Russia Ukraine War: रूस और यूक्रेन जंग में मोबाइल फोन भी बन गये ‘हथियार’, जानें क्या है पूरा मामला
रूस ने अमेरिकी मोबाइल कंपनी एप्पल के आईफोन के इस्तेमाल पर बैन लगा दिया है। पिछले साल रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होते ही एप्पल ने रूस में अपने प्रोडक्ट की बिक्री पर रोक लगाई थी।

Russia Ukraine War: रूसी प्रशासन ने सरकारी कर्मचारियों के आईफोन इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। सरकार ने एक अप्रैल से पहले आईफोन की जगह एंड्रॉइड या अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम वाले फोन इस्तेमाल करने के लिए कहा है। रूसी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन सरकार को आशंका है कि आईफोन के इस्तेमाल से अगले साल होने वाले राष्ट्रपति चुनाव प्रभावित हो सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि पश्चिमी देश आईफोन के जरिए इस चुनाव में अप्रत्यक्ष और खुफिया तरीके से दखल दे सकते हैं।
रूस की न्यूज वेबसाइट Kommarsant ने अवांछित संचार से संबंधित एक रिपोर्ट चलाई है, जिसमें कहा गया है कि मार्च के अंत तक राष्ट्रपति प्रशासन (AP) के अलावा राजनीतिक ब्लॉक के कर्मचारी अपने आईफोन को किसी अन्य स्मार्टफोन से बदल लें। अधिकारी अन्य ब्रांड के स्मार्टफोन किसी अन्य ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ इस्तेमाल कर सकते हैं।
प्रशासन खरीदेगा नये स्मार्टफोन
रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति प्रशासन अपने कर्मचारियों के लिए आईफोन के विकल्प के तौर पर नये स्मार्टफोन खरीदेगा। राष्ट्रपति प्रशासन के डिप्टी चीफ ऑफ स्टॉफ ने सरकार द्वारा आयोजित एक सेमिनार में मार्च की शुरुआत में कहा था कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल ऑफिशियल बिजनेस के लिए नहीं किया जाना चाहिए। अधिकारी का इशारा अमेरिकी कंपनी एप्पल के आईफोन की तरफ था।
अधिकारी ने सेमिनार में प्रशासनिक अधिकारियों से कहा कि अगर आपके लिए आईफोन सबकुछ है तो इसे या तो फेंक दो या फिर बच्चों को दे दो। मार्च के अंत तक सभी को यह करना होगा। राष्ट्रपति प्रशासन में शामिल अधिकारियों को एंड्रॉइड स्मार्टफोन या फिर किसी चीनी ब्रांड के फोन खरीदने की सलाह भी दी गई है।
रूस ने डेवलप किया वैकल्पिक ओएस
रूसी सरकार पहले से ही देश में आईफोन के ऑपरेटिंग सिस्टम iOS और गूगल के एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम के विकल्प के तौर पर डेवलप किए गए ऑपरेटिंग सिस्टम ऑरोरा ओएस को लेकर काफी आशवस्त है। इस ऑपरेटिंग सिस्टम को वहां की टेलीकॉम कंपनी रोसटेलीकॉम ने डेवलप किया है। यूक्रेन के साथ पिछले साल शुरू हुए युद्ध के बाद से रूस ने वीडियो कांफ्रेंसिंग प्लेटफॉर्म जूम को भी ऑफिशियल काम में इस्तेमाल करने से मना किया है।
एप्पल ने अपने प्रोडक्ट की बिक्री पर लगाई थी रोक
पिछले साल मार्च 2022 में रूस और यूक्रेन के बीच शुरू हुए युद्ध के तुरंत बाद अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी एप्पल ने रूस में अपने प्रोडक्ट्स बेचने पर रोक लगा दी थी। कंपनी के सीईओ टिम कुक ने उस समय एक बयान जारी करते हुए कहा था कि हमने इस युद्ध के विरोध में कई कदम उठाए हैं। हमने रूस में अपने सभी प्रोडक्ट्स की सेल पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
फिलहाल रूस ने अमेरिकी कंपनी के पेमेंट प्लेटफॉर्म एप्पल पे को भी सीमित कर दिया है। हालांकि, इस पर पूरी तरह से रोक नहीं लगायी गयी है। मगर रुसी सरकार जल्द ही एप्पल आईफोन के साथ-साथ कंपनी के अन्य प्रोडक्ट्स को रूस में प्रतिबंधित कर सकती है। रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग की वजह से 400 से ज्यादा अमेरिकी फिल्म कंपनियों ने सरकार का साथ देते हुए रूस में किसी भी तरह के बिजनेस से इंकार कर दिया था। इसके अलावा अमेरिकी कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, गेमिंग, सॉफ्टवेयर बिजनेस, और बैंकिंग सेक्टर ने रूस में बिजनेस करने से मना कर दिया है।
इन टेक्नोलॉजी ने बनायी रूस से दूरी
एप्पल के अलावा गूगल ने भी पिछले साल अपने वीडियो प्लेटफॉर्म यूट्यूब और सर्च इंजन के साथ-साथ गूगल ऐड्स पर प्रतिबंध लगा दिया था। वहीं, एक और अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने भी रूस में अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज पर रोक लगाई है। माइक्रोसॉफ्ट ने स्टेटमेंट जारी करते हुए कहा कि हम यूक्रेन में अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं और उन्हें हर संभव मदद देने को तैयार हैं। साथ ही, उन्हें यूक्रेन से बाहर निकालने में पूरी मदद करेंगे।
अमेरिकी टेक कंपनियों के अलावा दक्षिण कोरियाई कंपनी सैमसंग ने भी रूस में अपने प्रोडक्ट शिपमेंट पर रोक लगा दी है। सैमसंग ने भी यूक्रेन में मौजूद अपने कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर स्टेटमेंट जारी किया था। दुनिया के सबसे बड़े ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म में से एक अमेजन ने भी रूस-यूक्रेन यु्द्ध की वजह से अपनी सर्विसेज पर बैन लगा दिया था।
अमेरिका ने टिक-टॉक पर लगाया बैन
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हालांकि, किसी भी देश द्वारा राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किसी भी टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट पर बैन लगाने की यह पहली घटना नहीं है। पिछले दिनों अमेरिकी खुफिया एजेंसी एफबीआई की रिपोर्ट के बाद चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और शॉर्ट वीडियो प्लेटफॉर्म टिक-टॉक पर बैन लगा दिया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने सभी सरकारी अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन से टिक-टॉक अनइंस्टॉल करने के लिए कहा है। अमेरिका के बाद कनाडा और ब्रिटेन ने भी सरकारी कर्मचारियों को चीनी ऐप इस्तेमाल करने पर रोक लगाई है।
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