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Cough Syrups: आखिर कफ सिरप को लेकर क्यों मचा है हंगामा?

Cough Syrups: अब भारत ने भी चार साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सर्दी-खांसी के सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया है। भारतीय ड्रग्स कंट्रोलर जनरल (DGCI) ने उन सभी कफ सिरप को बच्चों के लिए खतरनाक घोषित कर दिया है जो क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन के फिक्स कॉम्बिनेशन से तैयार किए गए हैं। डीजीसीआई ने ऐसे सिरप को 4 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए न सिर्फ प्रतिबंधित किया है, बल्कि सभी सिरप पर इस आशय की चेतावनी छापने का भी निर्देश दिया है। जानिए यह कॉम्बिनेशन छोटे बच्चों के लिए क्यों है खतरनाक और क्या है कफ सिरप को लेकर उठा विवाद।

बच्चों की मौत से भारतीय कफ सिरप पर उठे सवाल

पिछले साल गाम्बिया और उज्बेकिस्तान में कुछ बच्चों की मौत के मामले आने के बाद भारत में निर्मित कफ सिरप को लेकर तमाम आशंकाएं व्यक्त की गईं थीं। हालाँकि, दवा निर्माताओं ने इसमें किसी प्रकार के हानिकारक तत्वों के होने से इनकार किया, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला उठने के बाद कोई ठोस कार्रवाई जरूरी थी।

dgci warning cough Syrups know why is there an uproar over cough syrup?

भारत में निर्मित कफ सिरप में क्लोरफेनिरामाइन मैलेट और फिनाइलफ्राइन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन दोनों रसायनों को 2015 में सामान्य सर्दी के लक्षणों के इलाज के लिए अनुमोदित किया गया था, लेकिन कथित तौर पर गाम्बिया में 66 बच्चों की मौत के बाद डब्ल्यूएचओ ने भारत-निर्मित कफ सिरप पर वैश्विक चेतावनी जारी कर दी थी। दावा किया गया कि प्रयोगशाला की जांच में यह पाया गया कि सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा, स्वीकृत सीमा से ज्यादा थी।

इसी तरह उज्बेकिस्तान में भी कथित तौर पर भारतीय कफ सिरप पीने से 18 बच्चों की मौत की बात कही गई। लेकिन भारत में जब सिरप का परीक्षण किया गया तो पाया गया कि रसायनों की मात्रा विनिर्देशों के अनुरूप थी। हालांकि भारतीय कंपनियों के दावे को डब्ल्यूएचओ ने खारिज कर दिया।

नकली दवाओं का कारोबार भी जिम्मेदार

भारत में नकली दवाओं के कारोबार अब भी चल रहे हैं। ज्यादातर छोटे शहरों और गांवों में ये नकली दवाएं बेची जाती हैं। सस्ते इलाज के नाम पर मरीजों को कुछ भी दे दिया जाता है। राज्यों में अभी भी दवा परीक्षण प्रयोगशालाएँ सुसज्जित नहीं हैं। दवाओं का नियनित निरीक्षण और प्रवर्तन भी नहीं हो पाता है।

आधिकारिक आकड़ों के अनुसार 2007 और 2020 के बीच, भारत के 28 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल तीन में सैंपल की गई और उनमें से 7,500 से अधिक दवाएं परीक्षण में विफल रहीं और उन्हें घटिया घोषित किया गया। कंपनियां अक्सर बाजार में भेजने से पहले कच्चे माल या अंतिम फॉर्मूलेशन का परीक्षण नहीं करतीं। यही नकली दवाएं बाजार में पहुँचती हैं और लोग इनका सेवन करते हैं, तो जीवन के लिए भी खतरा उत्पन्न हो जाता है।

एक्शन में आई सरकार

देश में बने कफ सिरप के बारे अतिगंभीर किस्म की शिकायत मिलने के बाद से ही सरकार एक्शन में है। खांसी सर्दी की दवाओं की जांच तेज कर दी गई है। इसी साल जून में सरकार ने सभी कंपनियों के लिए निर्देश जारी किया कि कफ सिरप को दुनिया के अन्य हिस्सों में निर्यात करने से पहले उसका विस्तृत परीक्षण कराना अनिवार्य है। उन कंपनियों के लाईसेंस निरस्त कर दिए गए जिनके सिरप में डायथिलीन ग्लाइकॉल या डीईजी अधिक मात्रा में शामिल था।

दुनिया भर में भारत की साख पर सवाल

भारत दुनिया के सबसे बड़े दवा बनाने वाले देशों में से एक है। यहाँ लगभग 3,000 कंपनियां जेनरिक दवाएं बनाती हैं तो ओवर-द-काउंटर दवाएं, टीके और सामग्री बनाने वाली फार्मास्युटिकल फैक्ट्रियों की संख्या 10,000 से अधिक है। भारत अपनी दवाओं के लिए 70 प्रतिशत घटक सामग्री के लिए चीन पर निर्भर है। लेकिन अब धीरे धीरे घरेलू स्तर पर ही कच्चा माल जुटाने का प्रयास चल रहा है। मोदी सरकार भारत को दुनिया की फार्मेसी के रूप में प्रतिष्ठित करना चाहती है। जेनेरिक दवा बनाने में भारत वैश्विक विनिर्माण आधार बनने की ओर है।

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