Dinesh Gope: आतंकी फंडिंग से लेकर नक्सली समर्थन, जानें क्या आरोप हैं दिनेश गोप पर?
दिनेश गोप उर्फ कुलदीप यादव उर्फ बड़कू पर आतंकी फंडिंग, रंगदारी, अवैध वसूली और निर्दोष लोगों की हत्या करने जैसे गंभीर आरोप हैं।

Dinesh Gope: हाल ही में एनआईए (NIA) और झारखंड पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में प्रतिबंधित नक्सली संगठन पीपुल्स लिबरेशन फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएलएफआई) के प्रमुख दिनेश गोप उर्फ कुलदीप यादव को नेपाल से गिरफ्तार किया गया है। दिनेश गोप पर झारखंड पुलिस ने ₹25 लाख का इनाम रखा था। जबकि एनआईए ने भी उस पर पांच लाख रुपये का इनाम रखा हुआ था। दिनेश गोप को नेपाल से पहले दिल्ली और फिर रांची ले जाया गया। इसके बाद, उसे एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया गया। अदालत ने दिनेश गोप को आठ दिनों के लिए एनआईए की रिमांड पर भेज दिया है।
गौरतलब है कि फरवरी 2022 में झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम के जंगलों में पीएलएफआई दस्ते का नेतृत्व कर रहे दिनेश गोप और सुरक्षाकर्मियों के बीच मुठभेड़ हुई थी। इस मुठभेड़ में सुरक्षाकर्मियों को भारी पड़ता देख दिनेश गोप पीछे हट गया और वहां से जंगल के रास्ते नेपाल भाग गया। नेपाल से ही वह झारखंड, बिहार और उड़ीसा के एरिया कमांडरों के संपर्क में रहता था और इस दौरान उसने ठेकेदारों व प्रभावशाली लोगों से करोड़ों रुपये की वसूली की।
आपको बता दें कि दिनेश गोप ने पिछले 20 सालों से झारखंड के कई जिलों में आतंक मचा रखा था और वह पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए सिरदर्द बना हुआ था। झारखंड, उड़ीसा और बिहार में उस पर 102 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर आतंकी फंडिंग के साथ-साथ लोगों की हत्या करने, सुरक्षाबलों पर हमला करने और वसूली के लिए ठेकेदारों और व्यापारियों को धमकाने का भी आरोप है। पिछले एक साल से भी ज्यादा समय से दिनेश गोप अपना हुलिया बदलकर एक सिख के भेष में नेपाल में रह रहा था। वह नेपाल के विराटनगर में एक ढाबा भी चलाता था।
फौज में जाने की चाहत रखने वाला बन गया नक्सली
हैरानी की बात यह है कि खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड स्थित मोरहाटोली गांव के रहने वाले दिनेश गोप का चयन फौज में हुआ था। दरअसल, एक समय रांची से सटे इलाकों में सम्राट गिरोह के प्रमुख जयनाथ साहू की तूती बोलती थी। उस समय वह व्यापारियों से रंगदारी के रूप में मोटी रकम वसूला करता था। इसका विरोध दिनेश गोप के बड़े भाई सुरेश गोप ने झारखंड लिबरेशन टाइगर (जेएलटी) बनाकर किया। दरअसल, जेएलटी भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) से ही टूटकर बना था।
इसके बाद, सुरेश गोप हत्या, डकैती और अपहरण जैसे जघन्य अपराधों में संलिप्त हो गया। पुलिस सुरेश गोप को खोज ही रही थी कि एक दिन खूंटी के तत्कालीन डीएसपी मधुसूदन बारी को उसके ठिकानों के बारे में पता चला। साल 2003 में सुरेश गोप और झारखंड पुलिस के बीच मुठभेड़ हुई, जिसमें सुरेश गोप मारा गया। अपने बड़े भाई की मौत से दिनेश गोप टूट चुका था। इसलिए उसने सेना में जाने की इच्छा छोड़ दी और अपने भाई द्वारा बनाए गए संगठन जेएलटी के विस्तार में लग गया और युवाओं को अपने संगठन से जोड़ने की मुहिम शुरू कर दी।
जेएलटी बना पीएलएफआई
साल 2007 में नक्सली कमांडर मसीह चरण पूर्ति अपने कुछ समर्थकों के साथ जेएलटी में शामिल हो गया। इसके बाद, जेएलटी का नाम बदलकर पीएलएफआई कर दिया गया। पीएलएफआई धीरे-धीरे झारखंड के कई जिलों में अपना पैर पसारने लगा। इसी बीच, मसीह चरण पूर्ति को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कहा जाता है कि मसीह चरण को गिरफ्तार करवाने में भी दिनेश का ही हाथ था। मसीह चरण पूर्ति के जेल जाने के बाद दिनेश गोप ने अपनी संपत्ति में भारी वृद्धि कर ली और इसी संपत्ति के बल पर वह ग्रामीणों और युवकों को अपने संगठन से जोड़ने लगा। जब पुलिस दिनेश गोप को खोजती थी तो स्थानीय ग्रामीणों के समर्थन के चलते उसे हर बार पुलिस के आने की सूचना पहले ही मिल जाती थी और वह फरार होने में सफल हो जाता था।
अपराधों की लंबी है फेहरिस्त
वैसे तो पिछले दो दशक में पीएलएफआई झारखंड के कई जिलों में आतंक का पर्याय बन गया था। जब भी उसे मौका मिलता वह छिटपुट हमले करता रहता था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2011 में दिनेश गोप ने स्थानीय नेता विश्वनाथ गोप और उनके अंगरक्षक की बेरहमी से हत्या कर दी और उनके शवों को गाड़ी सहित जला दिया। साल 2013 में दिनेश ने कर्रा थाना क्षेत्र में भूषण सिंह और गोविंद सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी थी। इस घटना को दिनेश गोप सहित दर्जनों नक्सलियों ने अंजाम दिया था।
इसी तरह से साल 2014 में दिनेश ने खूंटी के तोरपा में एक व्यक्ति का अपहरण करके उसे मौत के घाट उतार दिया था। साल 2016 में खूंटी के अड़की थाना क्षेत्र में दिनेश गोप ने एक ही परिवार के तीन सदस्यों की हत्या कर दी और दर्जनों ग्रामीणों को बेरहमी से पीटा। साल 2017 में दिनेश ने कर्रा स्थित एक प्लांट के कुछ मजदूरों को बंधक बनाकर जला दिया। जब वहां पर पुलिस पहुंची तो वह फायरिंग करते हुए भाग निकला।
दिनेश गोप का पाकिस्तान कनेक्शन
जनवरी 2022 में दिनेश गोप के सहयोगी निवेश कुमार को झारखंड पुलिस ने गिरफ्तार किया था। पुलिस से पूछताछ के दौरान उसने बताया कि वह दिनेश गोप को आधुनिक अस्त्र-शस्त्र उपलब्ध करवाता था। इसके लिए उसने पाकिस्तान के हथियार तस्करों से संपर्क साधा था और वहां से हथियार मंगवाकर उसने दिनेश को दिया था। इसके अतिरिक्त चीन, बेल्जियम और स्कॉटलैंड से भी वह आधुनिकतम हथियार मंगाकर दिनेश गोप को मुहैया कराता था।
एनआईए पहले भी कर चुकी है कार्रवाई
साल 2016 में नोटबंदी के ठीक दो दिन बाद दिनेश गोप ने अवैध वसूली के 25.38 लाख रुपये रांची से सटे बेड़ो प्रखंड के एक बैंक में एक पेट्रोल पंप संचालक के जरिए जमा कराने की कोशिश की थी। रांची पुलिस ने इस संबंध में पेट्रोल पंप संचालक सहित चार लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले को एनआईए ने जनवरी 2018 में अपने हाथ में ले लिया और दिनेश गोप के खिलाफ केस दर्ज कर दिया। उस समय एनआईए ने दिनेश गोप के सहयोगियों से 42.79 लाख रुपये नकद और करीब 70 लाख की चल-अचल संपत्ति भी जब्त की थी।
एनआईए की जांच में यह भी पता चला था कि दिनेश गोप ने अपनी दो पत्नियों और परिवार के अन्य सदस्यों की मदद से कई बैंकों में ढ़ाई करोड़ रुपये जमा कर रखे हैं। इसके साथ ही, एनआईए ने दिनेश गोप के सहयोगी सुमंत कुमार और अन्य ठिकानों पर छापेमारी की। इस छापेमारी में एनआईए को 90 लाख रुपये नकद और निवेश संबंधी कई कागजात मिले। साल 2020 में एनआईए ने दिनेश गोप की दोनों पत्नियों हीरा देवी और शकुंतला कुमारी को आतंकवाद के लिए फंडिंग करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया। बीस वर्षों तक पुलिस से बचकर भागने वाला दिनेश गोप भी अब पुलिस की गिरफ्त में आ गया है।












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