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Amrish Puri: अमरीश पुरी से लगता था बेटे के दोस्तों को डर, अभिनेता गोविंदा को भी जड़ दिया था थप्पड़

Amrish Puri: जा सिमरन जा जी ले अपनी जिंदगी, मोगैंबो खुश हुआ, आतंकवादियों की कभी प्रेम कहानी नहीं होती। यह अमरीश पुरी के कुछ ऐसे डायलॉग हैं, जो कभी नहीं भुलाए जा सकते। 90 के दशक के दौरान अगर बॉलीवुड में विलेन की बात हो और अमरीश पुरी का जिक्र न हो, यह बिल्कुल नामुमकिन है। भले ही वह आज हमारे बीच न हों। पर उन्होंने स्क्रीन पर हर संभव किरदार निभाया है। उनकी बेस्ट फिल्म चुनना हर किसी के लिए मुश्किल होगा क्योंकि उनकी हर फिल्म में उनका एक नया किरदार देखने को मिलता था।

अमरीश पुरी का जन्म 22 जून 1932 को पंजाब में हुआ। उनके पिता का नाम लाला निहाल सिंह और माँ वेद कौर था। अमरीश पुरी ने अपनी शुरुआती पढ़ाई पंजाब से की। उसके बाद वह शिमला चले गए। शिमला के बीएम कॉलेज से पढ़ाई करने के बाद उन्होंने थियेटर की दुनिया में कदम रखा।

Birth Anniversary of Amrish Puri were afraid of Sons friends

आसान नहीं था फिल्मी सफर

अमरीश पुरी ने 21 साल तक कर्मचारी बीमा निगम में बतौर क्लर्क काम किया था। नौकरी के साथ-साथ उन्होंने अपने एक्टर बनने के सपने को भी जिंदा रखा। वह नौकरी के साथ-साथ थिएटर भी करते थे। अमरीश पुरी के शुरुआती दिन काफी संघर्ष भरे थे। दिल-ओ-जान से मेहनत करने के बाद 41 की उम्र में अमरीश पुरी को सफलता मिली और इंडस्ट्री में पहचान भी।

हालांकि उनके भाई मदन पुरी फिल्मों में नाम कमा चुके थे। पर फिर भी अमरीश पुरी ने अपने दम पर अपनी एक अलग पहचान कायम की। 1971 में आई फिल्म रेशमा और शेरा में अमरीश पुरी की एक्टिंग ने उन्हें लाइमलाइट में ला दिया। अपनी भारी आवाज, गुस्सैल आंखें और रौबदार अंदाज ने अमरीश पुरी को बॉलीवुड का मोस्ट आइकोनिक विलेन बना दिया। उसके बाद हर तीसरी फिल्म में विलेन के रूप में उनको कास्ट किया जाने लगा था।

बेटे के दोस्तों को अमरीश पुरी से लगता था डर

खलनायक अमरीश पुरी के बारे में बहुत से किस्से हैं। उनके बेटे राजीव पुरी ने एक किस्सा शेयर करते हुए एक बार बताया था कि अमरीश पुरी की अदाकारी का असर ऐसा था कि उनके दोस्त तक उनके पिता से डरते थे। राजीव ने बताया कि मैं और मेरा पूरा परिवार उन्हें कई सालों से थिएटर करते देख चुके थे। लेकिन मेरे दोस्त जब घर आया करते थे, तब वो मेरे पिता के सामने हमेशा सहमे हुए रहते थे। इसके बाद लगातार मिलने के क्रम में मेरे दोस्त उन्हें बेहतर तरीके से समझने लगे और धीरे-धीरे उनका डर खत्म होने लगा।

राजीव ने बताया कि मेरे पिता ने कहा कि बॉलीवुड की स्थिति अच्छी नहीं है, यहां मत आओ और जो अच्छा लगता है वो करो। इसके बाद मैंने मर्चेंट नेवी में अपना करियर बनाया। राजीव ने बताया कि मैं तो फिल्मी दुनिया में नहीं आ पाया। पर मेरा बेटा हर्षवर्धन पुरी मौजूदा समय में यशराज फिल्म्स में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहा है।

मुंहमांगी रकम न मिलने पर नहीं करते थे फिल्म

अमरीश पुरी अपनी हर फिल्म में जान डाल देते थे। उनके एक एक डॉयलोग पर लोग डरे सहमे से नजर आते थे। अमरीश पुरी को बॉलीवुड का अब तक का सबसे मंहगा विलेन माना जाता है। वो एक करोड़ तक फीस चार्ज किया करते थे। वहीं अगर किसी फिल्म में उन्हें मुंहमांगे पैसे नहीं मिलते थे तो वह उस फिल्म को करने से साफ मना कर देते थे। इतनी फीस वसूलने के बारे अमरीश पुरी का कहना था कि जब मैं पर्दे पर अपना काम बखूबी करता हूं और उससे मेकर्स को काफी फायदा होता है। तो मैं फीस भी तो उसी हिसाब से ही लूंगा।

अमरीश पुरी ने हिंदी के अलावा कन्नड़, पंजाबी, मलयालम, तेलुगू और तमिल फिल्मों तथा हॉलीवुड में भी काम किया है। उन्होंने अपने पूरे करियर में 400 से ज्यादा फिल्मों में अभिनय किया। अमरीश पुरी के अभिनय से सजी कुछ मशहूर फिल्मों में निशांत, गांधी, नगीना, राम लखन, त्रिदेव, फूल और कांटे, विश्वात्मा, दामिनी, करण अर्जुन, कोयला आदि शामिल हैं। खलनायक वाली भूमिकाओं को देखने के लिए दर्शक बेहद उत्‍साहित रहते थे।

निजी जीवन में बहुत सजग थे अमरीश पुरी

अमरीश पुरी कभी भी वीडियो या ऑडियो इंटरव्यू नहीं देते थे। कुछ मौकों पर उनकी फुटेज नजर भी आती थी, पर वो शूट के दौरान की ही होती थी। वह अखबारों या मैगजीन को इंटरव्यू देते हुए भी अपनी आवाज रिकॉर्ड नहीं करने देते थे। ताकि फिल्मों में उनकी आवाज की दुर्लभता बनी रहे। वह कहते थे कि लोग उनकी आवाज को ज्यादा से ज्यादा फिल्मों में ही सुनें। इंटरव्यू लेने वाले से वह साफ कह देते थे कि प्लीज, अपना रिकॉर्डर बंद कर लीजिए। वहीं उनके करियर का एक किस्सा यूं है कि जब अमरीश पुरी 22 साल के थे तो उन्होंने एक हीरो के रोल के लिए ऑडिशन दिया था। तब प्रोड्यूसर ने उनको यह कहते हुए खारिज कर दिया कि उनका चेहरा बड़ा पथरीला सा है। इसके बाद पुरी ने रंगमंच का रुख किया।

गोविंदा को जड़ दिया था थप्पड़

ये किसी फिल्म की शूटिंग की बात नहीं है। ये सच में ऐसा हुआ था जब एकबार गुस्से में बिफरे अमरीश पुरी ने सुपरस्टार गोविंदा को थप्पड़ रसीद कर दिया था। दरअसल गोविंदा स्टार बन चुके थे और अक्सर शूटिंग के लिए देरी से आने लगे थे। एक बार शूटिंग के दौरान सुबह 9 बजे सेट पर शूट शुरू होना था। हर कोई सेट पर मौजूद था लेकिन अपनी आदत से मजबूर गोविंदा काफी देर से सेट पर पहुंचे। गोविंदा की इस हरकत पर अमरीश पुरी ने उनको जमकर डांटा और एक थप्पड़ भी लगा दिया था। इस घटना के बाद से दोनों एक्टर्स के बीच दरार आ गई थी और दोनों ने फिर कभी एकसाथ किसी फिल्म में काम नहीं किया।

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