China Unemployment: चीन में अपने ही माता पिता की सेवा का वेतन लेते हैं 'फुल टाइम चिल्ड्रन'
China Unemployment: चीन में इन दिनों 'फुल टाइम चिल्ड्रेन' का विचार तेजी से पनप रहा है। वहां के अधिकतर बेरोजगार नौजवान इस विचार को अपना रहे हैं और अपनी आय का जरिया बना रहे हैं। ये फुल टाइम चिल्ड्रेन, दरअसल अपने ही बूढे मां बाप की सेवा का काम करते हैं और बदले में वेतन लेते हैं। यह वेतन 500 से 1000 डाॅलर के बीच होता है। चीन में बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, इसलिए फुल टाइम चिल्ड्रेन का विचार भी आगे बढ़ रहा है।
परंतु चीन के अभिभावक इस बात से भी डर रहे हैं कि विश्वविद्यालय में पढ़ने जाने या अपनी पसंद की नौकरी करने के बजाय उनके बच्चे उनकी देखभाल में समय निकाल देते हैं तो आगे उनका भविष्य और अंधकारमय हो जाएगा। चूंकि चीन में वन चाइल्ड पॉलिसी 1980 से लेकर 2016 तक लागू रही, इसलिए अधिकतर घरों में एक ही बच्चा है, जो या तो घर में रहकर मां बाप की सेवा कर सकता है या फिर बाहर जाकर पढ़ाई लिखाई करके नौकरी प्राप्त कर सकता है।

फुल टाइम चिल्ड्रेन के रूप में ज्यादातर लड़कियां काम कर रही हैं। जिन्हें ना तो इस समय कोई अच्छी नौकरी मिल रही है और किसी बड़े विश्वविद्यालय में पढ़ने का मौका। इसलिए ज्यादातर लड़कियां फुल टाइम चिल्ड्रेन का काम कर रही है। इससे उनको कुछ समय के लिए निश्चित आय मिल रही है। ये फुल टाइम चिल्ड्रेन, मां बाप को शापिंग कराने से लेकर उनकी मेडिकल सेवाओं तक का ख्याल रखते हैं। वे उनकी रोजाना की जरूरतों का इंतजाम करते हैं, बदले में मां बाप उनको वेतन देते हैं। इन दिनों चीन में हैशटेग "फुलटाइम चिन्ड्रेन" खूब चल रहा है।
दरअसल कोविड के बाद से चीन की आर्थिक हालत खराब होती जा रही है। जीरो टोलरेंस कोविड नॉर्म्स की चीन की नीति ने बेरोजगारी जबर्दस्त रूप से बढ़ा दी है। जून 203 में चीन में 14 से 26 वर्ष के युवाओं के बीच बेरोजगारी दर 26 प्रतिशत थी। चीन बेरोजगारी से इतना घबराया हुआ है कि जून के बाद से बेरोजगाड़ी के आंकड़े बाहर ही नहीं आने दे रहा है। चीन की विकास दर भी 5 प्रतिशत के आस पास ही है। लगातार कई दशकों तक आठ प्रतिशत से अधिक की विकास दर हासिल करने वाला चीन इस समय कई झंझावातों से गुजर रहा है। उस पर बढती उम्र के लोगों की संख्या भी हर साल बढ़ती ही जा रही है।
चीन यूरोप के कुछ देशों की तरह एक बुढ़ाता देश बनता जा रहा है। चीन में इस समय अनुमानतः 30 करोड़ लोग 60 साल से उपर के हैं और आकलन यह भी है कि 2040 तक चीन में बुजुर्गों की संख्या 40 करोड़ यानी कुल जनसंख्या का लगभग 30 प्रतिशत हो जाएगी। ऐसे में इतने लोगों की देखभाल करना भी चीन के लिए मुसीबत बनने वाली है।
हालांकि चीन में पेंशन की व्यवस्था है। वहां पुरुष के लिए 60 साल, महिलओं के लिए 50 साल और मजदूरों एवं कारखाना के कर्मचारियों के लिए 55 साल रिटायरमेंट की उम्र रखी गई है। वहां मासिक पेंशन की राशि रिटायरमेंट से पहले अंतिम महीने के वेतन का 60 प्रतिशत होती है। दस साल या उससे अधिक सरकारी विभाग या किसी निगम में काम करने वाले पेंशन के हकदार हो जाते हैं।
सोशल मीडिया पर हजारों युवक युवतियां फुल टाइम चिल्ड्रन के रूप में अपनी पहचान लेकर चल रहे हैं। नए स्नातकों का चीन की व्यवस्था से तेजी से मोहभंग हो रहा है। बचपन में लाड प्यार से पले, यूनिवर्सिटी में जाने और फिर किसी बड़ी कंपनी में काम करने के सपने संजोये चीन के युवा फुल टाइम चिल्ड्रन बनकर खुश नहीं है, उनके अंदर अब निराशा घर कर रही है।
जब सफलता का मार्ग अचानक बाधित हो जाता है तो जीवन की वास्तविकताओं से पाला पड़ता है। पहली बार, भूमिकाएँ उलट गई हैं। अब ये पूर्णकालिक बच्चे अपने माता-पिता की मदद कर रहे हैं, अपनी इच्छाओं का गला घोंटकर, उनकी जरूरतों को पूरा कर रहे हैं। हालाँकि उन्हें अपने माता-पिता से "वेतन चेक" मिलता है, लेकिन वे जानते हैं कि इस "रोज़गार" की प्रकृति परिवार है। यह एक अस्थायी उपाय है, अंतिम उपाय नहीं। रिश्ता भी लेन-देन का नहीं है। इसमें ना तो कोई नौकरी छोड़ने वाला है, ना निकाला जाने वाला है। बस जीवन का लक्ष्य बदल गया है। जीवन का ध्येय परीक्षा पास कर नौकरी प्राप्त करने के बजाय परिवार की सेवा करने पर केंद्रित होता जा रहा है।
कुछ माता-पिता तो अपने वयस्क बच्चों की वापसी का स्वागत करते हैं, लेकिन कइयों को अफ़सोस भी है। क्योंकि वह चाहते हैं कि उनके बच्चे भी नौकरी कर के करियर बनाए और शादी करके अपना घर बसाए, पर परिस्थितियों ने दोनों पक्षों को मजबूर कर रखा है।












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