India and Qatar: नौसैनिकों की रिहाई में सिर्फ कूटनीतिक नहीं ऐतिहासिक संबंधों का भी असर
कतर की जेल में अगस्त, 2022 से बंद 8 पूर्व भारतीय नौसैनिकों को अब रिहा कर दिया गया है। ये वही पूर्व सैनिक हैं जिन्हें कतर की एक अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। लेकिन, भारत के कूटनीतिक दखल के बाद कतर ने सजा को माफ कर दिया। आठ में से सात पूर्व नौसैनिक भारत पहुंच भी चुके हैं। इस मामले में भारत सरकार की कूटनीति की खूब तारीफें हो रही हैं।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने इस मामले में जानकारी दी है कि भारत सरकार उन आठ भारतीय नागरिकों की रिहाई का स्वागत करती है जो दाहरा ग्लोबल कंपनी के लिए काम कर रहे थे और जो कतर में हिरासत में थे। इस रिहाई में भारत की डिप्लोमैटिक कोशिश तो काम आई ही, साथ में कतर के साथ हमारे ऐतिहासिक संबंध की भूमिका भी कम नहीं रही।

अभी हाल ही में 6 फरवरी, 2024 को भारत और कतर के बीच एक अहम समझौता हुआ। इसके तहत अगले 20 साल यानी भारत कतर से वर्ष 2048 तक लिक्विफाइड नैचुरल गैस (एलएनजी) खरीदेगा। भारत की सबसे बड़ी एलएनजी आयात करने वाली कंपनी पेट्रोनेट एलएनजी लिमिटेड (पीएलएल) ने कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी के साथ ये समझौता किया है। यह कुल 78 अरब डॉलर की डील है।
कतर-भारत के बीच कैसे हैं संबंध?
कतर और भारत के रिश्ते काफी अच्छे हैं। जर्मन वेबसाइट डीडब्ल्यू की रिपोर्ट की माने तो भारत के लिए कतर एक महत्वपूर्ण व्यापारिक केंद्र रहा है। भारत अपनी 40 फीसदी तरल प्राकृतिक गैस या एलएनजी कतर से ही हासिल करता है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कतर से आयात का लगभग आधा हिस्सा इसी का है। इसके अलावा कतर की कुल 25 लाख की आबादी में लगभग 7 लाख भारतीय हैं। ये भारतीय कतर में काम करते हुए अपने देश को भारी मात्रा में विदेशी मुद्रा भेजते हैं। यह पैसा भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाने में अहम योगदान देता है।
टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय समुदाय के लोग यहां पर मेडिकल, इंजीनियरिंग, एजुकेशन, वित्त, बैंकिंग, बिजनेस और मीडिया के साथ-साथ ब्लू-कॉलर सहित कई तरह के प्रोफेशन और व्यवसायों में लगे हुए हैं। साथ ही कतर में जन्में दूसरी या तीसरी पीढ़ी के भारतीयों की भी एक बड़ी आबादी है। ये भारतीय न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मबजूत करने की दिशा में काम कर रहे हैं, बल्कि वित्तीय और आर्थिक योगदान के साथ-साथ दोनों देशों की संस्कृति को भी मजबूत कर रहे हैं।
1973 में बने भारत-कतर के संबंध
ओटोमन शासन के बाद कतर 1916 में एक ब्रिटिश सरकार के संरक्षण में आ गया । परंतु 1971 में कतर ने स्वतंत्रता प्राप्त कर ली। इसके बाद 1972 में खलीफा बिन हमद का शासन प्रारंभ हुआ। उसके तुरंत बाद भारत और कतर के बीच राजनयिक संबंध 1973 में स्थापित हो गए।
कतर के पूर्व अमीर (वर्तमान अमीर के पिता) महामहिम शेख हमाद बिन खलीफा अल थाने अप्रैल 1999 में पहली बार भारत की यात्रा पर आए थे। इसके बाद अप्रैल 2005 और अप्रैल 2012 में भी उन्होंने भारत की यात्रा की, जबकि अमीर तमीम बिन हमद अल-थानी ने मार्च, 2015 में भारत का दौरा किया था। इसी तरह भारत की तरफ से पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नवंबर, 2008 में कतर की यात्रा की थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जून 2016 में कतर का दौरा किया था। जिसके बाद दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होते गए।
भारत का दोहा में दूतावास है, जबकि कतर का नई दिल्ली और मुंबई में। मार्च 2015 में कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल-थानी जब भारत की यात्रा पर थे तब दोनों देशों के बीच कई क्षेत्रों में सहयोग से जुड़े पांच समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए थे। इसके अलावा भारत और कतर ने कैदियों की अदला-बदली का समझौता भी किया था।
इसी तरह जब दिसंबर, 2023 में दुबई में आयोजित किए गए सीओपी 28 जलवायु शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी से मिले थे। तब भारत और कतर की कंपनियों के बीच एलएनजी की सप्लाई के लिए अभी तक की सबसे बड़ी संधि पर हस्ताक्षर किए गए।
भारत-कतर का व्यापार
बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार भारत अपने इस्तेमाल की आधे से अधिक एलएनजी केवल कतर से ही आयात करता है। भारत के आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के अनुसार भारत ने 2022-23 में 19.85 मिलियन टन एलएनजी आयात की थी, जिसमें से तकरीबन 54 प्रतिशत 10.74 मिलियन टन कतर से आई थी। जबकि इसी वित्त वर्ष में कतर से भारत ने कुल 16.81 अरब डॉलर का आयात किया था। जिसमें एलएनजी का आयात ही 8.32 अरब डॉलर था, जो कि कुल आयात का 49.5 प्रतिशत था।












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