BYJU’S: दुनिया का सबसे बड़ा ऐड-टेक स्टार्टअप संकट में, दिवालिया होने की कगार पर कैसे पहुंचा बायजू?
BYJU'S: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ऐड-टेक कंपनी, बायजू के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) जांच के अन्तर्गत कंपनी के संस्थापक, बीजू रवींद्रन के खिलाफ अपने लुकआउट सर्कुलर को रिन्यू किया है।
बीजू के देश में प्रवेश और निकास पर जारी किया गया सर्कुलर पहली बार एक साल पहले जारी किया गया था और अब इसे इस प्रावधान के साथ रिन्यू किया गया है कि अगर रवींद्रन देश छोड़ते हैं तो ईडी को सूचित किया जाना चाहिए। आपको यह भी बता दें कि बायजू अपने अब तक के सबसे बड़े वित्तीय संकट से जूझ रहा है, पिछले दो सालों में बायजू की वैल्यूएशन 99% गिर चुकी है। कंपनी के बोर्ड ने बीजू रविन्द्रन को CEO पद से हटाने की भी चर्चा की है।

बायजू के पीछे क्यों पड़ी है ईडी?
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अप्रैल 2023 में बायजू से जुड़े परिसरों में तलाशी और जब्ती अभियान चलाया और विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के तहत ₹9,362.35 करोड़ के उल्लंघन पर बीजू रवींद्रन और उनकी कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किया। जांच विदेशी मुद्रा उल्लंघनों से संबंधित है, जिसमें 2011 से 2023 के बीच विदेशों में किए गए ₹9,000 करोड़ से अधिक के भुगतान के साथ-साथ विदेशी संस्थाओं को वित्तीय फाइलिंग में देरी के बारे में चिंताएं शामिल हैं।
इसके बाद ईडी ने बायजू की पैरंट कंपनी 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' और बीजू रवींद्रन पर नवंबर 2023 में FEMA के तहत मामला दर्ज किया था। ईडी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कंपनी को मिले कई विदेशी निवेश की वह जांच कर रही है। ईडी के अधिकारी ने बताया था कि बायजू की पैरंट कंपनी ने भारत के बाहर पैसा भेजा और विदेशों में निवेश किया है, जो FEMA, 1999 के प्रावधानों का उल्लंघन है।
बायजू के उत्थान से लेकर पतन की कहानी!
बायजू एक भारतीय ऐड-टेक (एजुकेशनल टेक्नोलॉजी) कंपनी है, जो किंडरगार्टन से लेकर कक्षा 12वीं तक और IIT, JEE, NEET, CAT, UPSC जैसी परीक्षाओं के लिए भी कोर्सेज उपलब्ध कराती है। बायजू की शुरुआत बीजू रवींद्रन और दिव्या गोकुलनाथ ने वर्ष 2011 में 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' के नाम से की थी। बीजू का जन्म केरल के एक छोटे से गांव अझिकोड में हुआ था। बीजू के माता-पिता शिक्षक थे। बीजू बहुत ही होनहार छात्र थे, तो उन्होंने मन लगाकर पढ़ाई की और विदेश जाकर नौकरी करने लगे।
बीजू वर्ष 2003 में फिर से भारत लौटे और शौकिया तौर पर MBA की पढ़ाई करना शुरू कर दिया और परीक्षा में बैठ गए। बीजू ने परीक्षा में 100 परसेंटाइल के साथ टॉप भी किया। यही से बीजू के दिमाग में ख्याल आया कि क्यों न वो भी पढ़ाना शुरू करें! 2007 ने बीजू ने 1-2 विद्यार्थियों को MBA की कोचिंग देना शुरू किया था, और यही गिनती 2009 में 1,000 विद्यार्थियों तक पहुंच गई। एक समय ऐसा भी आया जब उनके पास 9 शहरों से 20,000 से ज्यादा विद्यार्थी पढ़ते थे। 2009 में बीजू ने दिव्या गोकुलनाथ से शादी की।
बीजू शुरुआत से ही स्टूडेंट्स को प्रैक्टिकल नॉलेज देने पर ज्यादा ध्यान देते थे। तो उन्होंने ठाना कि अब वो बच्चों को प्रैक्टिकली समझाने के लिए कुछ ना कुछ तो उपाय निकालेंगे। इसी के चलते उनके दिमाग में एक लर्निंग ऐप लॉन्च करने का ख्याल आया।
2011 में बीजू और दिव्या ने ऐड-टेक कंपनी 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' की शुरुआत की। बीजू की यह कंपनी इतना जबरदस्त प्रदर्शन कर रही थी कि 'डेलॉइट टेक्नोलॉजी फास्ट 50 इंडिया' और 'डेलॉइट टेक्नोलॉजी फास्ट 500 एशिया पेसिफिक' रेटिंग में इनका नाम आ गया। इसी का फायदा बायजू को वर्ष 2013 में मिला, जब फंडिंग के लिए सीरीज-ए राउंड में आरिन कैपिटल ने 'थिंक एंड लर्न प्राइवेट लिमिटेड' में 9 मिलियन डॉलर निवेश किए। इन पैसों का इस्तेमाल बीजू ने अपना टैबलेट लर्निंग प्रोग्राम शुरू करने के लिए किया, जो कक्षा 8वीं से 12वीं के बच्चों और अन्य कॉम्पिटेटिव एग्जाम के लिए तैयारी कर रहे छात्रों के लिए था।बीजू
का यह दांव सटीक निशाने पर लगा और इसी का फायदा उन्होंने 2015 में उठाया, जब उन्होंने 'बायजू- द लर्निंग ऐप' लॉन्च किया। बायजू के लॉन्च होने के 3 महीने के अंदर ही उसके साथ 20 लाख से ज्यादा स्टूडेंट्स जुड़ गए। इसके बाद बायजू उसैन बोल्ट की रफ्तार से भागता रहा, 2016 में उन्हें गूगल प्ले इंडिया ने 'बेस्ट सेल्फ इंप्रूवमेंट ऐप' अवार्ड से सम्मानित किया।
वर्ष 2016 में बायजू को ₹921 करोड़ की फंडिंग भी मिली थी। 2017 में बायजू ने 'बायजूस मैथ ऐप फॉर किड्स' और 'बायजूस पैरेंट कनेक्ट ऐप' भी लॉन्च किया। वर्ष 2017 में बायजू ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान को अपना ब्रांड एंबेसडर घोषित किया, जिनकी फीस ₹4 करोड़ प्रति वर्ष थी।
वर्ष 2018 तक बायजू ऐप के 1.5 करोड़ यूजर्स थे। बायजू की तो वर्ष 2018 में चांदी हो गई, जब कंपनी की वैल्यूएशन 1 बिलियन डॉलर पहुंच गई और कंपनी एक यूनिकॉर्न बन गई। इसी के साथ कंपनी दुनिया की 'मोस्ट वैल्युएबल ऐड टेक कंपनी' भी बन गई।
ऐसा माना जाता है कि बायजू को एक दांव बहुत भारी पड़ा, और वो दांव था भारतीय क्रिकेट टीम को स्पॉन्सर करना। वर्ष 2019 में बायजू ने ओप्पो को भारतीय क्रिकेट टीम के स्पॉन्सर के रूप में रिप्लेस किया और BCCI के साथ 2022 तक 3 साल के लिए एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया। हालांकि, बाद में बायजू ने इस कॉन्ट्रैक्ट को 2023 तक एक साल के लिए और बढ़ाया। आपको बता दें कि बायजू ने भारतीय क्रिकेट टीम की जर्सी पर अपना नाम पाने के लिए लगभग ₹400-₹500 करोड़ खर्च किए। वर्ष 2021 में बायजू पेटीएम को पछाड़ते हुए भारत का सबसे ज्यादा वैल्युएबल स्टार्टअप बन गया।
लेकिन वो कहते हैं ना कि कोई चीज जितनी रफ्तार से ऊपर जाती है, उसी रफ्तार से नीचे भी आती है, ऐसा ही कुछ हुआ बायजू के साथ भी। बायजू कोरोना वायरस महामारी के बाद कुछ ज्यादा ही तेजी से विस्तार करने और अन्य कंपनियों को टेक ओवर करने के कारण कैश-फ्लो समस्या से जूझने लगा, जिसके चलते बायजू ने नवंबर 2021 में विदेशी निवेशकों से 1.2 बिलियन डॉलर का लोन लिया। वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 के बीच, सिर्फ एक साल में बायजू का घाटा ₹252 करोड़ से बढ़कर ₹4,558 करोड़ हो गया।
इतना सब कुछ होने के बाद भी बायजू ने घाटे की थोड़ी भी फिक्र ना करते हुए, 2022 में कतर में आयोजित हुए फीफा वर्ल्ड कप 2022 को 40 मिलियन डॉलर में स्पॉन्सर कर दिया। यहां तक कि उन्होंने फुटबॉलर लियोनेल मेसी को भी अपना ब्रांड एंबेसडर बना दिया, जिसके लिए उन्होंने मेसी को 5-7 मिलियन डॉलर फीस दी।
बायजू समय-समय पर कई ऐड-टेक कंपनियों का अधिग्रहण भी करता रहा, जिसमें ग्रेट लर्निंग, एपिक, आकाश, वाइटहेट जूनियर, ऑस्मों, ट्यूटर विस्टा आदि शामिल हैं। और इस सब का नतीजा बायजू की बैलेंस शीट पर भी दिखा, वित्तीय वर्ष 2021-22 में बायजू का घाटा ₹4,558 करोड़ से बढ़कर ₹8,254 करोड़ हो गया। हालांकि, वर्ष 2022 में बायजू की वैल्यूएशन 22 बिलियन डॉलर थी।
दिसंबर 2022 में बायजू को 1.2 बिलियन डॉलर का लोन देने वाले निवेशकों ने लोन का थोड़ा हिस्सा मांगना शुरू कर दिया, यह कहते हुए कि बायजू ने लोन के कॉन्ट्रैक्ट में कुछ घपला किया है। लेकिन फिर भी बायजू ने लोन नहीं चुकाया, इसके बाद लोन देने वाले विदेशी निवेशकों ने बायजू से लोन की राशि फिर से पाने के लिए कानूनी रास्ता अपनाया।
जब बायजू विदेशी निवेशकों का लोन फिर से नहीं चुका पाया तो उसने 800 मिलियन से 1 बिलियन डॉलर के बीच की अपनी दो संपत्तियां बेच दी। जून 2023 में बायजू की वैल्यूएशन 75% गिर गई। इसके बाद बायजू ने अपने कई सारे कर्मचारियों की भी छुट्टी कर दी। बायजू की हालत इस कदर खराब हो गई कि नवंबर 2023 में बीजू रवींद्रन और दिव्या गोकुलनाथ ने अपने कर्मचारियों की तनख्वाह देने के लिए अपनी निजी संपत्ति गिरवी रख दी। कई रिपोर्ट्स का मानना है कि आज की तारीख में बायजू की वैल्यूएशन 2022 के मुकाबले 99% गिरकर मात्र 225 मिलियन डॉलर रह गई है।












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