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Khalistanis in Canada: खालिस्तान की मांग से लेकर मंदिरों पर हमले, कनाडा क्यों बन रहा भारत विरोधियों का अड्डा?

पिछले कुछ सालों में कनाडा खालिस्तानी समर्थकों अथवा अलगाववादियों का बड़ा केंद्र बन गया है। भारत सरकार ने कई बार कनाडा सरकार से इस बात पर नाराजगी जताई है।

Khalistan to attacks on temples why Canada becoming a base for anti-India

Khalistanis in Canada: 4 जून 2023 को कनाडा के ब्रैम्पटन शहर में लगभग 5 किमी लंबी परेड निकाली गयी। इसमें सिख अंगरक्षकों द्वारा प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या को दर्शाते हुए एक विवादित झांकी भी शामिल थी। यह परेड खालिस्तान के समर्थकों द्वारा ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी (6 जून) से दो दिन पहले निकाली गयी थी।

भारत के विदेशमंत्री एस. जयशंकर ने इस पर कड़ा एतराज जताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के रिश्तों के लिए सही नहीं है। हमें समझ नहीं आ रहा है वहां ऐसा क्यों होने दिया जा रहा है? वोट बैंक की राजनीति के अलावा इसके पीछे कोई दूसरी वजह नहीं दिख रही। इन अलगाववादियों को छूट देना सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि कनाडा के लिए भी अच्छा नहीं होगा। जबकि भारत में कनाडा के उच्चायुक्त कैमरन मैके ने 8 जून (गुरुवार) को इस घटना की निंदा करते हुए कहा कि कनाडा में घृणा या हिंसा के महिमामंडन के लिए कोई जगह नहीं है।

हालांकि, कनाडा में भारत और भारतीयों के खिलाफ नफरती अपराधों, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमले और भारत विरोधी गतिविधियों की कोई नयी कहानी नहीं है। बीते कुछ सालों से कनाडा में भारत विरोधी गतिविधियां बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं।

खालिस्तानियों ने कराया जनमत संग्रह

कनाडा में 18 सितंबर 2022 को कनाडा के ओंटारियो शहर में भारत में प्रतिबंधित आंतकी संगठन सिख फॉर जस्टिस ने पंजाब राज्य को भारत से अलग करके एक खालिस्तान देश बनाने की मांग को लेकर जनमत संग्रह का आयोजन किया। हालांकि, इस जनमत संग्रह में कितने लोगों ने मत दिया या नहीं दिया? इसका कोई प्रमाणिक आंकड़ा अब तक सामने नहीं आया है लेकिन इस जनमत संग्रह को लेकर भारत सरकार ने कनाडा के सामने कड़ा एतराज जताया था।

तब कनाडा की ट्रूडो सरकार ने इसे 'शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रक्रिया' बताते हुए जनमत संग्रह पर रोक लगाने से ही इनकार कर दिया था। साथ ही कहा कि कनाडा में व्यक्तियों को इकट्ठा होने और अपने विचार व्यक्त करने का अधिकार है। इससे दोनों देशों के बीच तल्खी के तौर पर देखा गया था।

हिंदू मंदिरों पर एक साल में 9 हमले

● 5 अप्रैल 2023 को ओंटारियो के विंडसर स्थित एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गई
● फरवरी 2023 में मिसिसॉगा में राम मंदिर को तोड़ दिया गया
● जनवरी 2023 में ब्रैम्पटन में एक हिंदू मंदिर को भारत विरोधी भित्तिचित्रों से विरूपित किया गया
● नवंबर 2022 को हिंदू सभा मंदिर और जगन्नाथ मंदिर में तोड़फोड़ की गई
● सितंबर 2022 को टोरंटो के स्वामीनारायण मंदिर में तोड़-फोड़ की गई
● जुलाई 2022 को रिचमंड हिल के विष्णु मंदिर में मौजूद महात्मा गांधी की प्रतिमा को तोड़ दिया गया
● 30 जनवरी 2022 को मिसिसॉगा में हिंदू हेरिटेज सेंटर में दान पेटी और मुख्य कार्यालय में तोड़फोड़ की गई
● 25 जनवरी 2022 को गौरी शंकर मंदिर और जगन्नाथ मंदिर में तोड़-फोड़ की गई
● 15 जनवरी 2022 को ब्रैम्पटन में एक मंदिर में तोड़-फोड़ की गई
पीएम मोदी को 'अपशब्द', भिंडरावाला 'शहीद'

14 फरवरी 2023 में कनाडा के मिसिसॉगा में जब श्रीराम मंदिर में तोड़फोड़ की गई थी, तब मंदिर की दिवारों पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे लिखे गये थे। यही नहीं खालिस्‍तान आंदोलन के संस्‍थापक जनरैल सिंह भिंडरावाला को 'शहीद' लिखा गया था।

मंदिर दिवारों पर लिखा कि Declare Modi Terrorist, Hindustan Murdabad इसके साथ बगल की दीवार पर लिखा था Sant Bhindrawala is Martyr, बड़ी बात यह है कि 5 अप्रैल 2023 को ओंटारियो के विंडसर स्थित एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की गयी, तब भी भारत विरोधी नारे लिखे गये थे।

कनाडा में खुलेआम घूमते हैं खालिस्तानी आतंकी

भारत में प्रतिबंधित संगठन खालिस्तान टाइगर फोर्स (केटीएफ) का प्रमुख हरजीत निज्जर लंबे समय से कनाडा में रह रहा है। इसे जुलाई 2020 में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा आतंकवादी के रूप में नामित किया था। यह संगठन सीमा पार से हथियारों, गोला-बारूद और विस्फोटकों की भारत में तस्करी करता है।

इसके अलावा खालिस्तान लिबरेशन फोर्स, बब्बर खालसा इंटरनेशनल, इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन, खालिस्तान टाइगर फोर्स जैसे कई प्रतिबंधित संगठनों के आका खुलेआम कनाडा में घूमते हैं और भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देते हैं। वहीं इन सभी आतंकी संगठनों के पाकिस्तान की आईएसआई से सीधे संबंध हैं।

2 जनवरी 2016 में पठानकोट में आतंकवादी हमले के कुछ महीनों बाद भारत की इंटेलिजेंस एजेंसियों ने कनाडा सरकार को उसके देश में खालिस्तानी आतंकी कैंपों के संचालन को लेकर अलर्ट किया था। कनाडा सरकार को भेजे गये अलर्ट में कहा गया था कि ब्रिटिश कोलंबिया की मिशन सिटी में खालिस्तान समर्थक आतंकवादियों की ओर से एक कैंप चलाया जा रहा है ताकि पंजाब में हमले किये जा सकें। इसे केटीएफ प्रमुख हरजीत निज्जर ही लीड कर रहा था। लेकिन कनाडा सरकार ने आज तक भारत विरोधी तत्वों पर नकेल कसने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है।

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