Pearl-Harbor Attack: जापान की जिस गलती ने अमेरिका को दिलाया 'गुस्सा', परमाणु हमले से लिया बदला
आज ही के दिन, 7 दिसंबर 1941 को अमेरिका के पर्ल हार्बर पर जापान ने सरप्राइज अटैक किया था। इस हमले के बाद अमेरिका सीधे तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया।

Pearl-Harbor Attack: अगस्त 1945 में अमेरिका ने जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमले से भयंकर तबाही मचाई थी। 6 और 9 अगस्त 1945 को हुए इन परमाणु हमलों की वजह से जापान के इन दोनों शहरों में लाखों लोगों की जानें गई थी। जापान के लोग अब तक इन हमलों का दंश झेल रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि अमेरिका ने ये परमाणु हमले क्यों किए थे? आइए, इतिहास में थोड़ा पीछे चलते हैं।
जैसा कि हम जानते हैं कि इतिहास में जितने भी बड़े युद्ध हुए हैं, उसके पीछे कोई न कोई वजह जरूर होती है। हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों के पीछे की वजह अमेरिका के पर्ल-हार्बर पर हुआ अटैक है, जो आज ही के दिन 7 दिसंबर 1941 को किया गया था। जापान द्वारा की गई इस बड़ी गलती की वजह से क्रोधित अमेरिका परमाणु हमला करने पर उतारू हो गया था।
मारे गए 2043 अमेरिकी सैनिक
जापान की इंपीरियल नेवी एयर सर्विस ने 7 दिसंबर 1941 को अमेरिका के होनूलूलू शहर में स्थित पर्ल हार्बर नेवी बेस पर सरप्राइज अटैक कर दिया। जापानी नेवी एयर सर्विस ने सुबह 8 बजे से पहले अटैक किया था। इस हमले में अमेरिका के 2043 सैनिक मारे गए थे। पर्ल हार्बर अटैक से पहले अमेरिका द्वितीय विश्व युद्ध में एक न्यूट्रल देश की तरह था यानी वो किसी को अपना समर्थन नहीं दे रहा था।
दरअसल, जापान ब्रिटेन की ताकत को कम करना चाहता था, इसलिए उसने अमेरिका पर ताबड़तोड़ अटैक किए। जापान द्वारा किए गए इस अटैक की वजह से अमेरिका के 18 नेवल शिप और 328 विमान तबाह हुए थे। यही नहीं, 1178 सैनिक घायल भी हुए थे। इस हमले के बाद अमेरिका भी द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया।
75 मिनट तक ताबड़तोड़ बमबारी
अमेरिकी नौसैनिक ठिकाने पर्ल हार्बर पर 7 दिसंबर 1941 को जापान के लड़ाकू विमानों ने करीब 75 मिनट यानी एक घंटा 15 मिनट तक ताबड़तोड़ बमबारी की। जापानी सैनिकों ने अमेरिकी नेवल बेस पर मौजूद फ्यूल टैंक को निशाना बनाया, ताकि नेवल बेस पर मौजूद लड़ाकू विमानों में ईंधन न भरा जा सके। यही नहीं, जापान ने ब्रिटेन के मित्र देश अमेरिका को गहरी चोट देने के लिए वहां मौजूद 8 जंगी जहाज, 112 बोट्स और 164 लड़ाकू विमान भी नष्ट कर दिए। जापान द्वारा किया गया यह हमला इतना जोरदार था कि अमेरिकी नेवल बेस में मौजूद सैनिक संभल नहीं सके।
पूरी प्लानिंग के साथ किया हमला
जापान ने अमेरिका को चोट पहुंचाने के लिए पूरी प्लानिंग के साथ इस हमले को अंजाम दिया था। 7 दिसंबर 1941 को तड़के जापानी सेना ने कमांडर मिस्तुओ फुचिदा के नेतृत्व में 183 फाइटर जेट्स ने जापान के ओहियो में मौजूद 6 जंगी जहाजों से उड़ान भरी, जिनमें से 171 जेट्स ने पर्ल हार्बर को निशाना बनाया। जापानी सेना ने इस अटैक को दो फेज में अंजाम दिया था। इस हमले में जापानी सेना ने फाइटर जेट्स के साथ-साथ बॉम्बर्स, टारपीडो मिसाइल का भी इस्तेमाल किया था।
जापानी सेना ने इस हमले के लिए जानबूझकर रविवार का दिन चुना। उन्हें पता था कि अमेरिकी लोग रविवार का दिन मौज-मस्ती और आराम करके बिताते हैं। यही नहीं, लोग सुबह देर से भी उठते हैं। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, जिस समय जापानी सेना ने अमेरिका के पर्ल हार्बर पर यह हमला किया था उस समय कई सैनिक अपने बेस में आराम कर रहे थे।
अमेरिका का क्रूर बदला
जापान द्वारा किए गए इस हमले के अगले दिन यानी 8 दिसंबर 1941 को अमेरिका सीधे तौर पर द्वितीय विश्व युद्ध में शामिल हो गया। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट ने 7 दिसंबर 1941 को 'कलंक का दिन' कहा और साढ़े तीन साल बाद अगस्त 1945 में अमेरिकी सेना ने इसका बदला जापान के दो शहरों हिरोशिमा और नागासाकी पर परमाणु हमला करके लिया। अमेरिका द्वारा 6 अगस्त 1945 को हिरोशिमा पर किए गए परमाणु हमले में 1 लाख 29 हजार से ज्यादा लोग मारे गए। वहीं, 9 अगस्त 1945 को नागासाकी पर किए गए परमाणु हमले में 2 लाख 26 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।
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