ISRO: बीते 10 सालों में इसरो ने रचे 10 बड़े कीर्तिमान, दुनिया ने माना लोहा

ISRO: अंतरिक्ष की दुनिया में भारत ने एक बार फिर से नया इतिहास रचा है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) ने 30 जुलाई 2023 को एक साथ 7 सैटेलाइट्स लॉन्च किये हैं। इनमें एक स्वदेशी और छह सिंगापुर के सैटेलाइट शामिल हैं। इन उपग्रहों को पीएसएली-सी56 रॉकेट के जरिये आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से लॉन्च किया गया है। हालांकि, भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान के नाम दुनियाभर की बहुत सी उपलब्धियां इतिहास में दर्ज हैं। बीते कुछ सालों में इसरो की चर्चा दुनियाभर में हो रही है। जहां साल 1975 में भारत ने रूस की मदद से अपने पहले उपग्रह 'आर्यभट्ट' की लॉन्चिंग की थी।

इसरो का इतिहास

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन आज दुनिया की सबसे भरोसेमंद स्पेस एजेंसी में से एक है। इसरो की वेबसाइट पर दी गयी जानकारी के मुताबिक दुनियाभर के करीब 36 देश इसरो के माध्यम से अपने उपग्रहों को लॉन्च कराते हैं। इसरो के मुताबिक 16 फरवरी 1962 को डॉ. विक्रम साराभाई और डॉ. रामानाथन ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष अनुसंधान समिति (इन्कोस्पार) का गठन किया। जिसका तिरुवंनतपुरम के थुंबा में मौजूद सेंट मैरी मैगडेलेन चर्च में थुंबा इक्वेटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन बनाया गया। साल 1963 में पहला साउंडिंग रॉकेट छोड़ा गया।

ISRO made 10 big records In the last 10 years know about them

बाद के सालों में इसका स्वरूप और स्थान बदल गया। 15 अगस्त 1969 को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान (इसरो) का गठन किया गया। इसरो ने अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग करने के लिए विस्तारित भूमिका के साथ इन्कोस्पार की जगह ली। साथ ही अंतरिक्ष विभाग की स्थापना की गयी, जिसे 1972 में इसरो के तहत लाया गया।

इसरो की 10 बड़ी उपलब्धियां

चंद्रयान-3 मिशन: 14 जुलाई 2023 को इसरो ने श्रीहरिकोटा से चंद्रयान-3 को लॉन्च किया था। इसरो के अनुसार, चंद्रयान-3 के 23 या 24 अगस्‍त को चंद्रमा की सतह पर लैंड करने की उम्मीद है। चंद्रयान मिशन का लक्ष्य चंद्रमा के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी जुटाना है। यह अंतरिक्ष यान चंद्रमा के अज्ञात दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र पर उतरेगा। जहां यह पानी, बर्फ और खनिजों की जांच करेगा।

36 सैटेलाइट को किया लॉन्च: 26 मार्च 2023 को इसरो ने ब्रिटेन के 36 सैटेलाइट को एक साथ लॉन्च किया। भेजे गये सभी सैटेलाइट का कुल वजन 5,805 किलोग्राम था। इस मिशन को LVM3-M3/वनवेब इंडिया-2 नाम दिया गया था। इसमें इसरो के 43.5 मीटर लंबे एलवीएम3 रॉकेट (GSLV-MK III) का इस्तेमाल किया गया। ये इसरो का सबसे भारी रॉकेट है।

चंद्रयान -2 मिशन: चंद्रयान-2 को 22 जुलाई, 2019 को श्रीहरिकोटा से जीएसएलवी मार्क 3 यानी बाहुबली रॉकेट द्वारा लॉन्च किया गया था। हालांकि, कुछ तकनीकि खराबी की वजह से अंतिम वक्त में चांद पर अंतरिक्ष यान की सॉफ्ट लैंडिंग नहीं हो पायी थी। जो इसरो के वैज्ञानिकों के लिए झटका तो था लेकिन इससे इसरो को बहुत कुछ सीखने को मिला था।

104 उपग्रह एक साथ छोड़े: इसरो ने 15 फरवरी, 2017 को पीएसएलवी के जरिए एक साथ 104 सैटेलाइट लॉन्च करके वर्ल्ड रिकॉर्ड बना दिया था। इससे पहले यह रिकॉर्ड रूस के नाम दर्ज था, जिसने साल 2014 में सबसे अधिक एक साथ 37 सैटेलाइट लॉन्च किये थे। भारतीय वैज्ञानिकों ने 104 उपग्रह एक साथ लॉन्च कर इतिहास रच दिया था।

देश का सबसे भारी रॉकेट लॉन्च: 5 जून 2017 को इसरो ने भारत का सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी एमके3 लॉन्च किया था। यह रॉकेट अपने साथ 3,136 किलो वजन का कम्युनिकेशन सैटेलाइट जीसैट-19 लेकर गया। इससे दुनियाभर के देशों में इसरो के प्रति विश्वास बढ़ा क्योंकि इससे पहले भारत को भारी उपग्रहों को भेजने के लिए विदेशी प्रक्षेपकों पर निर्भर रहना पड़ता था।

स्वदेशी नेविगेशन सिस्टम मिला: 28 अप्रैल 2016 भारत का सातवां नेविगेशन उपग्रह (इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम) लॉन्च किया गया था। इसके साथ ही भारत को अमेरिका के जीपीएस सिस्टम की तरह ही अपना खुद का नेविगेशन सिस्टम मिल गया। इससे पहले अमेरिका और रूस ने ही ये उपलब्धि हासिल की थी।

स्वदेशी स्पेस शटल किया लॉन्च: 23 मई 2016 को इसरो ने इतिहास रचते हुए भारत में पूरी तरह से बने स्पेस शटल RLV-TD को लॉन्च किया था। यह भारत का स्वदेशी 'स्पेस शटल' था। इससे पहले अमेरिका, रूस, फ्रांस और जापान स्पेस शटल लॉन्च कर चुके थे।

जीएसएलवी मार्क-2: इसरो ने 5 जनवरी 2014 को जीएसएलवी मार्क 2 का सफल प्रक्षेपण भारत के लिए बड़ी कामयाबी थी। क्योंकि, इसमें भारत ने अपने ही देश में बनाया हुआ क्रायोजेनिक इंजन लगाया था। इसके बाद भारत को सैटेलाइट लॉन्च करने के लिए दूसरे देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। भारत के पास तीन सक्रिय परिचालन प्रक्षेपण यान हैं: ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी), जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी), जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट प्रक्षेपण यान एमके-III (एलवीएम3)।

मंगलयान सफल हुआ: 5 नवंबर 2013 को इसरो ने वो करके दिखाया, जिससे दुनिया अचंभित रह गई थी। इसरो के वैज्ञानिकों की बदौलत भारत मंगल तक पहुंचने के पहले प्रयास में सफल रहने वाला दुनिया का पहला देश बना था। अमेरिका, रूस और यूरोपीय स्पेस एजेंसियों को कई प्रयासों के बाद मंगल ग्रह पहुंचने में सफलता मिली थी। जबकि भारत ने पहली बार में ऐसा किया था। तब इसरो की चर्चा अंतराष्ट्रीय स्तर पर खूब हुई थी।

431 विदेशी सैटेलाइट लॉन्च किए: इसरो ने 26 मई, 1999 से लेकर अब तक 431 विदेशी सैटेलाइट को सफलता पूर्वक लॉन्च किया है।

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