Khalistanis in UK: क्या खालिस्तानियों का गढ़ बन गया है ब्रिटेन, जानें बीते सालों में क्या-क्या हुआ?
पिछले पांच सालों में लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के सामने खालिस्तान समर्थकों ने 10 बार प्रदर्शन और हंगामा मचाया है।

Khalistanis in UK: बीते 19 मार्च 2023 को खालिस्तान समर्थकों ने लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग भवन के बाहर जबरदस्त उत्पात मचाया। खालिस्तान की मांग के नाम पर जुटी उस भीड़ ने उच्चायोग की इमारत पर लगे भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को उतार कर खालिस्तान का झंडा लगा दिया। इस दौरान उन्होंने भारत विरोधी नारे लगाये और इमारत को भी नुकसान पहुंचाया।
कुछ दिनों बाद, 22 मार्च को 2,000 से भी ज्यादा खालिस्तानी समर्थक एकबार फिर भारतीय उच्चायोग के बाहर एकत्र होकर प्रदर्शन करने की योजना बनाने लगे। हालांकि इस बार सुरक्षा व्यवस्था होने की वजह से वे उच्चायोग भवन तक नहीं पहुंच सके।
उच्चायोग पर हमले की पहली घटना नहीं
गौर करने वाली बात है कि लंदन में खालिस्तान समर्थकों ने पहली बार उत्पात नहीं मचाया है। इससे पहले कई दफा वहां ऐसे बड़े प्रदर्शन हो चुके हैं। बता दें कि बीते 5 सालों में खालिस्तान समर्थकों द्वारा लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के सामने 10 बार प्रदर्शन किया गया। साल 2019 में एक बार, 2020 में तीन बार, 2022 में दो बार और 2023 में अभी तक चार बार प्रदर्शन किये जा चुके हैं।
ब्रिटेन खालिस्तानियों का गढ़ है?
80-90 के दशक से ही ब्रिटेन खालिस्तानी गतिविधियों का एक बड़ा केंद्र रहा है। बाद के सालों में छुटपुट घटनाओं को छोड़कर एक लंबे समय तक खालिस्तानी वहां निष्क्रिय रहे। हालांकि, बीते कुछ सालों में खालिस्तानी गतिविधियों में तेजी आई है। इसकी एक बड़ी शुरुआत 30 सिंतबर 2012 को देखने को मिली। दरअसल उस दिन पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल के.एस. बरार पर लंदन में चार लोगों ने चाकुओं से हमला कर दिया।
यह वही लेफ्टिनेंट जनरल बरार थे जिन्होंने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर को खालिस्तानी चरमपंथियों से आजाद कराने के लिए चलाए गये ऑपरेशन ब्लूस्टार का नेतृत्व किया था। तभी से वह सिख चरमपंथियों के निशाने पर थे। इस मामले में 2013 में मंदीप सिंह संधू और दिलबाग सिंह को 14 साल को सजा दी गयी। जबकि हरजीत कौर को 11 साल की सजा मिली। वहीं पहले से गिरफ्तार बरजिंदर सिंह सांघा को साढ़े दस साल की कैद हुई।
फिर एक बड़ा मामला तब सामने आया जब साल 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूनाइटेड किंगडम की यात्रा पर जाने वाले थे। दरअसल, उनकी इस यात्रा से एक दिन पहले खालिस्तानियों ने एक वीडियो जारी किया। उस वीडियो में मोस्ट-वांटेड खालिस्तानी चरमपंथी परमजीत सिंह पम्मा नजर आया और वह पीएम नरेंद्र मोदी और महात्मा गांधी के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल कर भारत विरोधी अभियान चला रहा था।
साल 2019 में खालिस्तान संबंधित मामले
3 जुलाई 2019 को ब्रिटेन की आतंकवाद-रोधी पुलिस ने बर्मिंघम में भारत में चरमपंथी गतिविधियों के आरोपों और धोखाधड़ी के अपराधों में दो ब्रिटिश सिख महिलाओं को गिरफ्तार किया। हालांकि, बाद में दोनों को जमानत पर रिहा कर दिया गया। वहीं जुलाई में ही भारत और न्यूजीलैंड के बीच विश्वकप क्रिकेट सेमीफाइनल मैच के दौरान मैनचेस्टर में ओल्ड ट्रैफर्ड स्टेडियम से 'पंजाब रेफरेंडम 2020' टी-शर्ट और खालिस्तान समर्थक नारे लगाये गये। फिर सितंबर में लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करने और इमारत में तोड़फोड़ करने के जुर्म में दो खालिस्तानियों को गिरफ्तार किया गया।
साल 2020 में प्रदर्शनों में शामिल रहे पाकिस्तानी
2020 की शुरुआत होते ही खालिस्तान समर्थित सभी संगठनों ने भारतीय गणतंत्र दिवस के दिन लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के सामने भारी प्रदर्शन की योजना बनायी और संविधान की प्रतियां जलाने का फैसला किया। इसके लिए खालिस्तान संगठनों ने लोगों को लामबंद किया। वहीं पहले से तैयार उच्चायोग भवन को सुरक्षा प्रदान की गयी थी। अनुमान था कि लगभग 15,000 प्रदर्शनकारी वहां इकट्ठा होंगे। मगर 26 जनवरी के दिन तकरीबन 1,000 खालिस्तान समर्थकों ने उच्चायोग भवन के सामने प्रदर्शन किया और उत्पात मचाया।
इसके बाद मार्च के महीने में पाकिस्तानी मूल के ब्रिटिश नागरिकों सहित खालिस्तान समर्थकों ने लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान कश्मीर और खालिस्तान की आजादी के लिए नारे लगाए गये।
फिर 30 जुलाई को ब्रिटिश सरकार ने खालिस्तानी चरमपंथी समूह सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के रेफरेंडम 2020 को खारिज कर दिया। जिसमें पंजाब को शेष भारत से अलग करने की मांग की गई थी। तब ब्रिटिश सरकार ने स्पष्ट कहा कि "हम पंजाब को भारत का हिस्सा मानते हैं।" जिसके बाद सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) ने प्रतिक्रिया देते हुए बयान दिया कि "हम पंजाब को अलग देश बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र में जायेंगे। आज ब्रिटेन भारत की क्षेत्रीय अखंडता में विश्वास रखता है, लेकिन कल जब पंजाब की आजादी का समर्थन करते लाखों सिखों को ब्रिटेन देखेगा तो पक्का पुनर्विचार करेगा।"
इसी साल भारत के स्वाधीनता दिवस पर भी लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर ब्रिटिश पाकिस्तानियों ने इस दिन को "ब्लैक डे" कहकर प्रदर्शन किया। जिसमें खालिस्तान समर्थक भी शामिल रहे। इस प्रदर्शन में पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू और कश्मीर सहित खालिस्तान के झंडे लहराये गये।
साल 2021 में पाकिस्तानियों ने किया समर्थन
1984 के ऑपरेशन ब्लूस्टार की वर्षगांठ के अवसर पर 6 जून को लंदन में गिनती के खालिस्तानी समर्थकों ने 'आजादी रैली' के नाम से एक मार्च निकाला। इस दौरान भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को जलाया गया। इस रैली के खिलाफ भारत सरकार ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी थी। वहीं 31 अक्टूबर को लंदन में खालिस्तानी संगठनों ने एकबार फिर भारत से पंजाब विभाजित करने के लिए रेफरेंडम करवाया जिसे 2,000 से भी कम लोगों का समर्थन हासिल हुआ। गौरतलब है कि इस रेफरेंडम को ज्यादातर पाकिस्तानियों का ही समर्थन प्राप्त हुआ।
साल 2022 और पाकिस्तानी 'तोता'
16 जनवरी 2022 को यूनाइटेड किंगडम में सिख समुदाय ने खालिस्तानी संगठनों के नेतृत्व वाले भारत विरोधी अभियान के खिलाफ आवाज उठाई। इस सिख समुदाय के नेताओं ने साउथहॉल के पार्क एवेन्यू में स्थित गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार द्वारा सिख समुदाय की मदद करने के लिए धन्यवाद दिया।
25 जनवरी 2022 को दल खालसा के संस्थापक और ब्रिटेन के सिख अलगाववादी नेता जसवंत सिंह ठेकेदार ने पाकिस्तान पर आरोप लगाया कि वह भारत के खिलाफ अपने नापाक मंसूबों को पूरा करने के लिए सिखों का इस्तेमाल कर रहा है। पाकिस्तान कभी भी सिखों का हमदर्द नहीं रहा और न कभी होगा। वहीं अमेरिका में प्रतिबंधित खालिस्तान समर्थक संगठन सिख फॉर जस्टिस (एसएफजे) के सदस्य गुरपतवंत सिंह पन्नू के बारे में उन्होंने कहा कि "वह सिख नहीं है, वह पाकिस्तान का तोता है। उसका मकसद पैसा कमाना है न कि खालसा।"
गणतंत्र दिवस के दिन फिर से खालिस्तानी चरमपंथी परमजीत सिंह पम्मा सहित लगभग सौ खालिस्तानियों ने भारतीय उच्चायोग के सामने प्रदर्शन किया। इसी बीच यूनाइटेड किंगडम की नियामक संस्था ऑफकॉम ने खालसा टेलीविजन लिमिटेड के लाइसेंस को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। यह टीवी चैनल सिखों को बरगलाने का काम करता था।
नवंबर 2022 में ब्रिटेन में खालिस्तानियों ने एकबार फिर बड़े प्रदर्शन किये। इस बार उन्होंने दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद जग्गी जौहल को छुड़ाने के लिए विश्वव्यापी अभियान छेड़ा। दरअसल, जग्गी ब्रिटिश नागरिक है। जग्गी जौहल उर्फ जगतार सिंह जौहल को पंजाब पुलिस ने 4 नवंबर 2017 को आर्म्स एक्ट के तहत जालंधर से गिरफ्तार किया था। 'फ्री जग्गी नाउ' नामक अभियान के तहत खालिस्तानी कार्यकर्ताओं ने लंदन और मैनचेस्टर सहित चार अन्य शहरों में विरोध प्रदर्शन किये।
2023 में भी किया प्रदर्शन
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26 जनवरी 2023 को लंदन में भारतीय उच्चायोग और बर्मिंघम में भारतीय वाणिज्य दूतावास के बाहर खालिस्तानियों ने ब्रिटिश पाकिस्तानी नागरिकों के साथ मिलकर भारत विरोधी प्रदर्शन किये। प्रदर्शनकारियों ने भारत के गणतंत्र दिवस को "काला दिवस" करार दिया और ब्रिटिश सरकार से हस्तक्षेप करने की मांग की। इसके बाद 18 फरवरी को भी खालिस्तानी समर्थकों भारतीय उच्चायोग के बाहर भारत विरोधी और खालिस्तानी समर्थक नारे लगाये थे।
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