Online Betting Apps: 'ऑनलाइन सट्टेबाजी' से करोड़पति बनने का सपना देखने वाले लोग कर रहे हैं आत्महत्या
ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारण रातों-रात करोड़पति बनने का सपना दिखाने वाली ये ऑनलाइन बेटिंग ऐप्स खुद करोड़ों कमा रही हैं जबकि इनके चंगुल में फंसकर अपना धन डुबोकर कई लोग आत्महत्या कर चुके हैं।

Online Betting Apps: 15 अप्रैल 2023 को कोयंबटूर, पोल्लाची के एक होटल में एक 35 वर्षीय कार डीलर ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। इस शख्स ने एक ऑनलाइन रमी ऐप से आईपीएल मैचों पर सट्टेबाजी में ₹90 लाख गंवा दिये थे। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस पीड़ित द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सट्टेबाजी ऐप की जांच कर रही है और आत्महत्या का अन्य कारण जानने की भी कोशिश कर रही है।
हालांकि, ऑनलाइन गेम के जरिए सट्टेबाजी में पैसा डुबोकर आत्महत्या करने का ये कोई पहला केस नहीं है। इससे पहले भी देश के कई अलग-अलग राज्यों से ऐसे आत्महत्या के मामले सामने आ चुके हैं। चलिए समझते हैं कि आखिर ये ऑनलाइन बेटिंग गेम आखिर हैं क्या? कैसे की जाती है सट्टेबाजी और कितने ऐसे मामले सामने आ चुके हैं और सरकार क्या कर रही है इस पर?
सिर्फ तमिलनाडु में 40 ने की खुदकुशी?
'दि प्रिंट' को दिये एक इंटरव्यू में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के सांसद टी.आर. बालू ने मार्च 2023 में चेन्नई के एक शख्स विनोद की आत्महत्या के बाद कहा था कि पिछले तीन सालों में ऑनलाइन सट्टेबाजी की वजह से बड़ी रकम गंवाने के बाद राज्य में 40 से ज्यादा लोगों ने आत्महत्या कर ली है।
वहीं इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक 9 मार्च, 2023 को पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) के अध्यक्ष अंबुमणि रामदास ने कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी की वजह से अगस्त 2021 से अब तक 47 लोग आत्महत्या कर चुके हैं।
कितना बड़ा है ऑनलाइन सट्टा का बाजार?
दोहा के इंटरनेशनल सेंटर फॉर स्पोर्ट सिक्योरिटी ने साल 2016 में एक रिपोर्ट के हवाले से बताया था कि अवैध सट्टेबाजी का कारोबार उस समय 150 बिलियन यानी करीब ₹10 लाख करोड़ का था। वहीं जस्टिस लोढ़ा कमेटी ने बताया था कि भारत की सट्टा बाजार करीब उस समय के $82 बिलियन यानि करीब ₹6 लाख करोड़ का है। वहीं फेडरेशन ऑफ चेम्बर ऑफ कामर्स और इंडस्ट्री (FICCI) ने 2019 में अपनी एक रिपोर्ट में कुल सट्टा बाजार करीब $41 बिलियन यानि लगभग ₹3 लाख करोड़ का बताया था।
आखिर कैसे होती है ऑनलाइन सट्टेबाजी?
दरअसल ऑनलाइन ऐप के जरिए मैचों पर करोड़ों-अरबों रुपये लगाये जाते हैं। आजकल आईपीएल के मद्देनजर ज्यादातर ऐप में सबसे बड़ा प्राइस मनी ₹2 करोड़ दिखाया जा रहा है। यानी अगर आपका पहला रैंक आता है तो ऐप आपको दो करोड़ देने का दावा करता है। इसके लिए लोगों को केवल ₹49 लगाकर टीम बनाने को कहा जाता है। ₹49 रुपये के इस कॉन्टेस्ट में तकरीबन डेढ़ करोड़ लोग सट्टा खेल सकते हैं। इस हिसाब से एक मैच के एक कॉन्टेस्ट से ऐप लगभग 74-75 करोड़ रुपये कमाता है। जिस पर ऐप दावा करता है कि इस कॉन्टेस्ट में 66 प्रतिशत लोगों को रैंक के हिसाब से पैसा (अलग-अलग प्राइस मनी) मिलेगा यानी लगभग 56 करोड़ रुपये का प्राइज बांट दिया जाएगा। वहीं विनिंग प्राइस पर सरकार को भी टैक्स जाएगा।
एक मैच में 30 से ज्यादा कॉन्टेस्ट?
यहां गौर करने वाली बात ये है कि किसी भी मैच में सिर्फ दो करोड़ रुपये का ही प्राइस मनी नहीं होता है। उसके बाद 1 करोड़, 25 लाख, 15 लाख, 10 लाख ऐसे करते-करते 10 से 5 हजार रुपये तक के कॉन्टेस्ट एक ही ऐप में होते हैं। जितना ज्यादा प्राइस मनी का कॉन्टेस्ट होगा, उतने ही ज्यादा लोग भाग (सट्टा) ले सकते हैं। वहीं कुछ ऐसे भी कॉन्टेस्ट हैं, जिसमें सिर्फ दो लोग ही खेलते हैं। तकरीबन एक मैच में 30 से ज्यादा कॉन्टेस्ट होते हैं। वैसे इन सभी ऐप द्वारा 'सिगरेट की डिबिया' की तरह डिस्क्लेमर में सावधान जरूर किया जाता है। धीरे से कह दिया जाता है कि इस खेल में आदत लगना या आर्थिक जोखिम संभव है, जिम्मेदारी से खेलें।
ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर देश का कानून?
वैसे तो भारत में सट्टा पूरी तरह से गैरकानूनी है। लेकिन, ऑनलाइन सट्टे को लेकर देश के कानून में कई तरह के विरोधाभास नजर आते हैं। जिनका फायदा उठाकर ये ऑनलाइन गेमिंग और फेंटेसी ऐप चल रहे हैं। पब्लिक गैंबलिंग एक्ट 1867 के मुताबिक सट्टेबाजी एक अपराध माना गया है। वैसे कुल मिलाकर कहें तो ऑनलाइन सट्टेबाजी को लेकर कोई भी स्पष्ट कानून नहीं है।
कुछ राज्यों में इस पर बैन की मांग?
इस ऑनलाइन सट्टेबाजी से राजस्व घाटे और लोगों के आत्महत्या करने को लेकर कुछ राज्य सरकारों ने इन ऑनलाइन गेमिंग ऐप को लेकर सख्ती दिखाई है। साथ ही इसे बैन करने का फैसला किया है। जैसा कि हाल ही में तमिलनाडु ने ऐसे तमाम ऑनलाइन गेम पर बैन लगाने का फैसला किया है। साथ ही एक कानून भी पास किया गया है। जिसके तहत 3 साल की जेल और 10 लाख जुर्माने का प्रावधान है। इसके अलावा तेलंगाना, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, सिक्किम, नागालैंड, असम, मेघालय और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी ऑनलाइन सट्टेबाजी और गेमिंग को लेकर कड़े नियम बनाये गये हैं।
क्या कदम उठाने जा रही है केंद्र सरकार?
केंद्र सरकार की तरफ से साल 2022 में संसद में ऑनलाइन गेमिंग रेगुलेशन बिल पेश किया गया था, जिसमें ऑनलाइन गेम को रेगुलेट करने की बात कही गई थी। इसी के तहत केंद्र सरकार ने ऑनलाइन गेमिंग को लेकर पिछले सप्ताह एक एडवाइजरी जारी की थी। जिसमें सेल्फ रेगुलेटरी ऑर्गेनाइजेशन (SRO) की तरफ से हर ऑनलाइन गेम की जांच की जाएगी। जांच के बाद जो भी ऑनलाइन गेम नियमों का पालन करेगा, उसी को जारी रखा जाएगा।
क्या है वो एडवाइजरी?
जुआ या सट्टेबाजी से जुड़े ऑनलाइन गेम वाले ऐप पर सरकार द्वारा एक्शन लिया जा सकता है। सिर्फ ऐसे ऑनलाइन गेम को ही मंजूरी दी जाएगी, जिनमें किसी भी तरह का रिस्क या बाजी लगाने को नहीं कहा जाएगा। जुआ या सट्टेबाजी भारत में अवैध है, इसीलिए इनसे जुड़े विज्ञापन भी गैरकानूनी माने जाएंगे।
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