Dada Kondke: जब दादा कोंडके की फिल्म के लिए बालासाहेब ठाकरे ने थियेटर मालिक को दी थी धमकी
Dada Kondke: मराठी फिल्मों का जिक्र हो और उसमें दादा कोंडके का जिक्र न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। इनका जन्म मुंबई के मोरबाग इलाके में किराने की दुकान चलाने वाले एक परिवार में हुआ था। आपको बता दें कि लगातार 25 सप्ताह तक चलने वाली उनकी नौ फिल्मों के लिए दादा कोंडके का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज किया गया था। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक बैंड के साथ की थी।
नाटक कंपनियों के साथ काम करते हुए कोंडके ने पूरे महाराष्ट्र का दौरा किया था। जिससे उन्हें स्थानीय लोगों की पसंद को समझने में मदद मिली थी। इसके साथ ही हम आपको बता दें कि दादा कोंडके ही पहले व्यक्ति थे, जिन्होंने हिंदी सिनेमा में द्विअर्थी संवादों का चलन शुरू किया था। आज दादा कोंडके का जन्मदिन है।

ऐसे हुई दादा कोंडके और बालासाहेब ठाकरे की दोस्ती
ये वो दोनों दिग्गज हैं जिन्होंने अपने अपने क्षेत्र में महारत हासिल की थी। जहां दादा कोंडके ने मराठी सिनेमा के प्रसिद्ध कॉमेडियन के रूप में पहचान बनाई थी तो बालासाहेब ठाकरे ने अपने भाषणों और दमदार राजनीति से महाराष्ट्र की सत्ता को लंबे समय तक संभाला था। लेकिन इनकी दोस्ती के बारे में कम लोग जानते हैं।
यह उन दिनों की बात है जब दादा कोंडके का विच्छा माझी पुरी करा नाटक पूरे महाराष्ट्र में प्रसिद्ध हुआ था। इसके बाद नाटक में काम करते करते उन्होंने तांबडी माती फिल्म से मराठी फिल्म में काम करना शुरू कर दिया था। फिल्मों में काम करने के दौरान उन्होंने खुद की फिल्मों में बतौर प्रोड्यूसर भी काम करना शुरू किया। यह वह दौर था जब हिंदी सिनेमा के अलावा बाकी भाषाओं के सिनेमा घर बहुत थोड़े हुआ करते थे। उस समय दादा कोंडके ने बतौर प्रोड्यूसर अपनी पहली फिल्म सोंगड्या बनाई थी। इस फिल्म के लिए दादा कोंडके को एक भी थियेटर नहीं मिल रहा था। उन्हें फिल्मों को रिलीज करने का अनुभव भी नहीं था।
जब किसी ने नहीं की मदद तो आगे आए बालासाहेब
इस दौरान एक हिंदी फिल्म तेरे मेरे सपने रिलीज हुई थी। तब थियेटर मालिकों ने दादा कोंडके को उनकी फिल्म थियेटर में लगाने से मना कर दिया। उन दिनों बाला साहेब ठाकरे मुंबई के चहेते नेता बन चुके थे। दादा कोंडके भी अपनी फिल्म की रिलीज को लेकर हो रही दिक्कतों के चलते बाला साहेब के पास पहुंच गये।
जब दादा ने सारी बात ठाकरे को बताई तो उन्होंने कहा कि मराठी फिल्म महाराष्ट्र में नहीं चलेगी तो क्या पंजाब और गुजरात में चलेगी। इसके बाद उन्होंने दादा कोंडके को कहा कि अब हम देखते है कि कैसे थियेटर मालिक मराठी फिल्म को चलाने से मना करते हैं? इसके बाद बाला साहेब ने थियेटर मालिक से कहा कि अगर यह मराठी फिल्म नहीं लगी तो आपके सिनेमाघर में कोई दूसरी फिल्म भी नहीं चलने देंगे। इस थियेटर का नाम था कोहिनूर थियेटर। इस घटना के बाद से दादा कोंडके और बालासाहेब ठाकरे के बीच संबंध घनिष्ठ हो गए थे।
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