India Russia Relations: भारत और रूस के आर्थिक एवं कूटनीतिक संबंधों पर दुनिया की नजर क्यों?
भारत और रुस पुराने मित्र देश हैं और दोनों देशों के संबंध हमेशा से ही सहज रहे है चाहे परिस्थितियां कैसी भी रही हों।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल आजकल रूस की यात्रा पर है। उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मॉस्को में अकेले में लगभग एक घंटे तक चर्चा की। इस बैठक में दोनों ने द्विपक्षीय मुद्दों के साथ-साथ रणनीतिक रिश्तों को और भी मजबूत बनाने पर सहमति जतायी। कारोबारी रिश्तों को भी गति देने सहित एक-दूसरे की मुद्रा में द्विपक्षीय कारोबार को लेकर भी आपसी चर्चा की गयी है।
गौरतलब है कि इसी साल मार्च में भारत और रूस के विदेश मंत्रियों के बीच एक मुलाकात प्रस्तावित है। इस बीच रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव जी20 देशों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए भारत आ रहे हैं। इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी नवंबर 2022 में मास्को की यात्रा की थी।
2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद नरेंद्र मोदी ने रूस की यात्रा की थी और राष्ट्रपति पुतिन ने भी भारत का दौरा किया। दोनो देशों के संबंधों की मजबूती का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि कोरोना काल में राष्ट्रपति पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी ने छह बार फोन पर भी बात की थी। जबकि तीन मौकों पर दोनों ने वर्चुअल माध्यम से बैठकों में हिस्सा लिया।
राष्ट्रपति पुतिन की भारत यात्राएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में राष्ट्रपति पुतिन 10-11 दिसंबर 2014 को पहली बार भारत आये थे। इसके बाद वे 15 से 16 अक्टूबर 2016 को आठवें ब्रिक्स अधिवेशन सम्मेलन में भाग लेने के लिए गोवा पहुंचे। इसके अलावा, राष्ट्रपति पुतिन 4-5 अक्टूबर 2018 और 6 दिसंबर 2021 को भी भारत के दौरों पर रहें।
प्रधानमंत्री मोदी की रूस यात्राएं
साल 2015 सातवें ब्रिक्स सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए प्रधानमंत्री मोदी रूस के उफा शहर पहुंचे। वे वहां 8 से 10 जुलाई तक रहे। फिर 23-24 दिसंबर को प्रधानमंत्री मॉस्को की यात्रा पर थे। साल 2017 में 18वें वार्षिक भारत-रूस सम्मेलन के आयोजन के मौके पर भी प्रधानमंत्री मोदी रूस की यात्रा पर थे। यहां उन्होंने सेंट पीट्सबर्ग अंतरराष्ट्रीय आर्थिक मंच के कार्यक्रम में भी हिस्सा लिया। साल 2018 में प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के सोची शहर की यात्रा की। इसके बाद, 4 सितंबर 2019 को रूस के व्लाडिवॉस्टोक शहर में आयोजित ईस्टर्न इकोनॉमिक फोरम की पांचवीं सालाना बैठक में भी प्रधानमंत्री मौजूद थे। इसी बैठक में प्रधानमंत्री ने एक्ट फार ईस्ट पॉलिसी (Act Far East policy) की घोषणा की। इस फोरम की शुरुआत भी साल 2015 में प्रधानमंत्री मोदी के कार्यकाल के दौरान हुई थी।
एक्ट फार ईस्ट पॉलिसी क्या है?
प्रधानमंत्री मोदी ने रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र में विकास कार्यों को गति देने के लिए एक्ट फार ईस्ट पॉलिसी की शुरुआत की थी। दरअसल, रूस में साईबेरिया का पूर्वी भूभाग सुदूर पूर्व (फार ईस्टर्न फेडरल डिस्ट्रिट) कहलाता है। यह इंसानी जीवन के अनुकूल स्थान नही है। जरुरत से ज्यादा ठंडा इलाका होने के कारण यहां जीवन यापन की जरुरी सुविधाओं की कमी है। हालांकि, यह भूभाग प्राकृतिक संसाधन जैसे खनिज और तेल सहित गैस के मामले में बहुत सम्पन्न है। भारत का मानना है कि यहां निवेश करके अपने संसाधनों में वृद्धि की जा सकती है। भारत की इस भूभाग में उपस्थिति दोनों देशों के सामरिक तथा आर्थिक हितों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
दोनो देशों का रक्षा सहयोग बहुआयामी
आजादी के बाद, भारत के रक्षा सौदों में रूस में निर्मित हथियारों का सबसे ज्यादा प्रतिशत रहा है। अभी भी भारत अपनी रक्षा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से ही आयात करता है। हालांकि, अब दोनों देश कई हथियारों को विकसित करने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं जैसे ब्रह्मोस मिसाइल का निर्माण दोनों देशों ने साथ मिल कर ही किया है। रूस की एनपीओ मशीनोस्ट्रोयेनिया (NPO Mashinostroeyenia) तथा भारत के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने संयुक्त रूप से इसका विकास किया है। दिसंबर 2022 में भारतीय वायु सेना ने सुखोई-30 एमकेआई विमान से युद्धपोत के निर्धारित लक्ष्य पर ब्रह्मोस हवाई प्रक्षेपण मिसाइल के विस्तारित रेंज संस्करण का सफलतापूर्वक परीक्षण भी कर लिया है।
अब दोनों एके 203 असॉल्ट राइफल्स (Kalashnikov AK-203) के उत्पादन में भी समन्वय कर रहे हैं। गौरतलब है कि भारत अब रुसी हथियारों का अपने यहां ही उत्पादन कर रहा है। राइफल्स की दुनिया में सबसे घातक हथियार मानी जाने वाली कलाशनिकोव राइफल्स का उत्पादन उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले में स्थित कोर्वा ऑर्डेनेंस फैक्टरी में शुरू गया है। यहां भारतीय सेना के लिए कुल 6.01 लाख असॉल्ट राइफल्स का उत्पादन होगा।
यही नहीं, पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों सहित लाइसेंस आधारित एयरक्राफ्ट और टैंक विकसित करने की दिशा में भारत और रूस आपसी समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। वहीं, एस 400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम की सप्लाई भी शुरू हो गयी है। वहीं, दोनों देश नियमित रूप से सैन्य अभ्यास इंद्र (EXERCISE INDRA) का भी आयोजन कर रहे हैं।
आर्थिक संबंध नयी उंचाइयों की तरफ
भारत के रूस स्थित दूतावास की वेबसाइट के अनुसार भारत और रूस ने साल 2025 तक 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर के आपसी व्यापार और 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश का लक्ष्य रखा है। कृषि के संदर्भ में भी दोनों देशों ने आपसी व्यापार को 7.6 गुना बढ़ाया है। वर्ष 2022 में रूस से तेल आयात में भारी वृद्धि हुई है। भारत के पक्ष को देखें तो रूस में भारत का निर्यात काफी हद तक स्थिर हो गया है जबकि आयात तेजी से बढ़ा है।
विज्ञान सहित अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग
रूस स्ट्रेटेजिक विजन समझौते के तहत तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु रीऐक्टर की छह इकाइयों पर काम कर रह रहा है। प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन के बीच लगभग हर बैठक में इस दिशा में जरुर चर्चा की गयी है। यही नहीं, पेट्रोकेमिकल के संदर्भ में पारादीप क्रैकर प्लांट में रूस निवेश कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ भारत आर्कटिक के आईएनजी - 2 प्रोजेक्ट में निवेश कर रहा है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और रूसी स्पेस एजेन्सी, फेडरल स्पेस एजेंसी ऑफ रूस (रॉसकॉसमॉस) मिलकर महत्वाकांक्षी परियोजना गगनयान पर काम कर रहे है। दोनों पक्ष बाह्य अंतरिक्ष अनुसंधान द्वारा उसके शांतिपूर्ण उपयोग में भी सहयोग कर रहे है जिसमें उपग्रह प्रक्षेपण, ग्लोनास नैविगेशन प्रणाली और रिमोट सेंसिंग शामिल हैं।
भारत और रूस ने हाइड्रोकार्बन को लेकर अगले पांच साल का रोड्मैप तैयार किया है। व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) से लेकर चेन्नई तक समुद्री कॉरिडोर को भी संचालित करने की दिशा में तेजी से काम शुरू कर दिया गया है। दोनो देशों ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में सहयोग के लिए एक संयुक्त कमिशन की स्थापना की है।
यूक्रेन के संकट पर भारत का रूख
भारत ने यूक्रेन पर रूसी हमले के संदर्भ में अपना पक्ष संतुलित ही रखा है। भारत में रूसी राजदूत डेनिश अलापोव इसके लिए भारत की तारीफ भी कर चुके हैं। भारत का कहना है कि तनाव को कम किया जाना चाहिए और मसले का समाधान कूटनीतिक बातचीत के जरिये ही किया जा सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस हेतु कई बार रूस और यूक्रेन के राष्ट्रपति से बात भी की है। भारत का यह स्पष्ट मानना है कि इस संदर्भ में वह कोई भी फैसला अपने राष्ट्रहित के अनुसार ही लेगा।












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