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Chanda Kochhar: ट्रेनी से CEO बनी, लेकिन एक ‘चिट्ठी’ ने तबाह कर दिया सब कुछ

पद्म भूषण से सम्मानित, फोर्ब्स इंडिया, टाइम मैगजीन और फॉर्च्यून पत्रिका में हमेशा सुर्खियां बटोरने वाली ICICI की पूर्व CEO चंदा कोचर को सीबीआई ने एक घोटाले में गिरफ्तार कर लिया है।

who is Chanda Kochhar

Chanda Kochhar: सीबीआई ने ICICI की पूर्व सीईओ चंदा कोचर और उनके पति दीपक कोचर को एक बैंक फ्रॉड के केस में गिरफ्तार कर लिया है। एक समय था, जब चंदा कोचर का नाम बैंकिंग सेक्टर के दिग्गजों की लिस्ट में टॉप पर था। इनकी काबिलियत को ऐसे समझ सकते हैं कि भारत के सर्वोंच्च सम्मान पद्म भूषण (2011 में) से सम्मानित चंदा कोचर को फॉर्च्यून पत्रिका ने लगातार 3 बार भारत की सबसे प्रभावशाली कारोबारी महिला का खिताब दिया था।

पीएम मोदी को लिखी गयी थी चिट्ठी
बात है साल 2016 की, जब एक गुमनाम चिट्ठी ICICI बैंक और वीडियोकॉन समूह के बीच होने वाले वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, वित्त मंत्री अरूण जेटली समेत कई जांच एजेंसियों को लिखी गयी थी। यह गुमनाम चिट्ठी अरविंद गुप्ता ने लिखी थी जोकि वीडियोकॉन समूह में एक निवेशक थे। इसके बाद जांच की प्रक्रिया और सुगबुगाहट शुरू हुई।

इंडियन एक्सप्रेस ने किया खुलासा
जब इंडियन एक्सप्रेस ने इन वित्तीय गड़बड़ियों पर रिपोर्ट प्रकाशित की, तो यह मामला सुर्खियों में बन गया। मार्च 2018 में इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि वीडियोकॉन ग्रुप की पांच कंपनियों को ICICI ने अप्रैल 2012 में 3,250 करोड़ रुपये का लोन दिया। इसमें आरोप यह है कि वीडियोकॉन ग्रुप को जो लोन दिये गये, वे NPA (Non-Performing Assets) बनते गये। एनपीए (गैर-निष्पादनकारी संपत्तियां) का मतलब ऐसे ऋण से है, जिसका लौटना संदिग्ध हो। बावजूद इसके लोन देने का क्रम जारी रहा।

इसके बाद ICICI बैंक ने इसकी जांच कराने का फैसला किया। बैंक ने 30 मई 2018 को घोषणा कर बताया कि बोर्ड व्हिसल ब्लोअर (गुमनाम मुखबिर) के आरोपों की विस्तृत जांच करेगा। इसके बाद मामले की स्वतंत्र जांच की जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज बीएन श्रीकृष्णा को सौंपी गई। साल 2019 के जनवरी में जांच पूरी हुई और चंदा कोचर को दोषी पाया गया। मामला इतना बढ़ गया कि 4 अक्तूबर 2018 को चंदा कोचर को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद अप्रैल 2019 में सीबीआई ने इस केस को अपने हाथ में लिया और दीपक कोचर, वीडियोकॉन ग्रुप समेत कुछ अज्ञात लोगों के बीच हुए लेनदेन की शुरुआती जांच शुरू की। वहीं प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक चंदा कोचर, दीपक कोचर की स्वामित्व एवं नियंत्रण वाली कंपनियों से संबंधित 78 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कर ली है।

लोन से किसे मिला था फायदा?
चंदा कोचर पर अपने पति को आर्थिक फायदा पहुंचाने के लिए अपने पद के दुरुपयोग के आरोप लगे हैं। दरअसल, साल 2012 में वीडियोकॉन ग्रुप को ICICI बैंक ने लोन दिया था। जो NPA हो गया और बाद में इसे बैंक फ्रॉड कहा गया। चंदा कोचर तब बैंक की सीईओ थी और उनके नेतृत्व में ICICI बैंक ने वीडियोकॉन ग्रुप को 3,250 करोड़ का लोन दिया और 6 महीने बाद वेणुगोपाल धूत के स्वामित्व वाली मेसर्स सुप्रीम एनर्जी ने मैसर्स न्यूपावर रिन्यूएबल्स को 64 करोड़ का लोन दिया, जिसमें दीपक कोचर (चंदा कोचर के पति) की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। इस मामले में सितंबर 2020 में प्रवर्तन निदेशालय ने दीपक कोचर को गिरफ्तार भी किया था।

सीबीआई ने इस मामले में 2019 में प्राथमिकी दर्ज की थी। आपराधिक साजिश एवं भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम से संबंधित आईपीसी की तमाम धाराओं के तहत दर्ज प्राथमिकी में चंदा कोचर, उनके पति और वीडियोकॉन समूह के वेणुगोपाल धूत सहित न्यूपावर रिन्यूएबल्स, सुप्रीम एनर्जी, वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड के नाम शामिल हैं।

कौन है चंदा कोचर और उनकी उपलब्धियां
17 नवंबर 1961 को राजस्थान के जोधपुर में जन्मीं चंदा कोचर पेशे से बैंकर है। उन्होंने 22 साल की उम्र में ICICI (Industrial Credit and Investment Corporation of India) बैंक ज्वॉइन कर लिया था। 1984 में वे बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी के नाते बैंक से जुड़ी थी। शुरुआती सालों में वे प्रोजेक्ट अप्रेजल, मॉनिटरिंग और टेक्सटाइल-पेपर और सीमेंट उद्योग से जुड़े प्रोजेक्ट्स देखती थी, लेकिन अपनी मेहनत और काबिलियत के बल पर 47 साल की उम्र आते-आते वह इसी प्राइवेट बैंक में साल 2009 में CEO (Chief executive officer) बन गयी।

यह किसी भी भारतीय महिला का बैंकिंग सेक्टर में इतनी बड़ी उपलब्धि प्राप्त करने सहित इतिहास रचने जैसा था। उनके सीईओ बनने के बाद चंदा कोचर ने पूरी भारतीय रिटेल बैंकिंग इंडस्ट्री को बदलकर रख दिया। चंदा कोचर के नेतृत्व में 2011-12 की पहली तिमाही में बैंक ने अपने शुद्ध मुनाफे में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की थी। जबकि उस समय कई प्रमुख बैंकों के मुनाफे में कमी आई थी।

साल 2011 में उन्हें पद्म भूषण जैसा सर्वोच्च सम्मान दिया गया। इसके अलावा उन्हें टाइम मैग्जीन के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों की सूची में 2015 में शामिल किया गया था। फोर्ब्स इंडिया की इसी साल प्रकाशित हुई दुनिया की 100 सबसे प्रभावशाली महिलाओं की सूची में चंदा 36वें पायदान पर थी। फॉर्च्यून पत्रिका ने लगातार 3 बार उन्हें भारत की सबसे प्रभावशाली कारोबारी महिला का खिताब दिया था। लेकिन अब वही चंदा कोचर सीबीआई की गिरफ्त में है।

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