Laptop Manufacturing: लैपटॉप और कंप्यूटर निर्माण में आत्मनिर्भरता की ओर भारत
प्रमुख लैपटॉप और पीसी कंपनी एचपी ने भारत में क्रोमबुक के निर्माण के लिए गूगल के साथ हाथ मिलाया है, और दोनों कंपनियां क्रोमबुक को 2 अक्टूबर, 2023 से मिलकर बनाएगी। एचपी और गूगल के बीच सहयोग से भारत में डिजिटल शिक्षा की स्थिति में सुधार होने की उम्मीद है।
इस साझेदारी से भारत में अधिक नौकरियाँ पैदा होने और देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। सरकार द्वारा 1 नवंबर से मुक्त आयात पर रोक लगाने की घोषणा के बाद भारत में काम कर रही कंपनिया अपने मार्केट को बचाने में लगी हुई हैं।

क्या है पूरी खबर?
भारत 1 नवंबर, 2023 से लैपटॉप, टैबलेट, पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) और सर्वर के मुक्त आयात पर प्रतिबंध लगा देगा। आयातकों को अब इन सभी चीजों को देश में लाने के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। भारत सरकार तकनीकी क्षेत्र में "मेक इन इंडिया" को प्रोत्साहित करने की कोशिश कर रही है, और यह कदम "मेक इन इंडिया" अभियान का हिस्सा है, जो अधिक नौकरियां पैदा करने के लिए स्थानीय विनिर्माण को बढ़ावा देता है।
कीमतें कैसे होगी प्रभावित?
मनी कंट्रोल और सीएनबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में लैपटॉप और पीसी पर नए आयात नियमों से थोड़े समय के लिए इन चीजों की कीमतों में वृद्धि होने के आसार है। हालांकि, कुछ समय बाद में इन प्रॉडक्ट्स की कीमतों में कमी आने की भी संभावना है।
एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि भारत सरकार के इस फैसले से भारतीय मार्केट में आयात पर निर्भर रहने वाली कंपनियों, जैसे एप्पल, लेनोवो, सैमसंग, डेल, आदि के प्रोडक्ट्स की कुछ समय के लिए शॉर्टेज हो जाएगी। एप्पल, लेनोवो, एचपी, आसुस, एसर और सैमसंग जैसी प्रमुख तकनीकी कंपनियां, जो बड़े पैमाने पर चीन में बने लैपटॉप, पीसी को आयात करती है, सरकार के इस अचानक कदम से सीधे प्रभावित होती हैं।
नए आयात नियम
नए आयत नियम में आयात के लिए केवल उन्हीं को लाइसेंस लेने की जरुरत नहीं होगी तो एक कंप्यूटर या लैपटॉप बाहर के स्टोर या किसी ई कॉमर्स साइट से खरीद कर कुरिअर के जरिए मंगाएंगे। आयात शुल्क फिर भी देना होगा। इसके अलावा सरकार द्वारा अनुसंधान एवं विकास, बेंचमार्किंग, या उत्पाद विकास के लिए प्रति खेप 20 वस्तुओं तक भी नियमों में छूट दी जाएगी। क्योंकि ये सामान पूंजीगत सामान (कैपिटल गुड्स) का एक अनिवार्य हिस्सा हैं।
भारत को कैसे होगा फायदा?
लैपटॉप, टैबलेट, पर्सनल कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रतिबंधात्मक आयात का उद्देश्य घरेलू उत्पादन और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना है। आइए जानते हैं भारत सरकार द्वारा लैपटॉप, पीसी, आदि पर इस प्रतिबंध से भारत को क्या फायदे होंगे:
घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित करना: आयात को प्रतिबंधित करके, भारत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहित कर रहा है। इससे अधिक नौकरियाँ पैदा हो सकती हैं और देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल सकता है।
आयात पर निर्भरता कम करना: भारत लैपटॉप और कंप्यूटर सहित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के आयात पर बहुत अधिक निर्भर है। घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देकर, देश आयात पर अपनी निर्भरता कम कर सकता है और अधिक आत्मनिर्भर बन सकता है।
हार्डवेयर सप्लाई चेन को मजबूत करना: विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधों से भारत को अपनी हार्डवेयर सप्लाई चेन को मजबूत करने और चीनी आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
भारत को विनिर्माण के लिए एक पसंदीदा देश बनाना: भारत सरकार का लक्ष्य स्थानीय उत्पादन का विस्तार करना और देश को एप्पल जैसे वैश्विक तकनीकी ब्रांडों के लिए अपने प्रोडक्ट्स बनाने के लिए एक पसंदीदा देश बनाना है।
भारत का कुल इलेक्ट्रॉनिक आयात कितना?
स्टेटिस्टा की रिपोर्ट के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2022 में भारत ने लगभग ₹5.5 ट्रिलियन भारतीय रुपए मूल्य के इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का आयात किया, जिसमें कंप्यूटर हार्डवेयर भी शामिल है। हालांकि, यह आंकड़ा वर्ष 2012 में ₹1.6 ट्रिलियन भारतीय रुपए का था।
एबीपी न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स आयात वित्त वर्ष 2022 में $30.3 बिलियन डॉलर से घटकर वित्त वर्ष 2023 में $27.6 बिलियन डॉलर हो गया है। वोल्जा की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अपना अधिकांश इलेक्ट्रॉनिक सामान चीन, मलेशिया और वियतनाम से आयात करता है। 2022-23 के दौरान चीन से भारत का कुल आयात लगभग $91 बिलियन डॉलर (लगभग ₹7,48,161 करोड़) तक पहुंच गया, जो कि 2021-22 में $94.6 बिलियन डॉलर (लगभग ₹7,77,758 करोड़) था।












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