Israel: कहां हैं इज़राइल के बंधक नागरिक, पाँच महीने बाद भी हमास छोड़ नहीं रहा
Israel: हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इज़राइल पर हमला करके 1,200 से अधिक लोगों को मार डाला था और 240 से अधिक नागरिकों और सैनिकों का अपहरण कर लिया था।
तभी से इज़राइल सैन्य अभियान के साथ जवाब देने की कोशिश कर रहा है, लेकिन वह न तो हमास को नष्ट कर सका है और ना ही सभी बंधकों को छुड़वा ही सका है। गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, इज़राइल के सबसे घातक हमले में अब तक 32,000 से अधिक फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें से अधिकतर महिलाएं और बच्चे शामिल हैं।

जान माल के व्यापक नुकसान के बावजूद हमास हथियार नहीं डाल रहा है और ना ही बंधकों को छोड़ रहा है। बंधकों की दुर्दशा को हमास के हमले के दौरान नागरिकों की रक्षा करने में इज़राइल की विफलता के रूप में भी देखा जा रहा है।
क्या बंधक कभी घर लौट पाएंगे?
एक दिसंबर 2023 तक के अस्थायी संघर्ष विराम समझौते के तहत कुछ बंधकों को रिहा किया गया था। नए संघर्ष विराम और बंधकों की मुक्ति के लिए किसी समझौते पर पहुंचने के तमाम अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के बाद भी दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता होता दिखाई नहीं दे रहा है।
दर्जनों परिवार जिनके रिश्तेदारों को बंधक के रूप में गाजा ले जाया गया था, उन्हें इस इज़राइल-हमास युद्ध के पांच महीने बीत जाने के बाद भी उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं पड़ रही है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या बंधक कभी घर लौट पाएंगे? क्योंकि इज़राइल का मानना है कि बंधकों में से कम से कम 30 गोलीबारी या कैद में मारे जा चुके हैं।
माना जाता है कि बंधकों को गाजा में हमास के व्यापक सुरंग नेटवर्क के अंदर या अन्य ठिकानों पर रखा गया है। बंधकों के परिवारों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पीड़ा पहुंचाने के लिए तेल अवीव और अन्य जगहों पर विरोध प्रदर्शन शुरू कर रिहाई के लिए अपनी मांगें तेज कर दी है।
लोग इस लंबी कैद की तुलना मौत की सज़ा से कर रहे हैं। समय बीतने के साथ-साथ इज़राइल को कई नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में, संयुक्त राज्य अमेरिका, कतर और मिस्र के नेतृत्व में बातचीत के जरिए एक समझौते की कोशिश की गई लेकिन हमास की कड़ी शर्तों के कारण यह प्रयास फेल हो गया है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारी दबाव में
फरवरी में इज़राइल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा इजरायली प्रतिनिधियों को युद्धविराम वार्ता से वापस बुलाने के फैसले का व्यापक विरोध हुआ और 14 फरवरी को यरूशलेम में लोगों ने भारी संख्या में एकत्र होकर प्रधानमंत्री का विरोध किया। स्पष्ट है कोई समाधान ना होते देखकर लोगों की हताशा बढ़ती जा रही है।
तेल अवीव में भी हमास की कैद से बंधकों की रिहाई की मांग को लेकर एक विरोध प्रदर्शन आयोजित हुआ। बंधकों के रिश्तेदारों ने हमास की कैद में पड़े लोगों की तस्वीरों के साथ रैली निकाली, लेकिन इज़राइल के प्रधान मंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने पूर्ण जीत तक युद्ध जारी रखने की कसम खाई है। उनका मानना है कि हमास के नेटवर्क को खत्म करने और बंधकों की रिहाई के लिए लंबे समय तक सैन्य दबाव जरूरी है। लेकिन उनकी इस सोच का विरोध इज़राइल में ही होने लगा है। शीर्ष अधिकारी और नागरिक बंधकों को बातचीत के जरिए ही मुक्त कराने का दबाव बना रहे हैं।
आलोचकों का यह भी कहना है कि नेतन्याहू ने अपने राजनीतिक विचारों को बातचीत की रणनीति के मार्ग में रोड़ा बना रखा है। शायद उनके मन में बंधकों के हित से ज्यादा हमास को मिटाना है। पांच महीने के युद्ध के बाद भी अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने से उनका बंधकों पर से ध्यान कम होता जा रहा है। बहुत लोगों को उम्मीद थी कि मुस्लिमों के पवित्र महीने रमज़ान से पहले बंधकों को वापस लाने के लिए कोई समझौता हो जाएगा। लेकिन उसमें भी निराशा ही हाथ लगी है। रमज़ान तो आ गया है लेकिन संभावित समझौते पर बातचीत अभी भी अटकी हुई है।
परिवारों की निराशा चरम पर
एक माँ जिसके बेटे को हमास ने कैद कर रखा है, उसने अपनी निराशा जताते हुए कहा जब तक मैं अपने बेटे को गले नहीं लगा लेती, तब तक अपने बंधकों की रिहाई की किसी बात पर विश्वास नहीं कर सकती। मुझे इस पर विश्वास करने में समय लगेगा कि वह हमारे पास वापस आ गया है।
यही पीड़ा गाजा कई परिवारों की है। लोग कह रहे हैं कि अब यह पीड़ा समाप्त होनी चाहिए। क्योंकि गाजा में हजारों लोगों की बहुत सारी पीड़ाएँ हैं। बंधकों के रिश्तेदार अब यह खुलकर कह रहे हैं कि सरकार ने वह नहीं किया जो वे कर सकती थी। वे (सरकार चला रहे लोग) अभी भी वह नहीं कर रहे हैं जो वे कर सकते हैं। जाहिर है, हमास बातचीत में विश्वसनीय नहीं है, लेकिन हम अपने लोगों को वापस चाहते हैं, और जीवित वापस चाहते हैं।
नारकीय स्थिति में हैं बंधक
हमास सभी बंधकों को मनोवैज्ञानिक रूप से प्रताड़ित कर रहा है। जो भी नवंबर 2023 में छूट कर आए हैं, उनका कहना है कि कुछ महिला बंधकों का यौन शोषण भी किया जा रहा है। उनमें से कुछ को पीटा भी गया। सभी को बहुत कम मात्रा में भोजन दिया जा रहा है और वहाँ लगभग भुखमरी के हालात थे। बहुत कम पानी दिया जाता है और उन्हें नशीला पदार्थ भी खिलाया जाता है। किसी को भी तेज आवाज में बोलने नहीं दिया जाता है।
डॉक्टर यह चेतावनी दे रहे हैं कि उन लोगों के लिए उपचार करना अधिक कठिन होगा जो हमास की चंगुल से छूट कर आएंगे भी। जब वे वापस आएंगे और उन्हें यह पता चलेगा कि उनके प्रियजनों की हत्या कर दी गई है या उनके घर को नष्ट कर दिया गया है, तो उनकी रिकवरी बहुत मुश्किल होगी। भले ही वे मुक्त हो जाएं। जनवरी में हमास ने बंधकों का एक वीडियो जारी किया था, उसमें स्पष्ट दिखाई दे रहा था कि धँसे हुए गाल, धुंधली आँखें और धीमी आवाज़ के साथ बंधक किस स्थिति में जी रहे हैं।
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