बिहार विधान परिषद चुनाव की तारीखें तय, नीतीश कुमार वाली सीट किसे मिलेगी? ये नाम रेस में आगे
Bihar Legislative Council Election: बिहार और कर्नाटक में विधान परिषद चुनाव को लेकर चुनाव आयोग ने कार्यक्रम जारी कर दिया है। बिहार में इस बार 10 सीटों पर चुनाव होना है, जबकि कर्नाटक में 7 सीटों के लिए मतदान कराया जाएगा। बिहार की राजनीति में यह चुनाव काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि विधानसभा में संख्या बल के हिसाब से एनडीए मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है।
यही वजह है कि ज्यादातर सीटों पर एनडीए की बढ़त तय मानी जा रही है। दूसरी तरफ आरजेडी भी अपनी मौजूदगी बचाने की कोशिश में जुटी हुई है। चुनाव की तारीखों के ऐलान के साथ ही संभावित उम्मीदवारों और सीट बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई सहयोगी दल भी अपने नेताओं को विधान परिषद भेजने की तैयारी में लगे हैं। इसी बीच कुछ नए नामों की दावेदारी भी चर्चा में आ गई है।

1 जून को जारी होगी अधिसूचना
बिहार विधान परिषद चुनाव के लिए 1 जून को अधिसूचना जारी की जाएगी। इसके बाद नामांकन की प्रक्रिया शुरू होगी। मतदान 18 जून को कराया जाएगा और उसी दिन नतीजे भी घोषित कर दिए जाएंगे। इस चुनाव में कुल 10 सीटों पर वोटिंग होगी।
ये भी पढ़ें: कौन हैं IAS कुमार रवि? MNC की मोटी सैलरी छोड़ बने अफसर, नीतीश कुमार के सबसे भरोसेमंद अब निशांत की टीम में!
इन सीटों में 9 सदस्यों का कार्यकाल 28 जून को पूरा हो रहा है। वहीं एक सीट पहले ही खाली हो चुकी है, क्योंकि सम्राट चौधरी राज्यसभा जाने के बाद इस पद से इस्तीफा दे चुके हैं।
किन सदस्यों का खत्म हो रहा कार्यकाल
बिहार विधान परिषद से जिन नेताओं का कार्यकाल खत्म हो रहा है उनमें डॉ. कुमुद वर्मा, प्रोफेसर गुलाम गौस, मोहम्मद फारूक, भीष्म साहनी, श्रीभगवान सिंह कुशवाहा, संजय प्रकाश, समीर कुमार सिंह, सम्राट चौधरी और सुनील कुमार सिंह शामिल हैं।
वहीं कर्नाटक विधान परिषद में गोविंद राजू, नसीर अहमद, एन नागाराजू, प्रताप सिम्हा नायक, टिप्पानप्पा, सुनील वालायुर और बीके हरिप्रसाद का कार्यकाल 30 जून को पूरा हो जाएगा।
बिहार विधान परिषद की जिन 10 सीटों पर चुनाव होने जा रहा है, उनमें एक सीट वह भी शामिल है जो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। नीतीश कुमार मार्च 2026 में राज्यसभा के लिए चुने गए थे, जिसके बाद उन्होंने बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ दी थी। यह कोई क्षेत्रीय सीट नहीं थी, बल्कि विधान परिषद की वह सदस्यता थी जिस पर वे एमएलसी के तौर पर मौजूद थे। अब उनके इस्तीफे से खाली हुई इसी सीट पर भी चुनाव कराया जाएगा।
बिहार में NDA मजबूत स्थिति में
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में विधान परिषद की एक सीट जीतने के लिए करीब 24 से 25 विधायकों का समर्थन जरूरी माना जाता है। मौजूदा स्थिति में NDA के पास दो तिहाई के करीब विधायक हैं। ऐसे में BJP और JDU की अगुवाई वाला गठबंधन 9 सीटें जीतने की स्थिति में माना जा रहा है।
हालांकि NDA की कोशिश सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज करने की रहेगी। दूसरी तरफ RJD के पास करीब 25 विधायक हैं, इसलिए उसे एक सीट मिलने की संभावना जताई जा रही है।
जेडीयू को मिल सकता है ज्यादा हिस्सा
राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इस बार JDU को ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इसकी बड़ी वजह यह मानी जा रही है कि खाली हो रही अधिकतर सीटें पहले JDU के खाते में थीं। BJP को 2 से 3 सीटें मिलने की संभावना बताई जा रही है।
इसके अलावा NDA के सहयोगी दल भी विधान परिषद में अपनी हिस्सेदारी चाहते हैं। सीटों के बंटवारे में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों का भी ध्यान रखा जाएगा।
सहयोगी दलों की बढ़ी उम्मीदें
चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी आरएलएम और जीतन राम मांझी की पार्टी हम भी एमएलसी सीटों पर दावा ठोक रही हैं। ऐसे में गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर लंबी बातचीत हो सकती है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार उम्मीदवार तय करते समय सामाजिक संतुलन और क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को अहम रखा जाएगा।
निशांत कुमार और दीपक प्रकाश चर्चा में
बिहार सरकार में स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का नाम भी संभावित उम्मीदवारों में शामिल बताया जा रहा है। मंत्री बनने के बाद उन्हें छह महीने के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी है। इसी वजह से उन्हें विधान परिषद भेजे जाने की चर्चा तेज है।
वहीं आरएलएम नेता और उपेंद्र कुशवाहा के बेटे पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का नाम भी दावेदारों में शामिल बताया जा रहा है। गठबंधन में सीट बंटवारे के बाद उम्मीदवारों की तस्वीर और साफ हो सकती है।












Click it and Unblock the Notifications