Credit Card Users: भारत क्रेडिट कार्ड के इस्तेमाल में पीछे, कनाडा सबसे आगे
Credit Card Users: भारत उन देशों में है, जहां क्रेडिट कार्ड का उपयोग करने वाली जनसंख्या 5 प्रतिशत से भी कम है। 17 नवंबर 23 को जारी स्टैटिस्टा की रिपोर्ट के अनुसार भारत में 2022 में केवल 4.75 प्रतिशत लोग ही क्रेडिट कार्ड का प्रयोग करते थे, जबकि कनाडा, इजरायल, अमेरिका और यूरोप के देशों में 70 प्रतिशत से अधिक लोग भुगतान क्रेडिट कार्ड से करते हैं।
2021 में कनाडा दुनिया के उन तीन देशों में से एक था, जहां 15 साल और उससे अधिक उम्र के 70 प्रतिशत से अधिक उपभोक्ताओं के पास क्रेडिट कार्ड था। क्रेडिट कार्ड के मामले में 140 से अधिक विभिन्न देशों में हर तीन साल में एक बार सर्वेक्षण कराया जाता है। यूरोप में नॉर्डिक देश, लक्ज़मबर्ग और यूनाइटेड किंगडम भी शीर्ष क्रेडिट कार्ड वाले देशों के रूप में जाने जाते हैं, जबकि नीदरलैंड क्रेडिट कार्ड के मामले में इन सभी देशों की तुलना में काफी पीछे है।

क्रेडिट कार्ड का उपयोग
दुनिया भर में करोड़ों उपभोक्ता प्रति वर्ष अरबों डॉलर के सामान की खरीद के लिए अपने क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं। प्राप्त आकड़ों के अनुसार 2022 में ई-कॉम और पीओएस पर वैश्विक क्रेडिट कार्ड लेनदेन के जरिये 13 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक खर्च किए गए। 2021-2022 के दौरान ई-कॉम में क्रेडिट कार्ड से लेनदेन में 6 प्रतिशत और पीओएस पर 12 प्रतिशत बढ़ गए। ऐसा कोरोना के कारण हुआ। महामारी के बाद वैश्विक यात्राएं शुरू हुईं तो लोगों ने नकदी बचाने के लिए क्रेडिट कार्ड का अधिकतम इस्तेमाल किया। इसके आलावा लोग क्रेडिट कार्ड का उपयोग ऋण चुकाने के लिए भी करते है क्योंकि उन्हें तुरंत भुगतान नहीं करना पड़ता है।
अमेरिका में क्रेडिट कार्ड संस्कृति
अमेरिका में क्रेडिट कार्ड के उपयोग की संस्कृति है। कई जगह अग्रणी क्रेडिट कार्ड कंपनियों ने लाखों क्रेडिट कार्ड जारी किए हैं, जो अमेरिकी नागरिकों की संख्या से भी अधिक है। लोग नकदी के बजाय कार्ड का उपयोग करने की आदत डाल चुके हैं। 2022 में संयुक्त राज्य अमेरिका में चेज़ और फिसर्व, जिसमें सिटी, सैंटेंडर और बीबीवीए शामिल हैं, का कारोबार 35 बिलियन डॉलर से अधिक था।
एफआईएस या वर्ल्डपे अकेली ऐसी कंपनी है जिसके जरिए 30 अरब से अधिक लेनदेन हुए। अमेरिकियों के लिए क्रेडिट कार्ड, एक आसान विकल्प है। नई टेक्नोलॉजी के कारण क्रेडिट कार्ड का उपयोग एक दम आसान बना दिया गया है। एप्पल पे और पे पाल जैसे मोबाइल वॉलेट उत्तर अमेरिकी खुदरा विक्रेताओं द्वारा तेजी से स्वीकार किए जा रहे हैं। ये आम तौर पर क्रेडिट कार्ड का उपयोग करते हैं।
भारत में क्रेडिट कार्ड का प्रचलन कम क्यों?
भारत में क्रेडिट कार्ड के कम उपयोग का सबसे पहला कारण क्रेडिट कार्ड ऋण पर भारी ब्याज दर है। क्रेडिट कार्ड पर यहां देय ब्याज दर 30 प्रतिशत से 42 प्रतिशत एपीआर (एनुअल परसेंटेज रेट) है, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका में एपीआर लगभग 20 प्रतिशत है। अमेरिकी सरकारी सिक्योरिटीज के रूप में केवल 2 प्रतिशत एपीआर का भुगतान करती हैं, जबकि भारतीय सरकार 6 प्रतिशत एपीआर का भुगतान करती हैं।
क्रेडिट कार्ड की अर्हता के लिए सत्यापन योग्य आय की आवश्यकता होती है, जबकि भारत की 75 प्रतिशत आबादी कृषि या अन्य गैर संगठित क्षेत्र में काम करती है, जिसमें न कोई औपचारिक भुगतान होता है और ना ही बैंक खाते में पर्याप्त राशि। यहां तक कि कृषि भूमि मालिकों के पास भी बैंक खाते या आय का सत्यापन योग्य स्रोत नहीं है। ये 75 प्रतिशत लोग जीवन बीमा खरीदने से भी वंचित होते हैं।
भारत में ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा
भारत में, ऑनलाइन भुगतान को बढ़ावा देने के लिए ई-भुगतान और डिजिटल प्लेटफार्म का प्रचलन तेजी से बढ़ा है। इसके अलावा पेटीएम, मोबिक्विक आदि डिजिटल वॉलेट के उछाल ने भी नई पीढ़ी को डिजिटल भुगतान की ओर धकेल दिया है। ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफ़ॉर्म और अपनी उंगलियों पर अपनी ज़रूरत की चीज़ें आसानी से प्राप्त करने की सुविधा ने लोगों को तकनीक में माहिर बना दिया है। भारत में यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफ़ेस (UPI) लेनदेन पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 2023 की पहली छमाही में 62% बढ़ गया है। वैश्विक भुगतान सेवा प्रदाता वर्ल्डलाइन की एक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2023 में यूपीआई लेनदेन 9.3 बिलियन तक पहुंच गया, जो कि जनवरी 2018 में 151 मिलियन था।
सामाजिक दबाव और पारिवारिक नियंत्रण भी क्रेडिट कार्ड के खिलाफ
भारत में ज्यादातर लोग सोचते हैं कि क्रेडिट कार्ड से अधिक खर्च हो सकता है और वे कर्ज में डूब जाएंगे। ज्यादातर लोग सोचते हैं कि अगर मेरे पास खर्च करने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं हैं तो क्रेडिट कार्ड का बिल कहां से चुका पाएंगे और इस तरह के कई अन्य कारण हैं जिनके चलते अधिकांश भारतीय क्रेडिट कार्ड का उपयोग नहीं करते हैं।
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