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Income Tax Rebate: जानें आयकर विभाग की विभिन्न धाराओं में कर छूट कितनी

सरकार द्वारा लिए जाने वाले अप्रत्यक्ष कर से नहीं बचा जा सकता है। जबकि प्रत्यक्ष कर को कुछ योजनाओं के तहत कम जरूर किया जा सकता है।

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Income Tax Rebate: वित्तीय वर्ष 2023-24 से आयकर व्यवस्था (टैक्स स्लैब) में परिवर्तन किया गया था। अब भारत में दो आयकर व्यवस्था चल रही हैं - एक पुरानी आयकर व्यवस्था और दूसरी नयी आयकर व्यवस्था। आयकर व्यवस्था वह होती है, जिसके तहत सरकार लोगों की एक निश्चित आय पर टैक्स (कर) लेती है। इस कर को सरकार दो प्रकार से लेती हैं - प्रत्यक्ष कर (डायरेक्ट टैक्स) और अप्रत्यक्ष कर (इनडायरेक्ट टैक्स) के रूप में। इस कर संग्रह से ही सरकारी योजनाओं को क्रियान्वित रूप दिया जाता है। टैक्स देश की समृद्धि में एक अहम भूमिका निभाता है।

सरकार द्वारा लिए गये करों में से अप्रत्यक्ष कर (सेवा कर, बिक्री कर आदि) से बचने का कोई तरीका नहीं होता, जबकि प्रत्यक्ष कर को कुछ तरीकों द्वारा कम किया जा सकता है। यह एक महत्वपूर्ण जानकारी आपको पता होनी चाहिए। इसलिए हम आपको वहीं तरीके बताने जा रहे है, जिनके द्वारा आयकर को कम किया जा सकता है।

सार्वजनिक भविष्य निधि (पब्लिक प्रोविडेंट फंड - पीपीएफ)

टैक्स बचाने के सभी विकल्पों में यह सबसे अच्छा विकल्प है। जिसमें आयकर विभाग की धारा 80C के अंतर्गत हर साल अधिकतम ₹1.5 लाख का निवेश किया जा सकता है। इस निवेश पर अच्छा ब्याज भी मिलता है और यह पूर्णतय टैक्स फ्री होता है। इस खाते को कोई भी व्यक्ति सरकारी बैंक अथवा डाक विभाग में खोल सकता है। इसका नकारात्मक पक्ष यह है कि इस खाते में निवेश की गई पूंजी 15 साल तक जमा (लॉक इन) रहती है।

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (नेशनल पेंशन सिस्टम - एनपीएस)

वृद्धावस्था की सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए यह एक सरकारी सेवानिवृत्त जमा योजना है, जिस पर आयकर की धारा 80CCD (1B) के तहत कर राहत भी मिलती है। इस योजना में एक वित्त वर्ष में दो लाख रुपये का योगदान टैक्स फ्री होता है। ₹1.50 लाख की छूट इनकम टैक्स की धारा 80-सी के तहत मिल सकती है। इसके अलावा भी एनपीएस के टियर-1 खाते में योगदान देने पर ₹50,000 की अतिरिक्त छूट 80-CCD (1B) के तहत दी जाती है।

सुकन्या समृद्धि योजना (एसएसवाई)

भारत सरकार द्वारा 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओं' के तहत बालिकाओं के लाभ हेतु 'सुकन्या समृद्धि योजना' चलाई गई है। जिसके तहत आप किसी भी बैंक या पोस्ट ऑफिस में इस योजना में खाता खुलवा सकते हो। इस योजना में हर साल (14 साल तक) न्यूनतम ₹250 और अधिकतम ₹1.50 लाख जमा करा सकते हैं। आयकर अधिनियम 1961 की धारा 80C के तहत इस योजना में अधिकतम ₹1.5 लाख तक आयकर छूट मिलती है।

वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (सीनियर सिटिजंस सेविंग्स स्कीम-एससीएसएस)

यह योजना 60 या 60 वर्ष से ऊपर के वृद्धों के लिए है। इस योजना के तहत आप सालाना कम से कम ₹1000 और अधिकतम ₹15 लाख जमा करा सकते हैं। इस योजना में निवेश पर आयकर की धारा 80-C के तहत अधिकतम ₹1.5 लाख प्रतिवर्ष की आयकर छूट प्राप्त कर सकते है।

इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ईएलएसएस)

यह कर बचाने के लिए एक लोकप्रिय म्यूचुअल फंड योजना है। इस योजना के तहत आयकर धारा 80-C के अंतर्गत अधिकतम ₹1.5 लाख तक की आयकर छूट प्राप्त कर सकते है।

सावधि जमा यानि एफडी (फिक्स्ड डिपोजिट)

कम-से-कम 5 साल की सावधि जमा यानि एफडी पर आयकर धारा 80-C के अंतर्गत ₹1.5 लाख तक की छूट प्राप्त कर सकते है। हालांकि एफडी पर मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस लगता है, जिसके लिए फॉर्म 15-G दाखिल कर सकते है।

ये बात तो कुछ उन योजनाओं की हुई, जिनमें निवेश कर हम आयकर को कम कर सकते है। उपरोक्त योजनओं के अलावा भी और बहुत सारी योजनाओं (होम लोन, लाईफ व हेल्थ इंश्योरेंस आदि) के तहत हम कर में छूट प्राप्त कर सकते है। आइए जानते हैं कि हम आयकर की किन धाराओं से कितनी छूट प्राप्त कर सकते हैं।

1. धारा 80-C - आयकर विभाग की इस धारा के अंतगर्त कर लाभ निवेशों व वित्तीय उत्पादों में योगदानों पर कटौतियों का दावा पेश कर सकते हैं। इस धारा के अंतर्गत अधिकतम ₹1.5 लाख की कटौती का लाभ प्राप्त कर सकते है।

2. धारा 80-CCD - आयकर की इस धारा में दो उपधाराएं होती है। एक, धारा 80 सीसीडी (1) - इसमें कर लाभ निवेश शामिल होते है। इस धारा के तहत वेतनभोगी व स्वरोजगारी अधिकतम कटौती सैलरी क्रमश: 10 प्रतिशत व कुल सकल आय का 20 प्रतिशत का दावा कर सकते हैं। दो, 80-CCD (1B) - इसमें 80-C के तहत कटौती के अलावा ₹50,000 की अतिरिक्त कटौती का दावा इस धारा के अंतर्गत किया जाता है।

3. धारा 80-D - स्वास्थ्य बीमा के टैक्स बचत हेतु प्रति भुगतान किए गए प्रीमियम के लिए इस धारा के अंतर्गत आप ₹1 लाख तक की कटौती की सुविधा का लाभ ले सकते हैं।

4. धारा 80-DD - इस धारा के तहत आश्रित दिव्यांग पर खर्च पर ₹75 हजार से ₹1.25 लाख तक की कर कटौती प्राप्त कर सकते है।

5. धारा 80-DDB - अपने आश्रितों की गंभीर बीमारी के इलाज पर खर्च को इस धारा के तहत अधिकतम ₹40 हजार की कर कटौती मिलती है। आश्रित वृद्धों के लिए यह सीमा ₹1 लाख है।

6. धारा 80-E - इस धारा से शिक्षा ऋण में टैक्स कटौती की सुविधा मिलती है। इस धारा के तहत सिर्फ शिक्षा ऋण की ईएमआई के कुल ब्याज का ही दावा किया जा सकता है। कटौती के लिए अधिकतम राशि की कोई सीमा नहीं है।

7. धारा 80-EE - धारा 80-EE होम लोन पर ब्याज के लिए किए गए भुगतान पर ₹50,000 तक की टैक्स कटौती की अनुमति देता है। यह छूट धारा 80-C की सीमा के अलावा है, जिसमें विभिन्न आयकर छूट के विकल्प शामिल है।

8. धारा 80-G - धारा 80-G के अंतर्गत गैर-लाभकारी संस्थाओं (नॉन प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन) को दिए गए दान पर कटौती का दावा पेश कर सकते हैं। इसमें 50 प्रतिशत से 100 प्रतिशत तक की कटौती का दावा किया जा सकता है।

9. धारा 80-GG - इसके तहत मकान किराया के लिए कटौती का दावा कर सकते है। लेकिन शर्त यह है कि आपके पास कोई भी घर नहीं होना चाहिए अर्थात आप किसी भी घर के मालिक नहीं होने चाहिए। इसके तहत ₹5000 प्रति माह या वार्षिक सैलरी का 25 प्रतिशत अथवा कुल भुगतान किया गया किराया जो कुल आय का 10 प्रतिशत हो, कटौती का दावा कर सकते है।

10. धारा 80-TTA - धारा 80-TTA आपके जमा पर ब्याज की आय पर कटौती की अनुमति देता है।

आयकर विभाग के नियमानुसार, अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग कटौती का दावा किया जा सकता है। लेकिन एक सेक्शन में अधिकतम जितनी कटौती मिलती है, उतनी ही मिलेगी। फिर चाहे आपने उस सेक्शन की एक से ज्यादा स्कीमों में निवेश क्यों न किया हो।

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