India's Chess Factory: ऐसा विद्यालय जहां से प्रज्ञानंद जैसे 15 ग्रैंडमास्टर निकले, फीस सिर्फ दो हजार
क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा विद्यालय भी है जो मात्र दो हजार रुपए की फीस में छोटे छोटे बच्चों को भी शतरंज का विश्व चैंपियन बनने लायक बना देता है?
हर साल लाखों रुपए की फीस वसूलने वाली स्कूलों से बालक के सर्वांगीण विकास की अपेक्षा बेमानी है। लेकिन चेन्नई के वेलाम्मल विद्यालय की बात ही कुछ और है। यहां के प्रतिभाशाली विद्यार्थी साधारण विजेता नहीं बल्कि विश्व विजेता बनकर ही बाहर निकलते हैं और सबसे बड़ी बात यह है कि यहां पर छात्रों की फीस सिर्फ 2000 रुपए ही है।

चेन्नई स्थित वेलाम्मल विद्यालय को इंडिया की चेस फैक्ट्री के नाम से भी जाना जाता है। यहां पर विद्यार्थियों को शतरंज (चेस) का प्रशिक्षण दिया जाता है। यहां से अब तक 15 चेस ग्रैंडमास्टर निकल चुके हैं। हाल ही में शतरंज वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर जीतने वाले रमेशबाबू प्रज्ञानंद ने भी इसी विद्यालय से प्रशिक्षण लिया।
प्रतिभा की खोज और निखारना ही स्कूल का उद्देश्य
वेलाम्मल स्कूल के अध्यक्ष एमवी मुथुरामलिंगम का कहना है कि सभी विद्यार्थी पढ़ाई में अच्छे हो यह जरूरी नहीं है। मगर हरेक विधार्थी में कुछ अन्य क्षमताएं होती है, जो उसे दूसरों से अलग बनाती है। ऐसे में हम सबका कर्तव्य है कि उस प्रतिभा को खोजें और उसे निखारने में अपना योगदान दें। वे बताते हैं कि चेस में ट्रेनिंग के लिए यहां हर साल एक हजार छात्र दाखिला लेते हैं। स्कूल ने पांच साल लगातार वर्ल्ड चेस स्कूल चैम्पियनशिप में जीत दर्ज कर एक अलग रिकॉर्ड कायम किया है।
प्रज्ञानंद के अलावा 15 ग्रैंडमास्टर निकले, फीस सिर्फ दो हजार
शतरंज वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सिल्वर जीतने के बाद से ग्रैंडमास्टर रमेशबाबू प्रज्ञानंद लगातार सुर्खियों में हैं। प्रज्ञानंद ने 12 साल की उम्र में ग्रैंडमास्टर का टाइटल हासिल कर लिया था, जबकि विश्वनाथन आनंद ने यह उपलब्धि 18 साल की उम्र में हासिल की।
भारत में अभी तक चेस में 83 ग्रैंडमास्टर बने हैं, उनमें से 29 तमिलनाडु से निकले हैं। इसका बड़ा श्रेय चेन्नई के वेलाम्मल संस्थान को ही जाता है। प्रज्ञानंद के अलावा कुछ अन्य ग्रैंडमास्टर जैसे अधिवान, सेथुरमन, श्याम सुंदर, के. प्रियदर्शन, कार्तिक वीएपी, कार्तिकेयन मुरली, अरविंद चिदंबरम, और डी गुकेश जैसे ग्रैंडमास्टर इसी स्कूल से निकले हैं। वेलाम्मल विद्यालय में हर साल एक हजार लोग चेस सीखने आते हैं। यहां छात्रों को दो हजार रुपए की फीस में ट्रेनिंग दी जाती है।
तीन साल की उम्र में शतरंज, 12 साल में नंबर वन बने प्रज्ञानंद
रमेशबाबू प्रज्ञानंद तमिलनाडु के रहने वाले हैं। उनका जन्म 5 अगस्त, 2005 में हुआ। उन्होंने अपनी बहन वैशाली से प्रेरित होकर महज तीन साल की उम्र में शतरंज खेलना शुरू कर दिया था। सफलता हासिल करने के लिए समर्पित प्रज्ञानंद ने अभ्यास करना कभी नहीं छोड़ा।
इसी का नतीजा रहा कि उन्होंने सात साल की उम्र में वर्ल्ड यूथ चेस चैंपियनशिप जीती। फिर नौ साल की उम्र में अंडर-10 टाइटल अपने नाम किया। वे ग्रैंडमास्टर बनने वाले दुनिया के पांचवें सबसे युवा शतरंज खिलाड़ी हैं। प्रज्ञानंद 2016 में यंगेस्ट इंटरनेशनल मास्टर बने। 2018 में प्रतिष्ठित ग्रैंडमास्टर खिताब हासिल किया, तब उनकी उम्र महज 12 साल 10 महीने और 13 दिन थी।
सबसे दिलचस्प यह है कि प्रज्ञानंद जब केवल 16 साल के थे, तभी उन्होंने दुनिया के नंबर वन चेस खिलाड़ी मैगनस कार्लसन को 39 चाल में परास्त कर दिया था। उनसे पहले यह कमाल केवल विश्वनाथन आनंद और पी हरिकृष्णा ही कर पाए थे।












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