Haryana Election Results 2019: जानिए हरियाणा में किंगमेकर बने गोपाल कांडा का इतिहास, सरनेम के पीछे भी है दिलचस्प कहानी
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चंडीगढ़। हरियाणा विधानसभा चुनाव में बीजेपी के खाते में 90 में से 40 सीटें आई हैं। यानी पार्टी को सरकार बनाने के लिए महज कुछ ही विधायकों की जरूरत है। ऐसे में हरियाणा की लोकहित पार्टी के नेता गोपाल कांडा एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं। विधायक बने गोपाल कांडा ने कहा है कि वह बीजेपी को समर्थन देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।

हरियाणा की राजनीति की जब भी बात आती है, तब गोपाल कांडा का नाम आ ही जाता है। ये एक ऐसी शख्सियत हैं जो चर्चित और विवादित दोनो हैं। उनके जीवन की कहानी किसी फिल्म से कम नहीं रही है। एक छोटे से दुकानदार से लेकर एयरलाइंस के मालिक बनने तक का कांडा का सफर काफी अनोखा रहा है।
कैसे मिला कांडा सरनेम?
54 साल के गोपाल कांडा का पूरा नाम गोपाल गोयल कांडा है, जो हरियाणा के सिरसा जिले में स्थित बिलासपुर गांव के मूल निवासी हैं। उनके पूर्वज यहीं के एक बाजार में सब्जी की तौल का काम करते थे और यहीं से उन्हें कांडा सरनेम मिल गया। ऐसा इसलिए क्योंकि लोहे के बाट को स्थानीय भाषा में कांडा कहा जाता है। हालांकि उनके पिता मुरलीधर कांडा ये काम नहीं करते थे। वह जिले के एक अच्छे वकील थे।

जब कारोबार के लिए मांगा चंदा
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कांडा ने व्यापार शुरू करने के लिए चंदा तक मांगा था। कहा जाता है कि वह जूते बनाने का कारोबार करते थे, जो विफल हो गया था। जिसके चलते उनपर काफी कर्ज हो गया था। इसके बाद उन्होंने म्यूजिक शॉप खोली, लेकिन वो भी नहीं चली। रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने जूते का शोरूम भी खोला लेकिन पैसे की तंगी के कारण 100-100 रुपये का चंदा एकत्रित किया था।
कहा जाता है कि उन्होंने टीवी रिपेयरिंग और इलेक्ट्रिशियन तक का भी काम किया था। लेकिन उनका जूते का कारोबार काफी आगे बढ़ा, जिसके बाद उन्होंने 1998 में गुड़गांव में प्रॉपर्टी के कारोबार में कदम रख दिया। इस व्यापार में शुरुआत उन्होंने छोटे प्लॉटों की खरीद से की थी, फिर धीरे-धीरे वह राज्य के बड़े रियल एस्टेट खिलाड़ी कहलाए जाने लगे। इसी के बाद वह कई राजनीतिज्ञों के संपर्क में आए थे। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब कांडा के खिलाफ केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को जांच के आदेश दे दिए थे। ऐसा 2007 में हुआ था। रिपोर्ट्स के अनुसार कांडा पर गैंगस्टर से संपर्क होने तक के आरोप लगे थे।

एयरलाइंस में कदम
जब कांडा का रियल एस्टेट का कारोबार देश के कई शहरों तक फैल गया तो उन्होंने गुड़गांव से एमडीएलआर एयरलाइंस की शुरुआत की। इस एयरलाइंस का नाम उन्होंने अपने पिता के नाम मुरलीधर लेखा राम पर रखा था। हालांकि एयरलाइंस का काम साल 2009 में बंद हो गया था।
कैसा रहा है राजनीतिक सफर?
कांडा के राजनीतिक करियर की शुरुआत साल 2009 से होती है। इस साल उन्हें इनेलो से टिकट नहीं मिला था, तो उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। वह 6 हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीत गए थे। इस जीत ने उनकी तकदीर को बदल दिया और वह राजनीति के किंगमेकर बन गए।
इसके बाद से कांडा राजनीति के एक मुख्य चेहरे बन गए। वह हरियाणा के गृह मंत्री बने थे, बाद में वह शहरी निकाय, वाणिज्य और उद्योग मंत्री भी बने। हालांकि साल 2012 में गीतिका शर्मा मामले के सामने आने के बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। गीतिका उनकी एयरलाइंस में ही एयर होस्टेस थीं।
जिन्होंने आत्महत्या कर ली थी। गितिका ने अपने सुसाइड नोट में कहा था कि उन्हें कांडा ने प्रताड़ित किया है, जिससे परेशान होकर वो ये कदम उठा रही हैं। इसके बाद कांडा को गिरफ्तार भी किया गया था लेकिन वह साल 2014 में ही जेल से बाहर भी आ गए। जेल से रिहा होने के बाद उन्होंने लोकहित पार्टी की स्थापना की। उन्होंने साल 2014 में चुनाव भी लड़ा था लेकिन वह हार गए थे।

खुद का महल भी है
आपको ये जानकर हैरानी हो सकती है लेकिन हां कांडा का अपना एक महल भी है। उन्होंने सिरसा में बाबा ताराजी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की थी। इसके पास आंखों का अस्पताल, 13 एकड़ का विशाल परिसर, 108 फुट की भगवान शिव की मूर्ति, 2.5 एकड़ में फैले स्कूल के साथ-साथ उनका खुद का अपना महल भी है। इस ट्रस्ट का बकायदा सालाना कार्यक्रम भी होता है, जिसमें बॉलीवुड के बड़े सितारे और गायकों को चीफ गेस्ट के रूप में बुलाया जाता है।
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