गाजियाबाद सीट पर तीन चुनावों से भाजपा का कब्जा, इस बार रोचक मुकाबला
Ghaziabad Lok Sabha Seat: लोकतंत्र के महापर्व 2024 की शुरुआत हो चुकी है। इसके पहले चरण का मतदान 19 अप्रैल को संपन्न हुआ। जिसमें देश की 102 लोकसभा सीटों पर 1625 उम्मीदवारों की किस्मत ईवीएम मशीन में बंद हो गई।
इस महापर्व का दूसरा पड़ाव 26 मार्च को है। जिसमें 13 राज्यों (केंद्र शासित प्रदेश सहित) की 89 सीटों पर मतदान होगा। जिसमें उत्तर प्रदेश की 8 लोकसभा सीटों (अमरोहा, मेरठ, बागपत, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर, बुलंदशहर, अलीगढ़ व मथुरा) पर भी मतदान होगा। इनमें दिल्ली एनसीआर की गाजियाबाद लोकसभा सीट के राजनीतिक इतिहास के बारे में विस्तार से जानते हैं।

गाजियाबाद लोकसभा सीट
गाजियाबाद लोकसभा सीट का उदय वर्ष 2008 में हुआ। इससे पहले यह क्षेत्र हापुड़ लोकसभा के अंतर्गत आता था। इस लोकसभा में 5 विधानसभाएं (लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद व धौलाना) आती हैं। इसे गेटवे ऑफ यूपी (उत्तर प्रदेश) भी कहा जाता है। इस नई लोकसभा सीट पर पिछले तीन चुनावों से भाजपा का कब्जा है। इस सीट पर लगभग 29 लाख मतदाता हैं, जिसमें से करीब 16 लाख पुरुष व करीब 13 लाख महिला मतदाता हैं।
गाजियाबाद लोकसभा सीट का इतिहास
14 नवंबर 1976 यानी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्मतिथि पर उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी द्वारा मेरठ से अलग करके गाजियाबाद जिला बनाया गया। 1957 से 2004 तक यह क्षेत्र हापुड़ लोकसभा के नाम से जाना जाता था। हापुड़ लोकसभा ने 1957 में कृष्णचंद शर्मा (कांग्रेस), 1962 में कमला चौधरी (कांग्रेस), 1967 में प्रकाशवीर शास्त्री (निर्दलीय), 1971 में बी.पी. मौर्य (कांग्रेस), 1977 में कुंवर महमूद अली (भारतीय लोकदल), 1980 में अनवर अहमद (जनता पार्टी-सेक्युलर), 1984 में के.एन. सिंह (कांग्रेस), 1989 में के.सी. त्यागी (जनता दल), 1991, 1996, 1998 व 1999 में डॉ. रमेश चंद तोमर (भाजपा) तथा 2004 में सुरेंद्र प्रकाश गोयल (कांग्रेस) को सांसद बनाया।
वर्ष 2009 में परिसीमन के उपरांत इस हापुड़ लोकसभा को खत्म कर दिया गया तथा इसका कुछ क्षेत्र मेरठ लोकसभा में और बचे भाग के साथ लोनी विधानसभा क्षेत्र को मिलाकर गाजियाबाद लोकसभा सीट का गठन किया गया।
2009: राजनाथ सिंह ने दर्ज की जीत
16 अप्रैल 2009 को नई लोकसभा सीट पर पहला आम चुनाव हुआ। जिसमें लगभग 8.3 लाख (45.3 प्रतिशत) मतदाताओं ने भाग लिया तथा 16 उम्मीदवार इसमें अपनी किस्मत आजमाने मैदान में उतरे। जिसमें करीब 3.59 लाख (43.3 फीसदी) वोट प्राप्त कर भाजपा उम्मीदवार राजनाथ सिंह विजयी हुए। दूसरा स्थान कांग्रेस उम्मीदवार सुरेन्द्र प्रकाश गोयल (32.4 फीसदी) ने प्राप्त किया तथा तीसरे स्थान पर बसपा प्रत्याशी पंडित अमरपाल शर्मा (21.7 फीसदी) रहे। बाकी सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई।
2014: भाजपा को छोड़ सभी की जमानत जब्त
2014 में इस लोकसभा सीट पर मतदाताओं की संख्या बढ़कर करीब 23.57 लाख हो गई, जिसमें से लगभग 13.42 लाख मतदाताओं ने इस आम चुनाव में मतदान किया। वहीं विभिन्न पार्टियों के व निर्दलीय 15 उम्मीदवार इस चुनावी दंगल के मैदान में उतरे।
'अबकी बार मोदी सरकार' के उद्घोष के साथ चुनावी मैदान में उतरी भाजपा के लिए यह लोकसभा चुनाव खास रहा, क्योंकि इस लोकसभा सीट पर भाजपा को छोड़कर सभी उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। भाजपा प्रत्याशी जनरल विजय कुमार सिंह (वी.के. सिंह) ने करीब 7.58 लाख (56.5 फीसदी) वोट प्राप्त करने के साथ-साथ कांग्रेस प्रत्याशी राज बब्बर (अभिनेता) को 5.67 लाख वोटों से हराकर इतिहास रचा। राज बब्बर को 1.91 लाख (14.2 फीसदी), बसपा प्रत्याशी मुकुल को 12.9 फीसदी, सपा प्रत्याशी सुधान कुमार को 8 फीसदी व आम आदमी उम्मीदवार शाजिया इल्मी मलिक को मात्र 6.6 फीसदी वोट प्राप्त हुए।
2019: जनरल वी.के. सिंह ने फिर किया अपने प्रतिद्वंद्वी को चित
इस आम चुनाव में 2004 के आम चुनाव के मुकाबले लगभग दोगुना, करीब 15.24 लाख (59.5 फीसदी), मतदाताओं ने अपने अपने मत का प्रयोग किया। वहीं 12 उम्मीदवार इस लोकसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरे। जिसमें भाजपा प्रत्याशी जनरल वी.के. सिंह लगभग 9.44 लाख (62 फीसदी) वोट प्राप्त कर विजयी हुए। उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी प्रत्याशी सुरेश बंसल को 5.01 वोटों से परास्त कर दिया। सपा प्रत्याशी को 4.43 लाख (29.1 फीसदी) वोट प्राप्त हुए। बाकी सभी 10 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। यहां तक कि कांग्रेस प्रत्याशी डोली शर्मा को मात्र 7.3 फीसदी वोट मिले।
2024: क्या है समीकरण
'अबकी बार 400 पार' नारे के साथ उतरी भाजपा के लिए यह लोकसभा सीट चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि इस बार भाजपा ने जनरल वी.के. सिंह के स्थान पर अतुल गर्ग को चुनावी मैदान में उतारा है। वहीं इंडी एलाईंस (गठबंधन) में यह सीट कांग्रेस को मिली है, जिसने डॉली शर्मा को टिकट दिया है। इसके अलावा बसपा ने नंद किशोर पुंडीर पर दांव खेला है।
गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में राजपूत, ब्राह्मण व मुसलमान मतदाता अधिक हैं। अभी तक यहां से राजपूत उम्मीदवार ही जीतता आया है। अबकी बार भाजपा ने वैश्य समुदाय के अतुल गर्ग पर दांव लगाया है। अगर जातीय समीकरण देखें तो इस सीट पर सबसे ज्यादा करीब 5.5 लाख मुस्लिम मतदाता हैं। इसके अलावा लगभग 4.7 लाख राजपूत तथा लगभग 4.5 लाख ब्राह्मण मतदाता हैं। वहीं लगभग 4.5 लाख अनुसूचित जाति के मतदाता भी इस सीट पर हैं। इसके अलावा लगभग 2.5 लाख बनिया, 1.25 लाख जाट, एक लाख पंजाबी, 75 हजार त्यागी, 70 हजार गुर्जर तथा करीब 5 लाख दूसरे अन्य समुदाय के मतदाता हैं।
अगर गाजियाबाद लोकसभा सीट के तहत आने वाली विधानसभा सीटों की बात करें तो 2022 के विधानसभा चुनाव में सभी पांचों सीटों पर बीजेपी का कब्जा है। लोनी विधानसभा से नंद किशोर गुर्जर, मुरादनगर से अजीत पाल त्यागी, साहिबाबाद से सुनील कुमार शर्मा, गाजियाबाद से अतुल गर्ग तथा धौलाना विधानसभा से धर्मेंद्र सिंह तोमर को जीत मिली है।
अब देखना यह है कि क्या भाजपा का उम्मीदवार बदलने का निर्णय कारगर सिद्ध होता है और वह अपने अजेय रथ को जारी रख पाती है? या फिर भाजपा के इस अभेद किले में कोई सेंध लगती है?












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