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Farmer Agitation: भारत ही नहीं, इस समय कई देशों के किसान हैं सड़कों पर

भारत में चल रहे किसान आंदोलन की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है। पर हमें यह भी मालूम होना चाहिए कि किसानों के संघर्ष का दायरा भारत तक ही नहीं है, बल्कि कई देशों, खासकर यूरोप के मुल्कों में भी फैल चुका है। दो दिन पहले ही पेरिस में वार्षिक कृषि शो के दौरान राष्ट्रपति मैक्रों की मौजूदगी में किसानों ने सुरक्षा बाधाओं को तोड़ दिया और पुलिस से भिड़ गए।

Farmer Agitation

इस समय लगभग यूरोप में कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। किसान घटती आय और कड़े कृषि नियमों के कारण संकट के दौर से गुजर रहे हैं। यूरोपीय किसानों के बीच व्याप्त असंतोष बेल्जियम, नीदरलैंड, जर्मनी, स्पेन, पोलैंड और रोमानिया में भी फैल रहा है और फिर विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला चल रहा है।

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन किसानों के आगे हुए पस्त

फ़्रांस में विरोध प्रदर्शन करने वाले किसान झंडे से पटे ट्रैक्टर को लेकर मध्य पेरिस में वाउबन प्लाजा की ओर बढ़ रहे थे, जिससे राजधानी के पूर्व में ए4 राजमार्ग और पेरिस रिंग-रोड पर यातायात बाधित हो गया। किसानों का कहना है कि कड़े कृषि नियमों के कारण उनकी कमाई कम होती जा रही है और फिर विदेशों से अनुचित प्रतिस्पर्धा मिलने के कारण उनका संकट बढ़ता जा रहा है।

किसानों का उग्र विरोध देखते हुए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन को 23 फरवरी को पेरिस कृषि मेले से समय से पहले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। फ़्रांस की सरकार ने € 400 मिलियन यूरो से अधिक की सहायता की किसानों को पेशकश भी की है।

फ्रांसीसी किसान यूरोपीय संघ की कृषि नीतियों और नौकरशाही के बढ़ते हस्तक्षेप के भी खिलाफ हैं। किसानों की शिकायत है कि 27 देशों के ब्लॉक की पर्यावरण नीतियों, जिसमें रसायनों के उपयोग पर रोक और सीमित ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन सीमा, के कारण उनका कृषि व्यवसाय चौपट हो गया है। उनके उत्पाद गैर-ईयू आयात की तुलना में अधिक महंगे पड़ रहे हैं। फ्रांस के किसान अपनी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप भी लगा रहे हैं।

बेल्जियम के किसानों ने यूरोपीय संसद के सामने आग लगाई

बेल्जियम के किसान संगठन भी ब्रुसेल्स में 26 फरवरी को रुए डे ला लोई पर विरोध प्रदर्शन करने जा रहे हैं। पुलिस को आशंका है कि यातायात बाधित करने के लिए सैकड़ों किसान अपने ट्रैक्टरों में राजधानी में घुसेंगे। रुए डे ला लोई की सीमा से लगी कई सड़कें, यूरोपीय देशों तक पहुँच के लिए मुख्य मार्ग हैं। पुलिस ने रुए डे ला लोई के आसपास के क्षेत्र में कार की अनुमति नहीं दी है।

बेल्जियम के भी किसान यूरोपीय संघ की हरित नौकरशाही और कड़े नियमों से नाराज हैं और इस महीने की शुरुआत में ब्रुसेल्स में उग्र विरोध प्रदर्शन भी कर चुके हैं। किसानों ने यूरोपीय संसद के सामने आग लगा दी और एक मूर्ति को गिरा दिया। किसानों के भारी विरोध के कारण पुलिस को प्लेस डु लक्ज़मबर्ग सहित यूरोपीय क्वार्टर के केंद्र को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ा, क्योंकि किसानों ने इन सड़कों पर कब्जा कर लिया था।

सोमवार 26 फरवरी को किसान फिर से अपने ट्रैक्टरों के साथ ब्रुसेल्स में आएंगे। बेल्जियम के वाल्लून किसान महासंघ ने यूरोपीय कृषि मंत्रियों की सोमवार 26 फरवरी को होने वाली बैठक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने का अपना इरादा पहले ही जता दिया है।

किसान अन्य बातों के अलावा, यूरोपीय संघ से मुक्त व्यापार समझौतों से हटने, यूरोपीय संघ-मर्कोसुर समझौते पर बातचीत रोकने और कृषि पारिस्थितिकी प्रथाओं का समर्थन करने के लिए एक मजबूत कृषि नीति (सीएपी) की गारंटी की मांग कर रहे हैं। विशेषज्ञ जलवायु और पर्यावरण संबंधी चिंताओं को तत्काल दूर करने की सलाह दे रहे हैं और समाधान के रूप में चक्रीय कृषि और जैविक खेती जैसी प्रथाओं को अपनाने का सुझाव दे रहे हैं।

ग्रीस में सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन

ग्रीस में भी हजारों किसान पिछले सप्ताह एथेंस के केंद्रीय चौराहे पर आकर अब तक के सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन किया और संसद के सामने ट्रैक्टर खड़े कर दिए। 130 ट्रैक्टरों के साथ कम से कम 8,000 किसान सिंटाग्मा स्क्वायर पर विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।

ग्रीस के भी किसान फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, पोलैंड और इटली के किसानों की तरह सड़कों पर उतर आए हैं। ऊर्जा की बढ़ती कीमतों और उत्पादन लागत से जूझ रहे यूनानी किसानों का कहना है कि उन्हें जलवायु परिवर्तन से प्रभावित मौसम से भी नुकसान हुआ है। कभी अप्रत्याशित बाढ़ तो कभी अत्यधिक गर्मी और जंगल की आग ने उनके काम को काफी जोखिम वाला बना दिया है।

इसलिए किसान सरकार पर दबाव बनाने के लिए एथेंस में जमा हुए हैं। वे बिजली बिलों में छूट और कृषि डीजल के लिए सब्सिडी को भी 2024 के अंत तक बढ़वाना चाहते हैं। साथ ही विदेशी प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा और प्राकृतिक आपदाओं से हुए नुकसान के अधिक मुआवजे की भी मांग कर रहे हैं।

जर्मन किसानों ने भी पिछले सोमवार को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू किया। जिससे पूरे देश में ट्रैफिक जाम हो गया। हजारों ट्रैक्टरों और ट्रकों के साथ किसानों ने सड़कों और राजमार्गों को अवरुद्ध कर दिया। किसान डीजल सब्सिडी में कटौती करने के गठबंधन सरकार के फैसले पर भी गुस्सा व्यक्त कर रहे थे।

न केवल हजारों ट्रैक्टरों और ट्रकों के काफिले ने शहरों को काट दिया, बल्कि उन्होंने उत्तरी जर्मन शहर एम्डेन में वोक्सवैगन की सारी सुविधाओं को भी रोक दिया। पोलैंड के किसान यूक्रेन से आ रहे सस्ते अनाज, दूध और अन्य उपज के आयात पर गुस्सा जताने के लिए यातायात को बाधित कर रहे हैं। किसानों के हाथों में जो तख्ती थी, उस पर लिखा था- ईयू नीति पोलिश किसानों को बर्बाद कर रही है।"

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