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Hindi Diwas: दुनिया के देशों में सिर चढ़कर बोल रही हिंदी

Hindi Diwas: हिंदी देश की राष्ट्र भाषा आज तक भले ही नहीं बन पाई है, लेकिन विश्व में सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषाओं में तीसरे नंबर पर शुमार हिंदी की लोकप्रियता दुनिया के देशों में दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। जैसे-जैसे वैश्विक मंचों पर भारत की उपस्थिति मजबूत हो रही है, वैसे-वैसे भारत के अलावा अन्य देशों में हिन्दी की लोकप्रियता भी बढ़ रही है।

इन देशों में होती है हिंदी की पढ़ाई

हिंदी अमेरिका, कनाडा, जापान, दक्षिण अफ्रीका, आस्ट्रेलिया, मॉरीशस, सूरीनाम, नेपाल, त्रिनिदाद और टोबैगो के विश्वविद्यालयों में तो पढ़ाई ही जाती है, अब तो संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में हिन्दी को तीसरी आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई है जो वहां की अदालतों में भी मान्य है। जापान में तो कक्षा 10 के छात्र-छात्राओं के बीच हिंदी और फ्रेंच सीखने का क्रेज बढ़ता जा है।

Hindi Diwas 2023 Hindi is being widely spoken in the countries of the world

अमेरिका के शिकागो विश्वविद्यालय, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले और कोलंबिया विश्वविद्यालय जैसे प्रमुख संस्थानों में हिंदी पाठ्यक्रम हैं। ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और लंदन विश्वविद्यालय सहित कई विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में हिंदी भाषा शामिल है। कनाडा में टोरंटो विश्वविद्यालय और ब्रिटिश कोलंबिया जैसे विश्वविद्यालय हिंदी भाषा के कार्यक्रम पेश करते हैं। ऑस्ट्रेलियाई राष्ट्रीय विश्वविद्यालय और सिडनी विश्वविद्यालय भी हिंदी का पाठ्यक्रम चलाते हैं।

चीन की फीकी पड़ती चमक के बीच हिंदी का उभार

अंतरराष्ट्रीय पटल पर चीन की फीकी पड़ती चमक और भारत के बढ़ते दबदबे का असर है कि हिंदी विश्वमंच पर पसंदीदा विदेशी भाषा के रूप में उभर रही है। दुनिया में ग्लोबल विलेज की बढ़ती अवधारणा ने विदेशी छात्रों के बीच हिंदी सीखने का क्रेज बढ़ा दिया है। जिन दक्षिण भारतीय राज्यों के विरोध के कारण हिंदी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई थी, उन राज्यों में भी अब हिंदी पढ़ाई जा रही है।

केरल में 10वीं तक हिंदी की पढ़ाई हो रही है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 10वीं कक्षा तक के पाठ्यक्रम में हिन्दी एक विषय के रूप में शामिल है। कर्नाटक के बंगलुरु में तो ये लगता ही नहीं कि गैर हिंदी भाषी राज्य में हैं। राजनीतिक नफा-नुकसान को देखते हुए तमिलनाडु में कोई हिंदी का विरोध भले ही करे लेकिन वहां के जनमानस में भी अब विरोध की बात तो कतई नहीं है। हाल में हुए एक सर्वेक्षण के अनुसार वहां के छात्र तमिल और अंग्रेजी के बाद हिंदी ही सीखना चाहते हैं।

फिल्मों ने मिटा दिया उत्तर और दक्षिण का भेद

दक्षिण भारत और उत्तर भारत में अब भाषाई टकराव नहीं रहा। हिंदी फिल्में आप हैदराबाद और बंगलुरु के मल्टीप्लैक्स में भी उसी तरह देख सकते हैं जैसे आप दिल्ली, लखनऊ, भोपाल या पटना में देखते हैं। दक्षिण भारतीय फिल्मों के कई हीरो और हिरोइन हिंदी फिल्मों में काम कर चुके हैं। रजनीकांत, कमल हासन, महेश बाबू, हेमा मालिनी, श्रीदेवी, ऐश्वर्या राय बच्चन, तापसी पन्नू ऐसे अनगिनत नाम हैं जिन्होंने उत्तर और दक्षिण भारत में समान रूप से लोकप्रियता हासिल की है।

संविधान सभा में बहस के बाद स्वीकार हुई हिंदी

देश जब स्वतंत्र हुआ तो भारत के लिए एक आधिकारिक भाषा चुनने का मुद्दा उठा। संविधान सभा में इस विषय को लेकर जोरदार बहस हुई। वर्ष 1949 में 14 सितंबर संविधान सभा ने हिंदी को भारतीय संघ की आधिकारिक भाषा के रूप में अपना लिया। यह भी तय हुआ कि ये भाषा देवनागरी लिपि में लिखी जाएगी। यहां ये उल्लेख करना जरूरी है कि देश अंग्रेजों से आजाद हुआ था इसलिए सरकारी कामकाज की भाषा अंग्रेजी थी। इसी वजह से सहमति बनी कि आजादी के बाद संक्रमणकाल मानते हुए 15 वर्षों के लिए अंग्रेजी भी सरकारी कामकाज की भाषा बनी रहेगी।

इस वजह से मनाया जाता है हिंदी दिवस

भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में हिंदी को अपनाने के उपलक्ष्य में हर साल 14 सितंबर को 'हिन्दी दिवस' मनाया जाता है। इस निर्णय को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 343 में संहिताबद्ध किया गया था। इसी ऐतिहासिक निर्णय का जश्न मनाने और हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1953 से हर साल हिंदी दिवस मनाया जाता है।

हिंदी को आगे बढ़ाने में जुटी सरकार

भारत सरकार हिंदी में कामकाज को प्रोत्साहित करने के प्रयास में जुटी है। सरकार हिंदी को राष्ट्रीय भाषा के रूप में बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय हिंदी निदेशालय और साहित्य अकादमी की स्थापना की है। सरकार की कोशिश है कि अधिकतर पाठ्य सामग्री हिंदी में उपलब्ध हो।

हिंदी दिवस मनाने के लिए सरकारी कार्यालय, शैक्षणिक संस्थान और विभिन्न सांस्कृतिक संगठन कार्यक्रम आयोजित करते हैं। हिंदी दिवस का उद्देश्य लोगों को अपनी भाषाई और सांस्कृतिक विरासत पर गर्व करने के लिए प्रोत्साहित करना है।1965 में, भारत सरकार ने आधिकारिक भाषा अधिनियम लागू किया, जिसमें घोषणा की गई कि हिंदी और अंग्रेजी का उपयोग भारत सरकार के आधिकारिक उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।

हिंदी शब्द की उत्पत्ति

हिंदी शब्द की उत्पत्ति फारसी शब्द 'हिंद' से हुई। जिसका अर्थ होता है सिंधु नदी की भूमि। ऐतिहासिक रूप से तुर्क जिन्होंने 11 वीं सदी शुरुआत में गंगा के मैदानी भागों और पंजाब पर आक्रमण किया था उन्होंने उस क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा का नाम हिंदी दिया था। आंकड़ों की बात करें तो अंग्रेजी और चीन की भाषा मंडारिन के बाद हिंदी ही सर्वाधिक बोली जाती है और हिन्दी लिखने और बोलने वालों की संख्या 60 करोड़ से अधिक है।

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