Naxals Attack: नक्सलियों के निशाने पर दंतेवाड़ा ही क्यों? जानें कब-कब हुए बड़े नक्सली हमले
नक्सली वे हैं जो कट्टर वामपंथी विचारधारा का समर्थन करते हैं और इनकी जिंदगी का एक ही मकसद होता है, हिंसा के सहारे सत्ता पर कब्जा करना।

Naxals Attack: 26 अप्रैल, 2023 को छत्तीसगढ़ के घोर माओवाद से प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में नक्सलियों ने एक बार फिर से बड़ी घटना को अंजाम दिया है। इस हमले में राज्य के डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड (DRG) के 10 जवान वीरगति प्राप्त हो गये हैं। वहीं जवानों के साथ गए ड्राइवर की भी मौत हो गई।
पुलिस के हवाले से मिली खबर के अनुसार माओवादियों ने दंतेवाड़ा जिले के भीतर अरनपुर के वन्य क्षेत्र में इस घटना को घात लगाकर अंजाम दिया है। माओवादी आतंकियों ने आईईडी ब्लास्ट कर जवानों पर हमला किया।
दंतेवाड़ा में नक्सलियों का इतिहास?
वैसे दंतेवाड़ा में नक्सलियों का इतिहास कोई नया नहीं है। जब 60-70 के दशक में माओवाद देश के कई आदिवासी और पिछड़ों इलाकों में अपना प्रभाव जमा रहा था। तभी तत्कालीन मध्य प्रदेश राज्य के आदिवासी बहुल क्षेत्र जैसे दंतेवाड़ा, बस्तर, बीजापुर, कांकेर, कोंडागांव, नारायणपुर, राजनांदगांव और सुकमा जैसे इलाकों में माओवाद ने अपना प्रभाव बखूबी तौर पर स्थापित किया। ये सभी इलाके आज छत्तीसगढ़ राज्य में हैं।
छत्तीसगढ़ में मुठभेड़ और हिंसा के आंकड़े
सुरक्षाबलों और माओवादियों के बीच पिछले 40-50 सालों से बस्तर, दंतेवाड़ा जैसे इलाकों में संघर्ष चल रहा है। राज्य बनने के बाद से छत्तीसगढ़ में साल 2019 तक 3200 से अधिक मुठभेड़ की घटनाएं हुई हैं। गृह विभाग की एक रिपोर्ट के अनुसार जनवरी 2001 से मई 2019 तक माओवादी हिंसा में 1002 माओवादी और 1234 सुरक्षाबलों के जवान मारे गये हैं। वहीं इसके अलावा 1782 आम नागरिक माओवादी हिंसा के शिकार हुए थे। इस दौरान 3896 माओवादियों ने समर्पण भी किया था।
2020-21 के आंकड़े बताते हैं कि 30 नवंबर, 2020 तक राज्य में 31 माओवादी पुलिस मुठभेड़ में मारे गये थे, जबकि 270 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। हालांकि, माओवादी मुठभेड़ और आत्मसमर्पण की खबरों के बीच-बीच में शांति वार्ता की पेशकश की चिट्ठी और विज्ञप्तियां भी आती-जाती रहती हैं लेकिन बात वहीं खत्म हो जाती है।
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आखिर नक्सलियों के निशाने पर दंतेवाड़ा क्यों?
अगर बात दंतेवाड़ा की करें तो यहां के जंगलों के बारे में कहा जाता है कि यहां ऐसे-ऐसे कई इलाके, जंगल, नदियां और टीले हैं, जहां आज तक आजाद भारत का कोई प्रतिनिधि नहीं पहुंचा है। न वहां का कोई सटीक नक्शा है न बहुत ज्यादा जानकारी। ये पहली बार नहीं है जब नक्सलियों ने सीधे सुरक्षाबलों को निशाना बनाया हो। चलिए, एक नजर दंतेवाड़ा में हुई पिछली कुछ बड़ी घटनाओं पर डालते हैं।
● 9 अप्रैल 2019 को दंतेवाड़ा में विधायक भीमा मंडावी के काफिले को निशाना बनाया गया। यहां नक्सलियों ने घेरा लगाकर आइईडी ब्लास्ट किया था। इसमें विधायक भीमा मंडावी समेत 5 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी।
● 20 मई 2018 को दंतेवाड़ा जिले के चोलनार गांव में एक नक्सली हमला हुआ था। ये एक IED ब्लास्ट था, जिसमें 7 सुरक्षाकर्मियों की मौत हुई थी।
● 30 अक्टूबर 2018 को नक्सलियों ने दंतेवाड़ा जिले के अरनपुर में हमला कर दो पुलिसकर्मियों और दूरदर्शन के एक कैमरामैन को मार दिया था।
● अप्रैल, 2015 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों के बिछाए बारूदी सुरंग के फटने से 4 जवान शहीद हो गये, जबकि 8 घायल हो गये थे।
● फरवरी, 2014 में दंतेवाड़ा जिले में श्यामगिरी में सड़क निर्माण की सुरक्षा में लगे जवानों को घेरे में फंसा कर अंधाधुंध फायरिंग की। इस घटना में जिला पुलिस के 5 जवान शहीद हो गये थे।
● 6 अप्रैल, 2010 को दंतेवाड़ा में नक्सलियों ने अपने सबसे बड़े हमले को अंजाम दिया था। इसमें सीआरपीएफ के 75 जवान शहीद हो गये थे। वहीं राज्य पुलिस के एक अधिकारी की भी मौत हुई थी। करीब एक हजार नक्सलियों ने सीआरपीएफ के जवानों को घेरकर हमला किया था।
निर्दोष जनता को भी नहीं छोड़ते ये नक्सली?
ये नक्सलवादी आम जनता (स्थानीय) को भी नहीं छोड़ते हैं। पुलिस से मुखबिरी के शक पर ये लोग स्थानीय लोगों को भी गोली मार देते हैं। अगर उन्हें शक हो गया कि कोई शख्स पुलिस से बात कर रहा है या मुखबिरी कर रहा है तो उसे जनता अदालत लगाकर (गांव के लोगों को जमा करके सबके सामने गोली मारते हैं) या ऐसे ही गोली मारकर उसकी बॉडी को टांग देते हैं। बीते कुछ महीनों में दंतेवाड़ा में हुई कुछ घटनाएं।
● 2 मई, 2023 को दंतेवाड़ा जिले के कटेकल्याण इलाके के एक कोटवार को शक के आधार पर मारकर फेंक दिया गया।
● 28 अप्रैल, 2023 को दंतेवाड़ा के नीलावाया में एक दिव्यांग युवक की हत्या कर दी गई।
● 10 फरवरी, 2023 को भी माओवादियों ने दंतेवाड़ा जिले के टेटम में एक युवक की हत्या कर दी थी।
● फरवरी 2023 में नारायणपुर, दंतेवाड़ा और बीजापुर इन 3 जिलों में भाजपा के 3 नेताओं को मारा। जिसमें 11 फरवरी को इंद्रावती नदी के पार दंतेवाड़ा-नारायणपुर जिले की सरहद पर बीजेपी नेता रामधर अलामी को नक्सलियों ने निशाना बनाया।
2010 से लेकर अब तक छत्तीसगढ़ में हुए कुछ बड़े नक्सली हमले?
● 29 जून 2010 को नारायणपुर जिले में एक नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद हो हुए।
● 25 मई 2013 को दरभा घाटी में नक्सलियों के हमले में 25 कांग्रेसी नेता मारे गये थे। इनमें राज्य के पूर्व मंत्री महेंद्र कर्मा और छत्तीसगढ़ कांग्रेस प्रमुख नंद कुमार पटेल भी थे।
● 11 मार्च 2014 को सुकमा जिले में घिरम घाटी में नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 11 जवानों, 4 पुलिसकर्मियों और 1 नागरिक सहित 16 लोगों की मौत हो गई थी।
● 12 मार्च 2017 को सुकमा जिले में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हो गये थे।
● 24 अप्रैल 2017 को सुकमा जिले में नक्सलियों ने सीआरपीएफ के अधिकारियों के एक ग्रुप पर हमला किया था, इस हमले में 25 जवानों की मौत हुई थी।
● 13 मार्च 2018 को सुकमा जिले के किस्ताराम क्षेत्र में नक्सलियों ने एक आईई डी (IED) विस्फोट किया। जिसमें सीआरपीएफ 212 बटालियन के 9 जवानों की मौत हो गई थी।
● 21 मार्च 2020 को सुकमा के एल्मगुंडा जंगल में नक्सलियों के हमले में छत्तीसगढ़ पुलिस के 17 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गये थे। इनमें 12 जवान डीआरजी (DRG) और 5 स्पेशल टास्क फोर्स के थे।
● 23 मार्च 2021 को बस्तर के नारायणपुर जिले में माओवादियों ने सुरक्षाकर्मियों को ले जा रही एक बस को ब्लास्ट किया था। जिसमें 5 जवानों की मौत हो गई थी।
● 3 अप्रैल 2021 को बीजापुर और सुकमा जिले की सीमा पर माओवादियों ने 22 सुरक्षाकर्मियों को मार डाला था।












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