Israel: नागरिकों का विरोध प्रदर्शन टला, इजरायल सरकार का "ऑपरेशन शील्ड एंड ऐरो" रहेगा जारी
Israeli: बीते 25-26 अप्रैल को ही इजरायल ने अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाई और ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक यह दिन 14 मई को आता है, पर उत्सव मनाने के दिनों में इजरायल भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर जूझ रहा है।

Israel: इजरायल में यह शनिवार वैसा नहीं होगा, जैसे पिछले कई शनिवार गुजरे। प्रत्येक शनिवार को इजरायली नागरिक प्रस्तावित न्यायिक सुधार कानून के विरोध में सड़कों पर उतर जाते थे और जमकर नारेबाजी करते थे। लेकिन गाजा की तरफ से लगातार दागी जा रही मिसाइलों की वजह से लोगों को शेल्टर में जाना पड़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि विरोध प्रदर्शन टला है, लेकिन विरोध जारी रहेगा, हम लोकतंत्र को बचा रहे हैं और इजरायल में लोकतंत्र बचा रहेगा।
नागरिक लोकतंत्र बचाने के लिए जूझ रहे हैं और इजरायली सरकार अपनी साख बचाने में। यही वजह है कि नेतन्याहू सरकार अपने दुश्मनों के प्रति ज्यादा सख्त रवैया दिखा रही है। ऑपरेशन शील्ड एंड ऐरो चलाया जा रहा है, जिसके तहत इजरायली सेना गाजा पट्टी क्षेत्र में फिलिस्तीन इस्लामिक जिहाद संगठन के ठिकानों पर हवाई हमले कर रही है।
इस अनिश्चित लड़ाई की शुरुआत दो मई को हुई। उस दिन फिलिस्तीन के आतंकवादी समूह पीआईजे की ओर से इजरायल पर सौ से ज्यादा रॉकेट दागे गए थे। इसी दिन इजरायल की जेल में बंद पीआईजे के पूर्व सदस्य खादर अदनान की मौत हो गई थी। वह पिछले 87 दिनों से भूख हड़ताल पर था। ऐसे में इसे बदले की कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है।
एक-दूसरे से बदले की कार्रवाई में इजरायल और फिलिस्तीन में से कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। दोनों तरफ से हवाई हमले हो रहे हैं। एक-दूसरे पर आरोप भी लगाए जा रहे हैं।
फिलिस्तीन का कहना है कि इजरायल ने आम नागरिकों को निशाना बनाया। यूएन ने भी इजरायल को तुरंत हमले रोकने की अपील की है। यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने गाजा में नागरिकों की मौत को अस्वीकार्य बताया है। इजरायल ऐसे में अलग-थलग पड़ सकता है, लेकिन इजरायल को इसकी फिक्र नहीं है। इजरायल को फिक्र है तो अपने आयरन डोम सिस्टम की, जो अपेक्षा अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाया।
बताया जा रहा है कि तकनीकी खराबी की वजह से आयरन डोम गाजा की तरफ से आ रहे रॉकेट को नष्ट करने में कामयाब नहीं हुआ और यह रॉकेट रेहोवोट शहर की एक इमारत से टकरा गया, इसमें एक नागरिक के मरने और कई लोगों के घायल होने की खबर है। इससे पहले दो मई के हमले में भी आयरन डोम कसौटियों पर खरा नहीं उतरा था। हालांकि इजरायली सेना के प्रवक्ता रियर एडमिरल डेनियल हागरी ने कहा कि तकनीकी खराबी की वजह से ऐसा हुआ, इसकी जांच कराई जाएगी। इससे पहले भी उन्होंने यह सफाई दी थी और कहा था कि आयरन डोम 91 फीसदी सफल रहा है।
दरअसल इस वक्त आयरन डोम की सफलता इजरायल की साख बनाए रखने और घरेलू संकट को कुछ कम करने के लिए बहुत जरूरी है। इजरायल का घरेलू संकट इस साल की शुरुआत से ही बना हुआ है। जनता विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर है। सरकार के प्रस्तावित न्यायिक सुधारों को इजरायली नागरिक लोकतंत्र के लिए खतरा मान रहे हैं। दरअसल इन सुधारों के लागू हो जाने से सुप्रीम कोर्ट की पावर कम हो जाएगी। प्रदर्शनकारियों का मानना है कि भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे होने की वजह से नेतन्याहू अपने बचाव में ऐसा कर रहे हैं।
लोगों के भारी विरोध को देखते हुए नेतन्याहू ने मार्च में सुधार प्रक्रिया पर रोक लगा दी थी। उम्मीद थी कि विचार विमर्श से बात बन जाएगी, लेकिन बात बन ही नहीं रही है। इजरायली नागरिक कई मसलों पर ऐतराज जता रहे हैं। इजरायली सरकार अति-रूढ़िवादी यहूदियों को अनिवार्य सैन्य सेवा से छूट देने का मन भी बना रही है, जिसका भारी विरोध किया जा रहा है। विरोध प्रदर्शन में महिलाएं भी आगे हैं। हर शनिवार को विरोध प्रदर्शन जारी था, पर इस शनिवार को विरोध प्रदर्शन रद्द कर दिया गया, पर यह आगे जारी रहेगा। ऐसे में अपने नागरिकों की सुरक्षा में जरा सी चूक सरकार के लिए और भी भारी पड़ सकती है।
एक और अहम बात यह है कि हाल ही में इजरायल ने यूक्रेन को हाइटैक मिसाइल डिफेंस सिस्टम देने की बात कही थी, जिससे यूक्रेन अपने नागरिकों को रूसी मिसाइलों से बचा सकेगा। यूक्रेन कब से आयरन डोम के लिए इजरायल की ओर देख रहा था, लेकिन इजरायल ने पहले इंकार कर दिया था। ऐसा माना गया कि वह रूस और यूक्रेन मसले में बीच में नहीं पड़ना चाहता।
दूसरी तरफ विशेषज्ञों का मानना है कि इजरायल को संदेह था कि रूस की शक्तिशाली मिसाइलों को आयरन डोम शायद झेल नहीं पाएगा, ऐसे में इजरायल ने एडवांस तकनीक पर काम जारी रखा। वह अपनी किसी भी सुरक्षा तकनीक और हथियारों की विफलता को झेल नहीं सकता, क्योंकि इस छोटे से देश की पहचान आधुनिक हथियार निर्माता के रूप में है। यही वजह है कि उसने आयरन डोम अब तक किसी भी देश को निर्यात नहीं किया था। उसने यह एयर डिफेंस सिस्टम अमेरिका की मदद से तैयार किया था।
अमेरिका ऐसा राष्ट्र है, जिसने इजरायल को उसकी आजादी की घोषणा के साथ ही स्वतंत्र देश का दर्जा दे दिया था। बता दें कि हिब्रू कैलेंडर के मुताबिक बीते 25-26 अप्रैल को ही इजरायल ने अपनी आजादी की 75वीं वर्षगांठ मनाई और ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक यह दिन 14 मई को आता है, पर उत्सव मनाने के दिनों में इजरायल भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर जूझ रहा है।
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