Road Accidents: भारत में बढ़ते सड़क हादसे, दुर्घटनाओं में कमी हेतु क्या हैं सरकारी प्रयास?
बीतें दिनों बेंगलुरू-पुणे हाईवे पर पुणे के नवले ब्रिज पर एक बड़ा सड़क हादसा घटित हो गया। इस हादसे का कारण ऑयल टैंकर का ब्रेक फेल होना बताया जा रहा है। इस अनियंत्रित ट्रक के चलते सड़क पर 48 गाड़ियाँ भी आपस में टकरा गयी। इनमें से 22 कारें सहित एक ऑटोरिक्शा भी शामिल था। हालाँकि, हादसे में कोई जनहानि की खबर प्राप्त नहीं हुई है।

भारत में सड़क हादसों की बढ़ती संख्या
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के 2021 के रिकॉर्ड के अनुसार भारत में कुल 4,03,116 सड़क दुर्घटनाएं हुईं जिनमें कुल 1,55,622 लोगों की मौत हो गयी। जबकि 2017 में यह संख्या 1,50,093 थी। देश में औसतन प्रति घंटे लगभग 18 लोग सड़क दुर्घटनाओं में मारे जाते हैं।
राज्यों की दृष्टि से देखें तो सबसे ज्यादा सड़क हादसे तमिलनाडु में हुए जिनकी संख्या 57,090 है और सबसे कम सड़क दुर्घटनाएं नागालैंड में मात्र 34 दर्ज की गयी। हालाँकि, सड़क हादसों में मरने वालों की संख्या उत्तर प्रदेश में सर्वाधिक है। पिछले साल यह संख्या 36,509 थी।
साल 2021 में एक्सप्रेसवे पर सड़क दुर्घटनाओं के कुल 1,899 मामले सामने आए जिसमे 1,216 लोग घायल हुए और 1,356 लोगो की मृत्यु हो गई। सबसे ज्यादा मौतें नेशनल हाईवे पर हुई जो कि कुल मौतों का 34.5 प्रतिशत है (1,55,622 में से 53,615 मौतें)। फिर 25.1 प्रतिशत के साथ स्टेट हाईवे पर हुई मौतें (1,55,622 में से 39,040)। अन्य 62,967 लोगो की मृत्यु शहरों की सड़कों पर दुर्घटनाओं के दौरान हुईं।
सड़क हादसों में सर्वाधिक मौतें युवाओं की
सड़क हादसों के दौरान होने वाली मौतें विश्व स्तर पर एक बड़ा चिंता का कारण हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 2022 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 5-29 वर्ष की आयु के बच्चों और युवा वयस्कों के लिए सड़क यातायात की चोटें मौत का प्रमुख कारण हैं और सड़क दुर्घटनाओं के कारण हर साल लगभग 1.3 मिलियन लोगों की मौत होती है। वही, भारत में सबसे ज्यादा जिस आयु वर्ष की सड़क दुर्घटना में मृत्यु होती हैं वह 15 से 49 वर्ष का समूह है।
विश्व में सड़क हादसों के आंकड़े क्या कहते है?
सड़क दुर्घटना के मामले में सबसे पहले स्थान पर अमेरिका है, जहाँ सालाना लगभग 22,00,000 हादसें दर्ज किये जाते है। फिर जापान का नंबर है जहाँ लगभग 5,00,000 दुर्घटनाएं होती है। तीसरे स्थान पर भारत है। गौरतलब है कि भले ही अमेरिका में सबसे ज्यादा सड़क हादसे होते हैं लेकिन हादसों में सबसे ज्यादा मृत्यु भारत में ही होती हैं। वर्ष 2021 में जापान में लगभग 5,00,000 सड़क हादसे हुए है जिसमे सिर्फ 4,500 लोगों की मृत्यु हुई थी।
केंद्र सरकार सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए क्या कर रही?
सड़क परिवहन मंत्रालय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, प्रिंट मीडिया, गैर सरकारी संगठनों (NGO) आदि के माध्यम से गाड़ी चालकों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए सड़क सुरक्षा पर प्रचार उपायों और जागरूकता अभियान चलाने के लिए एक योजना लागू की है।
चालकों में जागरूकता फैलाने और सड़क सुरक्षा को मजबूत करने के लिए हर साल राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह/सप्ताह मनाया जाता है। इंडियन एकेडमी ऑफ हाईवे इंजीनियर्स (IAHI) में सड़क सुरक्षा परीक्षकों के लिए एक प्रमाणन पाठ्यक्रम भी शुरू किया है। राष्ट्रीय राजमार्गों पर ब्लैक स्पॉट्स (दुर्घटना संभावित स्थलों) की पहचान की गई है और उन पर सुधार को उच्च प्राथमिकता दी गई है।
सड़क परिवहन मंत्रालय ने 30 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में वर्ष 2015-2018 के दुर्घटना और मौत के आंकड़ों के आधार पर राष्ट्रीय राजमार्गों पर 5803 ब्लैक स्पॉट की पहचान की है। 5803 ब्लैक स्पॉट में से 5366 ब्लैक स्पॉट पर अस्थाई उपाय किए गए हैं और 3215 ब्लैक स्पॉट को स्थायी रूप से सुधारा गया है।
एयरबैग, एंटी-ब्रेकिंग सिस्टम (ABS), टायर, क्रैश टेस्ट, संपूर्ण वाहन सुरक्षा उत्पादन (WVSCoP) आदि के संबंध में गाड़ियों के लिए सुरक्षा मानकों में सुधार किया गया है। सड़क परिवहन मंत्रालय ने सभी परिवाहनों पर स्पीड लिमिटिंग डिवाइस लगाने की अधिसूचना जारी की है।
हाल ही में पारित मोटर व्हीकल एक्ट (संशोधन) 2019 प्रौद्योगिकी के उपयोग के माध्यम से सख्त प्रावधान किए गए हैं और इसके अलावा अनुपालन सुनिश्चित करने और यातायात नियमों के उल्लंघन के लिए रोकथाम बढ़ाने के लिए सख्त दंड के प्रावधान किए गए हैं। सरकार ने नेशनल हाईवे के टोल टैक्स पर एंबुलेंस का प्रावधान किया है।












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