World Milk Day: पशुपालन और डेयरी बजट में 77.62 प्रतिशत की वृद्धि, दुग्ध उत्पादन में भारत अव्वल
विश्व दुग्ध दिवस एक महत्वपूर्ण अवसर है जो हमें दूध के महत्व को समझने और समाज को इसके लाभों के बारे में जागरूक करने का मौका देता है।

दूध एक ऐसा पदार्थ है, जिसका सेवन बड़ों से लेकर बच्चों तक सभी करते हैं। मानव समाज में दूध को दैनिक भोजन में महत्त्वपूर्ण स्थान दिया गया है। साल 2001 में संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (फूड एंड एग्रीकल्चर ऑर्गनाइजेशन) ने दूध को ग्लोबल फूड के रूप में स्थापित करने और डेयरी सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए विश्व दुग्ध दिवस मनाने की शुरुआत की।
हर साल इस दिन को इसलिए भी मनाया जाता है ताकि दुनियाभर में दूध और उससे बने उत्पादों के फायदों का प्रचार किया जा सके। वर्ल्ड मिल्क डे इसलिए भी जरूरी है क्योंकि इससे लोगों को दूध और इसके व्यापार से जुड़ी विभिन्न जानकारियों को हासिल करने का मौका मिल सके। भारत की बात करें तो हमारे देश में 26 नवंबर को राष्ट्रीय दुग्ध दिवस मनाया जाता है। यह दिवस पहली बार साल 2014 को मनाया गया था। दरअसल, यह दिन डॉ. वर्गीज कुरियन के सम्मान में मनाया जाता है। जिन्होंने श्वेत क्रांति की सहायता से भारत को दुग्ध उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाया था।
इस वर्ष की थीम
इस वर्ष की थीम का विषय इस बात पर प्रकाश डालना होगा कि कैसे डेयरी ने पौष्टिक खाद्य पदार्थ और आजीविका प्रदान करते हुए पर्यावरण पर इसके प्रभाव को कम किया है। इस थीम के माध्यम से, विश्व दुग्ध दिवस 2023 दूध के प्रति जागरूकता बढ़ाने, स्वास्थ्य और पोषण में दूध के महत्व को प्रमोट करने, और दूध उत्पादन के संबंध में जागरूकता फैलाने का प्रयास करेगा।
दुग्ध उत्पादन में भारत अव्वल
पिछले कुछ सालों में भारत में लगातार दूध-डेयरी से जुड़े क्षेत्र का तेजी से विस्तार हुआ है। ऐसे में भारत दूध उत्पादन के मामले में दुनिया में नंबर वन बन गया है। साल 2021-22 के दौरान देश में कुल दूध उत्पादन 22 करोड़ टन रहा। यदि शीर्ष पांच प्रमुख उत्पादक राज्यों की बात करें तो इस वर्ष राजस्थान (15.05%), उत्तर प्रदेश (14.93%), मध्य प्रदेश (8.06%), गुजरात (7.56%) और आंध्र प्रदेश (6.97%) रहे हैं।
भारत के दुग्ध उत्पादन में 2014-15 और 2021-22 के दौरान 51 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। फरवरी 2014 के बाद से देशभर में 'राष्ट्रीय डेयरी विकास कार्यक्रम (NPDD)' नाम से केंद्रीय योजना को क्रियान्वयन किया गया है। जुलाई 2021 में योजना को संशोधित किया गया था। इसके लिए सरकार ने ₹1790 करोड़ के बजट का प्रावधान किया है।
सरकार की योजनाएं
देश में दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए 'राष्ट्रीय पशुधन मिशन, फीड और चारा विकास पर उप-मिशन' की शुरुआत की गई है। इसके साथ ही राष्ट्रीय गोकुल मिशन चलाया जा रहा है। इसमें किसानों के लिए दुग्ध व्यवसाय को ज्यादा लाभकारी बनाने के उद्देश्य से गोवंशियों के अनुवांशिकीय उन्नयन और स्वदेशी नस्लों का विकास एवं संरक्षण किया का सके। इसके साथ ही अम्ब्रेला योजना, राष्ट्रीय पशुधन विकास योजना भी चलाई जा रही हैं। इसके लिए सरकार ने ₹2400 करोड़ के बजट का प्रावधान किया हुआ है। इसके साथ ही एनिमल हसबेंडरी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (Animal Husbandry Infrastructure Development Fund) की शुरुआत की गई है। इसके तहत, कुल 213 परियोजनाएं स्थापित की गई हैं। इसमें लगभग 24,000 लोगों को प्रत्यक्ष और एक लाख किसानों को अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार दिया जाएगा।
जनवरी 2023 तक 20.77 करोड़ पशुओं का FMD (The foot-and-mouth disease) के खिलाफ टीकाकरण किया जा चुका हैं। वहीं ब्रुसेला के खिलाफ टीकाकरण भी शुरू हो गया है और अबतक 1.62 करोड़ पशुओं का टीकाकरण किया जा चुका है। इससे 10.12 करोड़ किसानों को फायदा मिला है। पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय के बजट की बात करें तो 2013-14 की तुलना में 2014-15 से 2023-24 के बीच केंद्रीय पशुपालन और डेयरी विभाग के लिए बजट आवंटन में 77.62 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
दूध या उससे बने उत्पादों के फायदे
दूध स्वास्थ्य और विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है। इसमें निहित कैल्शियम, प्रोटीन, पोटेशियम, फास्फोरस, विटामिन D, विटामिन B-12, विटामिन ए और राइबो फ्लेविन (B-2) आदि होते हैं। ये सभी तत्व हमारे शरीर के लिए आवश्यक होते हैं। जैसे पोटेशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है। कैल्शियम हड्डियों एवं दांतों को मजबूत बनाता है। विटामिन D भी हड्डियों को दुरुस्त रखने में मदद करता है। जबकि विटामिन B-12 लाल रक्त कणिकाओं (RBC) और नर्वस टिश्यू को कंट्रोल करता है।












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