चमकी बुखार: मुजफ्फरपुर इलाके में फैले इंसेफलाइटिस को क्यों मिला ये नाम?
मुजफ्फरपुर। इन दिनों बिहार में हाहाकार मचा हुआ है, वजह है 'चमकी बुखार', जिसके कहर से यहां के मुजफ्फरपुर इलाके में 60 बच्चे काल के गाल में समा चुके हैं, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, लोगों के घरों का आंगन सूना हो गया है, उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि कैसे एक बुखार ने उनकी दुनिया को उजाड़ दिया है, गौरतलब है कि मुजफ्फरपुर और इसके आस-पास के इलाकों में भयंकर गर्मी और उमस की वजह से बच्चे 'एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम' यानी कि 'चमकी बुखार' का तेजी से शिकार हो रहे हैं, अपने आप में बेहद ही घातक इस बुखार का नाम 'चमकी' भी काफी अजीब है, आखिर इस बुखार का इलाज क्यों नहीं मिल रहा है और बच्चे में इसकी चपेट में क्यों और कैसे आ रहे हैं, यही यक्ष प्रश्न सबके दिमाग में घूम रहा है।
चलिए विस्तार से जानते हैं इस चमकी बुखार के लक्षण और उपाय के बारे में.......

लक्षण
'चमकी बुखार' में बच्चे को लगातार तेज बुखार हमेशा ही रहता है, इस दौरान बच्चे के शरीर में ऐंठन होती है, दांत किटकिटाने लगते हैं, आंखें लाल हो जाती हैं, कमज़ोरी की वजह से बच्चा बार-बार बेहोश होता है, शरीर सुन्न हो जाता है, कई मौकों पर ऐसा भी होता है कि अगर बच्चों को चिकोटी काटेंगे तो उसे पता भी नहीं चलेगा, जबकि आम बुखार में ऐसा नहीं होता है, इस बुखार में बच्चा हिल-डुल भी नहीं पाता है, हालांकि शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन नहीं होती है।

क्यों पड़ा 'चमकी' नाम?
इस बुखार में बच्चे के शरीर में काफी कंपकपी होती है, दांत किटकिटाने लगते हैं, जिसे आम बोलचाल में चमकना भी कहते हैं, इसलिए इसे 'चमकी बुखार' कहते हैं, इस बुखार ने इस वक्त पूरे बिहार में हड़कंप मचा दिया है।
क्या कहना है डॉक्टरों का?
डॉक्टरों का कहना है कि 'एक्यूट इंसेफलाइटिस सिंड्रोम' यानी कि 'चमकी बुखार' गर्मी की वजह से प्रभावित है, अगर पिछले केसों पर नजर डालेंगे तो पाएंगे कि इस रोग से ज्यादातर बच्चे मई, जून और जुलाई के महीने में ही मरे हैं यानी कि गर्मी में ये रोग बहुत ज्यादा प्रभावी है।

बच्चे ही क्यों हो रहे हैं शिकार?
डॉक्टरों के मुताबिक इस केस में ज्यादातर बच्चे ही दिमागी बीमारी के शिकार होते हैं चूंकि बच्चों के शरीर की इम्युनिटी कम होती है, वो शरीर के ऊपर पड़ रही धूप को नहीं झेल पाते हैं, यहां तक कि शरीर में पानी की कमी होने पर बच्चे जल्दी हाइपोग्लाइसीमिया के शिकार हो जाते हैं और बच्चों के शरीर में सोडियम की भी कमी हो जाती है और वो इस बुखार की चपेट में आ रहे हैं।
सावधानियां
कहा जा रहा है कि उन इलाकों में इस रोग का प्रभाव ज्यादा है जहां लीची ज्यादा होती है, हालांकि अब तक लीची और इस रोग का कोई संबंध होने का वैज्ञानिक प्रमाण नहीं मिला है लेकिन गर्मी के मौसम में बच्चों को बिना धूले और सड़े फल खाने से बचना चाहिए।
रखें इस बात का ख्याल
- घरवाले इस बात का खास ख्याल रखें कि बच्चे किसी भी हाल में जूठे और सड़े हुए फल नहीं खाएं।
- बच्चों के गंदगी से बिल्कुल दूर रखें, खाने से पहले और खाने के बाद हाथ ज़रूर धुलवाएं और गर्मियों के मौसम में धूप में सीधा खेलने से मना करें।

बीमारी का इलाज क्या है?
- 'चमकी बुखार' से पीड़ित इंसान के शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए।
- 'चमकी बुखार' से पीड़ित बच्चों में शुगर की कमी हो जाती है इसलिए बच्चे को खाने के साथ बीच-बीच में मीठा खिलाते रहें।
- बच्चों को थोड़-थोड़ी देर में लिक्विड फूड भी देते रहे ताकि उनके शरीर में पानी की कमी न हो।
- डॉक्टर इस बीमारी का कारगर इलाज़ नहीं ढूंढ पाए हैं इसलिए सावधानी ही बचाव है।












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