एक किसान ने डिजायन किया तिरंगा, अब लहराएगा यूनिवर्सिटीज
नई दिल्ली। पिछले दिनों सरकार की ओर से एक आदेश जारी किया गया है। इस आदेश के मुताबिक देश की हर सेंट्रल यूनिवर्सिटी को एक तय ऊंचाई पर तिरंगा फहराना जरूरी होगा।
हालांकि इस आदेश को लेकर पूरे देश में विवाद भी शुरू हो गया है। कुछ लोग जहां सरकार के रवैये का स्वागत कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग इस फैसले को तानाशाही भरा रवैया भी बता रहे हैं।
तिरंगा जो कि देश की आन, बान और शान का प्रतीक रहा है, अपने आप में देश का इतिहास समेटे हुए है। इसके साथ कई वर्षों का वह इतिहास जुड़ा है जिससे आज की पीढ़ी वाकिफ ही नहीं है।
हो सकता है कि कल आप जब अपनी यूनिवर्सिटी पहुंचे तो आपको छत पर तिरंगा शान से लहराता हुए मिले। आइए आपको तिरंगे से जुड़े इतिहास के बारे में बताते हैं।

22 जुलाई 1947 को मिला अस्तित्व
देश के तिरंगे को 22 जुलाई 1947 को हुई संविधान सभा में देश के राष्ट्रपति झंडे के तौर पर मान्यता दी गई और इसके साथ ही यह देश की आधिकारिक पहचान बन गया।

कौन था डिजायनर
तिरंगे को पिंगाली वेंकया ने डिजायन किया था कि एक किसान और स्वतंत्रता सेनानी थे।

खादी का बना होना चाहिए
नियम के मुताबिक तिरंगा खादी के कपड़े का बना होना चाहिए।

तिरंगे को मैन्यूफैक्चर करने का अधिकार
राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को मैन्यूफैक्चर करने का अधिकार खादी डेवलपमेंट एवं ग्रामीण औद्योगिक आयोग के पास है। यह आयोग झंडे को क्षेत्रीय समूहों को अधिकृत करता है।

तिरंगे का मतलब
तिरंगे में मौजूद तीन रंगों केसरिया, सफेद और हरे रंग की वजह से इसे तिरंगा कहा गया।

तीन रंगों अहमियत
तिरंगे में मौजूद केसरिया रंग साहस और बलिदान का प्रतीक है, सफेद रंग सच्चाई, शांति और शुद्धता तो हरा रंग समृद्धि के दर्शाता है।

क्या है अशोक चक्र के मायने
तिरंगे में मौजूद अशोक चक्र धर्म के अधिकारों का प्रतीक है।

क्या कहता है फ्लैग कोड
फ्लैग कोड के तहत तिरंगा हमेशा 3:2 के अनुपात में रहना चाहिए। इसकी लंबाई 1.5 गुनी होनी चाहिए और इसकी चौड़ाई तीनों रंगों की पट्टियों के हिसाब से होनी चाहिए।

अशोक चक्र का साइज
फ्लैग कोड में अशोक चक्र का साइज नहीं दिया गया है लेकिन इसमें 24 तिलियों का होना अनिवार्य है। अशोक चक्र नेवी ब्लू कलर में तिरंगे पर नजर आता है।

क्यों चुना गया अशोक चक्र
अशोक चक्र सम्राट अशोक की महानता को दर्शाता है। देश के पहले राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के मुताबिक इसका चयन इसलिए किया गया था क्योंकि नियम और धर्मों का प्रतीक था।












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