UPSC Civil Services: सिविल सेवा परीक्षाओं में बढ़ने लगा है महिलाओं का दबदबा, साल-दर-साल बढ़ रही है संख्या
यूपीएससी के नतीजों में महिलाओं का दबदबा कायम होने लगा है। शुरुआत एक महिला से होकर आज 34 प्रतिशत तक पहुंच गयी है। साल 1998 से लेकर 2022 तक यूपीएससी की परीक्षाओं में 13 बार रैंक वन महिलाओं ने हासिल की हैं।

देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक यूपीएससी में सालाना लाखों अभ्यर्थी शामिल होते हैं। इसके रिजल्ट्स का भी लाखों अभ्यर्थियों को बेसब्री से इंतजार रहता है। 23 मई 2023 को यूपीएससी 2022 के परिणाम जारी किये गए थे। इस बार भी फाइनल रिजल्ट में पुरुष कैंडिडेट्स को पछाड़ते हुए महिलाओं ने सिलेक्शन लिस्ट में अपनी टॉप जगह बनाई है।
यूपीएससी 2022 के नतीजों में इशिता किशोर ने पहला स्थान पाया है। गौतम बुद्ध नगर की रहने वाली इशिता का यह तीसरा प्रयास था। दूसरें स्थान पर बिहार की गरिमा लोहिया, तीसरे स्थान पर आईआईटी हैदराबाद से बीटेक कर चुकी उमा हरति एन, और चौथे स्थान पर स्मृति मिश्रा हैं। जबकि छठवें नंबर पर गहना नव्या जेम्स और नौंवे नंबर पर कनिका गोयल हैं। इस बार टॉप 10 में 6 लड़कियां हैं। वहीं टॉप 25 में 14 लड़कियों ने जगह बनाई है।
महिलायें जिन्होंने मारी बाजी
साल 1998 से अभीतक 13 बार महिलाओं ने यूपीएससी के अंतिम नतीजों में पहला स्थान प्राप्त किया है। इसमें इशिता किशोर (2022), श्रुति शर्मा (2021), नंदनी केआर (2016), टीना डाबी (2015), इरा सिंघल (2014), हर्षिता वी. कुमार (2012), डॉ. स्नेहा अग्रवाल (2011), एस. दिव्याधर्सिनी (2010), सुभ्रा सक्सेना (2008), मोना पृथी (2005), रूपा मिश्रा (2003), विजयलक्ष्मी बिदारी (2000), और भावना गर्ग (1998) शामिल हैं।
साल-दर-साल बढ़ती संख्या
साल 2001 में जहां 455 महिलाओं ने मैन्स ने परीक्षा पास की तो वहीं 179 को इंटरव्यू में बैठने का मौका मिला। अंतिम नतीजों में 88 ने सफलता हासिल की। वहीं साल 2010 में 1418 महिलाओं ने मैन्स की परीक्षा पास की और 449 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। इसमें से 203 को अंतिम नतीजों में सफलता मिली। यानी दस साल में यह संख्या 88 से 203 तक पहुंच गयी थी। जबकि साल 2022 के अंतिम नतीजों में सर्वाधिक 320 महिलाओं ने यूपीएससी के नतीजों में परचम लहराया है।
पहली बार 34 प्रतिशत महिलाओं का चयन
यूपीएससी के इतिहास में पहली बार एक-तिहाई सीटों पर महिलाओं का चयन हुआ है। कुल चयनित अभ्यर्थियों में 613 पुरुष और 320 महिलायें हैं। इसबार 34 प्रतिशत महिलाओं का चयन हुआ है। वहीं 2021 में कुल 685 में 177 महिलाओं, 2020 में कुल 833 में 238 महिलाओं, 2019 में कुल 922 में 220 महिलाओं और 2018 में कुल 812 में 193 महिलाओं ने फाइनल परीक्षा में सफलता हासिल की थी। इस प्रकार बीतें पांच सालों के नतीजों में कुल 1148 महिलाओं ने बाजी मारी हैं।
महिलाओं की सफलता दर
यूपीएससी के मुताबिक साल 2020 में यूपीएससी (मैन्स) के नतीजों में कुल 10343 अभियार्थी शामिल हुए थे। जिसमें 1333 महिलायें और 9010 पुरुष थे। गौरतलब है कि इस परीक्षा को पास करने वालों में महिलाओं की संख्या कम होने के बावजूद भी उनका प्रतिशत अधिक है। दरअसल, कुल 1333 महिलाओं में 238 महिलाओं ने बाजी मारी जोकि 17.9 प्रतिशत है। जबकि कुल 9010 पुरुषों में से मात्र 595 ने सफलता हासिल की। इनका प्रतिशत 6.6 है।
पहली महिला आईएएस/आइपीएस अधिकारी
स्वतंत्र भारत की पहली महिला आईएएस अधिकारी अन्ना राजम मल्होत्रा थी। उन्होंने 1951 में भारतीय सिविल सेवा की परीक्षा पास की थी। देश की पहली महिला अफसर बनीं और साल 1989 में उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इसी तरह 1972 में किरण बेदी भारत की पहली आईपीएस अधिकारी बनीं। 35 वर्षों तक सेवा में रहने के बाद साल 2007 में उन्होने स्वैच्छिक सेवानिवृति की थी। राजनीति में भी किस्मत अजमाने वाली किरण बेदी को रेमन मेग्सैसे पुरस्कार से नवाजा जा चुका है।












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