भाप से बुलेट तक : भारतीय रेलवे के सफर पर एक नजर

नई दिल्ली। भारत में रेलवे को बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा माना गया है। देश के कोने कोने तक पहुंचने के लिए रेलवे लोगों का एक महत्वपूर्ण साधन रहा है। आज से ही नहीं, बल्कि दशकों पहले से रेलवे भारत के लोगों के जीवन का एक अहम हिस्सा है। आज बात भले ही बुलेट ट्रेनों की हो रही है। लेकिन एक समय ऐसा भी था, जब यहां इंजन भाप से दौड़ा करती थी। बुलेट ट्रेन की स्पीड के बीच काफी लोग इस बात से शायद अंजान होगें कि भारत में पहली ट्रेन वर्ष 1853 में चलायी गई थी। जो की मुंबई स्टेशन से ठाणे तक गई थी।

भारत में बुलेट ट्रेन लाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना है। जिससे संबंधित कई बातें इस रेल बजट में प्रस्तुत की गई।

फिलहाल, देखते हैं भारतीय रेलवे का सफर, भाप से बुलेट तक ।

स्टीम से दौड़ती थी ट्रेन

स्टीम से दौड़ती थी ट्रेन

जी हां। शुरुआती दिनों में ट्रेन भाप से दौड़ा करती थी। भारत में पहली ट्रेन 1853 में चलाई गयी थी।

डीजल से दौड़ी रेल

डीजल से दौड़ी रेल

स्टीम इंजन से आने वाली परेशानियों से निज़ात पाने के लिए डीजल का उपयोग किया जाने लगा। जिससे ट्रेनों की गति पर काफी फर्क देक गया।

बिजली से दौड़ी ट्रेन

बिजली से दौड़ी ट्रेन

बिजली के उपयोग से ट्रेनों की गति में कई गुणा तक सुधार देखा गया। 1925 में पहली इक्लैट्रिक ट्रेन चलाई गयी थी।

1984 में आया मेट्रो

1984 में आया मेट्रो

भारत में वर्ष 1984 में पहला मेट्रो कलकत्ता में चलाया गया था। यह मेट्रो दमदम तक गई थी।

दिल्ली से आगरा

दिल्ली से आगरा

सेमी बुलेट या होी स्पीड ट्रेनों की दौड़ में पहली ट्रेन दिल्ली से आगरा तक चलाई गई। जिसने महज 90 मिनट में यह दूरी तय की।

नरेन्द्र मोदी का सपना

नरेन्द्र मोदी का सपना

भारत में बुलेट ट्रेन लाना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना है। जिसका जिक्र आज के रेल बजट में भी किया गया है।

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