98 बरस पहले बैसाखी के दिन हुआ था जलियांवाला बाग कांड जानिए क्‍या थी वजह?

13 अप्रैल 1919 को बैसाखी के दिन ही अमृतसर के जलियांवाला बाग में अंग्रेजों ने गोलियों से भून दिया था हजारों लोगों को।

अमृतसर। आज 13 अप्रैल है और जब-जब यह तारीख आती है, देश को मिला एक पुराना जख्‍म हरा हो जाता है। 13 अप्रैल 1919 को ही पंजाब के अमृतसर स्थित जलियांवाला बाग में जब जनरल डायर ने कई मासूम लोगों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया था तो हजारों लोगों की मौत हो गई थी। इसी कांड के बाद देश को उधम सिंह जैसा क्रांतिकारी मिला और जब उन्‍होंने इसका बदला तो आजादी की लड़ाई को नया रंग मिला। इस कांड की वजह से ही उस समय आजादी के संघर्ष में शामिल भगत सिंह जैसे तमाम युवाओं में देश के लिए नया जुनून पैदा हुआ था। आइए आज आपको इसी हिला देने वाले कांड से जुड़ी 10 खास बातों के बारे में बताते हैं।

बैसाखी पर बरसीं गोलियां

बैसाखी पर बरसीं गोलियां

13 अप्रैल 1919 को कुछ प्रदर्शनकारी जिनमें कुछ तीर्थयात्री भी शामिल थे, वह जालियांवाला बाग में इकट्ठा हुए थे। तभी उस समय की ब्रिटिश आर्मी जिसे ब्रिटिश इंडियन आर्मी कहा जाता था और जिसे कर्नल रेगिनैल्‍ड डायर लीड कर रहे थे, उसने लोगों पर गोलियां बरसानी शुरू कर दी थी।

अमृतसर में लगाया गया था मार्शल लॉ

अमृतसर में लगाया गया था मार्शल लॉ

इस बाग में बाहर से आए नागरिक इकट्ठा हुए थे और वह हर वर्ष होने वाले बैसाखी जश्‍न के लिए पहुंचे थे। वह इस बात से अनजान से थे कि अमृतसर समेत पंजाब में मार्शल लॉ लगाया जा चुका है। फायरिंग के आदेश के बाद उन्‍होंने बाहर निकलने की कोशिशें भी कीं लेकिन रास्‍ता संकरा होने की वजह से वह जान बचा पाने में असफल रहे थे।

10 मिनट तक बरसीं थीं गोलियां

10 मिनट तक बरसीं थीं गोलियां

जनरल डायर के आदेश पर उनके सैनिकों ने भीड़ पर करीब 10 मिनट तक बिना रुके गोलियां बरसाई थीं। इन गोलियों का निशाना वे सभी खुले दरवाजे थे जिनके जरिए लोग बचकर बाहर जाने की कोशिशें कर रहे थे।

1,650 राउंड फायरिंग

1,650 राउंड फायरिंग

जब सेना के पास गोलियां खत्‍म हो गईं और आपूति भी खत्‍म हो गई तब जाकर सीजफायर घोषित किया गया। इस घटना में करीब 1,650 राउंड फायरिंग हुई थी।

मौतों का अलग-अलग आंकड़ा

मौतों का अलग-अलग आंकड़ा

ब्रिटिश सरकार ने जो आंकड़ें जारी किए उसके मुताबिक 379 लोगों की मौत हुई थी और 1200 लोग घायल थे। जबकि बाकी सूत्रों का कहना था कि करीब 1000 से ज्‍यादा लोगों की मौत इस त्रासदी में हुई थी।

क्‍या थी वजह

क्‍या थी वजह

प्रथम विश्‍व युद्ध बाद फरवरी 1915 में ब्रिटिश इंटेलीजेंस को ब्रिटिश शासन के खिलाफ घादर आंदोलन की सूचना मिली। इससे आंदोलन से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। भारत में भी कई छोटे-छोटे हिस्‍सों में विद्रोह शुरू हो रहा था। ब्रिटिश सरकार को उस समय इस आंदोलन को दबाने के लिए डिफेंस इंडिया एक्‍ट पास किया जिसके जरिए नागरिकों की ताकतों को सीमित कर दिया गया था।

डायर सबसे बड़े समर्थक

डायर सबसे बड़े समर्थक

इस एक्‍ट के समर्थन में जनरल माइकल ओ डायर सबसे पहले आगे आए थे जो उस समय पंजाब के गर्वनर भी थे। इसके बाद 1919 में रोव्‍लॉट एक्‍ट पास हुआ और इसने पूरे देश में अस्थिरता पैदा कर दी थी।

जान बचाने को कुंए में कूदे लोग

जान बचाने को कुंए में कूदे लोग

जो विरोध प्रदशर्न जलियांवाला बाग में जारी था उसमें हिंदु, सिख और मुसलमान तीनों ही धर्मों के लोग शामिल थे। जब जनरल डायल के आदेश पर गोलियां बरसाई जा रही थी उस समय कई लोग अपनी जान बचाने के लिए बाग में स्थित कुंए में कूद पड़े। इस कुंए को आज शहीदी कुएं के नाम से जानते हैं और यह आज भी बाग में मौजूद है।

शुरू हुआ असहयोग आंदोलन

शुरू हुआ असहयोग आंदोलन

जलियांवाला बाग हत्‍याकांड के बाद महात्‍मा गांधी की अगुवाई में वर्ष 1920 में असहयोग आंदोलन की शुरुआत हुई थी।

उधम सिंह ने मारा जनरल डायर को

उधम सिंह ने मारा जनरल डायर को

13 मार्च 1940 को लंदन के कैक्‍सटन हॉल में उधम सिंह ने हत्‍याकांड के समय पंजाब प्रांत के गर्वनर जनरल डायर को गोली मार दी थी। जनरल डायर ने कर्नल डायर को फायरिंग के आदेश दिए थे। कर्नल डायर की मौत 1927 में हो गई थी।

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