीं तक पढ़े कैलाश काटकर, कैलकुलेटर रिपेयर से शुरू करके करोड़ों की एंटीवायरस कंपनी बना दी

कामयाब होने के लिए सिर्फ एक चीज चाहिए- भविष्य की संभावनाओं को पहचान लेने वाली नजर। क्विक हील की सफलता साबित करती है कि व्यक्ति एक दिशा में बढ़ता रहे, तो धीरे-धीरे तरक्की करते हुए ऊंचाई तक पहुंच ही जाता है।

know all about QuickHeal Founder Kailash Katkar

Quick Heal के बारे में हम सभी जानते है। यह एक भारतीय बहुराष्ट्रीय साइबर सुरक्षा सॉफ्टवेयर कंपनी है, जिसका मुख्यालय पुणे में है। इसके CEO कैलाश काटकर (Kailash Katkar) हैं। इतना तो सभी जानते ही होंगे। पर क्या आपको मालूम है कि कैलाश काटकर के पास कोई प्रोफेशनल डिग्री नहीं है। आपको जानकर हैरानी होगी कि वे सिर्फ दसवीं तक पढ़े हैं। ऐसा भी नहीं कि बिजनेस उनको पुश्तैनी तौर पर मिला हो। कैलाश के पिता फिलिप्स इंडिया में मशीन सेटर के रूप में काम करते थे और माता गृहणी थी। तो आइए जानते हैं कैलाश के एक सफल उद्योगपति बनने की सफर।

400 रुपये पर शुरू किया काम
कैलाश काटकर का जन्म 1966 में महाराष्ट्र के एक छोटे से गांव रहमितापुर में एक महाराष्ट्रीयन परिवार में हुआ था और वे पुणे में पले-बढ़े। कैलाश ने अपने पिता को घर पर रेडियो रिपेयर करते देखा था तो उन्होंने भी अपने करियर की शुरुआत 1985 में एक रिपेयरिंग शॉप पर काम करने से की, जहां वह कैलकुलेटर और रेडियो रिपेयर किया करते थे। कैलकुलेटर रिपेयर करने के उन्हें 400 रुपये महीने वेतन के तौर पर मिलते थे। धीरे-धीरे स्क्रीन प्रिंटिंग, रेडियो रिपेयरिंग आदि से उनकी कमाई 2000 रुपये महीना हो गई। इसके बाद 1990 में कैलाश ने 15000 रुपये जोड़कर अपनी रिपेयरिंग की दुकान खोल ली। बाद में उन्होंने अन्य मशीनों की रिपेयरिंग भी शुरू की। इसके बाद उन्हें न्यू इंडिया इंश्योरेंस के लिए सालाना मेंटनेंस का कॉन्ट्रैक्ट मिल गया।

जब खरीदा था पहला कंप्यूटर
कैलाश जब 22 साल के थे तो उन्होंने पहली बार बैंक में कंप्यूटर देखा, जहां वह कैलकुलेटर रिपेयर करने के लिए जाते थे। कैलाश की मां चाहती थी कि वह घर में पैसे दें लेकिन कैलाश ने अपने काम को प्राथमिकता दी। उन्होंने 50000 रुपये में पहला कंप्यूटर खरीदा, जिसका इस्तेमाल वह बिलिंग के लिए करने लगे। उस जमाने में लोग उनकी दुकान पर केवल कंप्यूटर को देखने आते थे।

1993 में शुरू की कंपनी
कैलाश काटकर ने 1993 में CAT कंप्यूटर सर्विसेज को शुरू किया। यह कंपनी कंप्यूटर मेंटनेंस सर्विसेज की पेशकश करती थी। इस दौरान कैलाश ने पाया कि रिपेयरिंग के लिए आने वाली मशीनें वायरस से इन्फेक्टेड होती थीं। यह देखकर कैलाश ने अपने भाई संजय को एंटीवायरस प्रोग्राम पर फोकस करने की सलाह दी। संजय अपने मास्टर्स के दिनों में भाई की दुकान पर अक्सर आया जाया करते थे। संजय ने अपने मास्टर्स के दूसरे साल में ही इन्फेक्टेड मशीनों को फिक्स करने वाला प्रोग्राम विकसित कर लिया। जिनका इस्तेमाल कैलाश ने अपनी वर्कशॉप में रिपेयरिंग के लिए आने वाले कंप्यूटर्स में किया।

1995 में आया क्विक हील
एंटीवायरस प्रोग्राम की भविष्य में जबर्दस्त मांग को आंकते हुए दोनों भाइयों ने अपना फोकस हार्डवेयर रिपेयरिंग से एंटी वायरस सॉल्युशन पर करने का फैसला किया। दोनों भाइयों ने 1995 में अपना पहला प्रॉडक्ट क्विकहील एंटीवायरस फॉर DOS लॉन्च किया। लेकिन इसके बारे में लोगों में जागरूकता ना होने की वजह से कुछ खास पहचान नहीं बना पाया। इसलिए दोनों भाइयों ने इसे फ्री में लोगों को देना शुरू किया। बाद में क्विक हील को 700 रुपये में बेचा जाने लगा, यह उस वक्त उपलब्ध सबसे सस्ते विकल्पों में से एक था। उसके बाद काटकर भाइयों ने पीछे पलटकर नहीं देखा। 1998 आने तक काटकर ब्रदर्स ने हार्डवेयर रिपेयरिंग बंद कर दी और एंटीवायरस पर शिफ्ट हो गए। इस दौरान कैलाश प्रॉडक्ट्स की मार्केंटिंग करते थे, जबकि भाई संजय रिसर्च व डेवलपमेंट देखते थे।

1999 में बंद करनी पड़ी थी कंपनी
कहते हैं कि कई बार बिजनेस सफल नहीं हो पाता है, या कई बार उसे फिर से शुरू करना पड़ता है। कुछ ऐसा ही काटकर बंधुओं के साथ हुआ। शुरू होने के पहले 5 साल क्विक हील का कारोबार पुणे तक ही सीमित रहा और यह अभी तक सफल नहीं हो सका था। इन्वेस्टर्स ने उनके इस बिजनेस में रुचि नही दिखाई और इसी एक कारण से 1999 में कारोबार बंद करना पड़ गया।

कुछ सालों बाद, उन्होंने फिर से इसे शुरू करने का मन बनाया और अपने प्रॉडक्ट की एग्रेसिव मार्केटिंग करने की ठानी। 2002 में उन्होंने पुणे के बाहर अपना कारोबार फैलाया। फिर क्विक हील की पहली ब्रांच नासिक में खुली और कंपनी के सभी हार्डवेयर वेंडर्स को क्विकहील सॉफ्टवेयर बेचने को भी कहा गया। 2002 से 2010 के बीच क्विकहील ने पुणे के बाहर दूसरे बड़े शहरों में विस्तार करना शुरू किया।

सफलता के झंडे गाढ़ दिए
2007 में उन्होंने इसको व्यापक रूप से व्यावसायिक पहचान देने के उद्देश्य से अपनी कंपनी Quick Heal Technology (क्विक हील टेक्नोलॉजी) की शुरुआत की। फिर सफलता के ऐसे झंडे गाड़े की आज उनका कारोबार 60 से अधिक देशो में फैल गया है। 2010 में कंपनी को Sequoia Capital से 60 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली। फंड का इस्तेमाल नई ब्रांच खोलने में किया गया। BSE पर क्विक हील टेक्नोलॉजीज का मार्केट कैप फिलहाल 1,341.80 करोड़ रुपये है। कंप्यूटर जगत में एक ट्रस्टेड ब्रांड के रूप में एंटीवायरस प्रोग्राम को और ज्यादा लाभ हुआ। साल 2016 में क्विक हील का आईपीओ (IPO) आया और उसके बाद यह शेयर मार्केट पर लिस्ट हुई। वहीं वर्तमान में Quick Heal की कुल संपत्ति भारतीय मुद्रा में 9.16 अरब है। वहीं दस जनवरी 2023 को इसके एक शेयर की वैल्यू 172.65 भारतीय रुपये है।

Forbes India भी कर चुका है तारीफ
फोर्ब्स इंडिया ने भी कैलाश काटकर के बारे में उनकी शुरुआत से लेकर सफल बिजनेसमैन बनने तक की कहानी को साझा किया है। फोर्ब्स ने लिखा है कि क्विक हील (Quick Heal) एक पूरी तरह से स्वदेशी एंटी-वायरस सॉफ़्टवेयर कंपनी है, जिसने न केवल मैकएफ़ी और सिमेंटेक जैसे बड़े प्रतिस्पर्धियों को मात दी है, बल्कि दुनिया भर के अन्य देशों में भी अपनी धाक जमाई हैं। क्विक हील ने अपने उत्पादों को लेकर विज्ञापन पर ज्यादा खर्च नहीं किया। इसके बजाय, इसने उस पैसे का इस्तेमाल भारत भर के डिस्ट्रीब्युटर और विक्रेताओं के साथ संबंधों को गहरा करने के लिए किया। साथ ही हर बेचे गए उत्पाद पर 15-18 प्रतिशत रेवेन्यू साझा किया।

More From
Prev
Next
Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+