Bihar Development: मोदी के एजेंडे में बिहार का विकास

बिहार को लेकर केंद्र की मोदी सरकार काफी गंभीर है। देश को आर्थिक महाशक्ति बनाने में जिन राज्यों का प्रदर्शन कमजोर साबित हो रहा है, उनमें बिहार प्रमुख है। 11 करोड़ से अधिक लोगों की आबादी वाले बिहार में अभी भी पलायन, बेरोजगारी, खराब इंफ्रास्ट्रक्चर और कमजोर औद्योगिक एवं कृषि उत्पादन मुख्य समस्याओं में सम्मिलित हैं।

राजनीतिक रूप से बेहद जागरूक राज्य होने के बावजूद बिहार आर्थिक रूप से कमज़ोर बना हुआ है। प्रधानमंत्री मोदी देश की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन करने का लक्ष्य अगले दो साल में प्राप्त कर लेना चाहते हैं, वह इसमे बिहार के सहयोग को भी बढ़ाना चाहते हैं।

Bihar Development: Development of Bihar in Modis agenda

बिहार में अभी भी लगभग 75 प्रतिशत लोग आजीविका के लिए मुख्य रूप में कृषि पर ही निर्भर हैं। हालांकि खनन और विनिर्माण के क्षेत्रों में भी कुछ प्रगति हुईं है, फिर भी प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार कई राज्यों से पीछे है। राज्य का एक बड़ा हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे रहता है। बिहार के नीति निर्माताओं ने बिहार में बाहर के निवेशकों को आकर्षित करने की भी खूब कोशिश की, लेकिन कई चुनौतियों के आड़े आने के कारण बिहार की आर्थिक समृद्धि में निजी निवेश का योगदान बहुत अधिक नहीं है।

सरकार एनडीए की हो या महागठबंधन की, मोदी सरकार ने बिहार को अपने एजेंडे में सबसे ऊपर रखा है। बिहार की आर्थिक गतिविधियों का पहिया तेज चलाने के लिए केंद्र ने दर्जनों परियोजनाएं यहाँ शुरू की है। रेल, सड़क, पेट्रोलियम, उड्डयन, ऊर्जा और जल जैसे केन्द्रीय मंत्रालयों की परियोजनाएं बिहार में चल रही हैं।

बिहार के लिए केन्द्रीय खजाना खोला
मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के गठन के बाद से ही बिहार के लिए केन्द्रीय खजाने का मुंह खोल दिया गया है। 2009-2014 के बीच, बिहार को केवल 50,000 करोड़ रुपये दिए गए थे, लेकिन 2014-2019 तक मोदी सरकार ने राज्य को एक लाख करोड़ रुपए से अधिक दिए।

2019 में दुबारा प्रधानमंत्री बनने के बाद भी नरेंद्र मोदी ने बिहार को विशेष बजट देने में कोताही नहीं बरती। अकेले भारतमाला प्रोजेक्ट के तहत केंद्र बिहार में 44,950 करोड़ रुपये खर्च कर रहा है। उल्लेखनीय है कि भारतमाला प्रोजेक्ट देश के 550 जिलों से होकर जाने वाला है।

केंद्र ने 'नमामि गंगे' योजना और 'अमृत' योजना के तहत कई परियोजनाएं दी, उनमें पटना शहर के बेउर और करम-लीचक में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के साथ सीवान और छपरा में पानी से संबंधित परियोजनाएं शामिल थीं। इसके अलावा मुंगेर और जमालपुर में जलापूर्ति परियोजनाओं और मुजफ्फरपुर में नमामि गंगे के तहत रिवर फ्रंट डेवलपमेंट योजना भी शामिल है।

बिहार में अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने वाली मेगा परियोजनाएं
केंद्र सरकार ने कई ऐसी परियोजनाओं की सौगात बिहार को दी है, जिससे बिहार के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को नई गति मिल सकती है, जिनमें औरंगाबाद-दरभंगा-जयनगर एक्सप्रेसवे शामिल है, जो कि 230 किमी लंबा ग्रीन फील्ड प्रोजेक्ट है। यह एन एच-2 से एन एच -57 के बीच उत्तर-बिहार से दक्षिण बिहार के बीच की दूरी कम करेगी।

इसके साथ ही पटना-कोलकाता एक्सप्रेसवे का भी निर्माण हो रहा है। इससे देवघर का बिहार और बंगाल से संपर्क जुड़ जाएगा। रक्सौल हल्दिया पोर्ट एक्सप्रेसवे के तहत रक्सौल को पटना के रास्ते कोलकाता से जोड़ने वाला आठ लेन का मोटरमार्ग बन रहा है। बक्सर-भागलपुर एक्सप्रेस-वे के जरिए दक्षिण बिहार के लोगों को उत्तर प्रदेश और दिल्ली से जुड़ने और कम समय में दूरी तय करने में सुगमता हो जाएगी।

गंगा एक्सप्रेसवे के तहत गंगा नदी के किनारे प्रस्तावित 1,047 किमी लंबा, 6 लेन एक्सप्रेसवे का काफी हिस्सा बन चुका है, जो उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से लेकर बिहार के बक्सर तक को जोड़ रहा है। इसी तरह कोशी एक्सप्रेसवे 296 किमी लंबा, 4 लेन एक्सप्रेसवे है जो पटना को बिहारशरीफ, पावापुरी, राजगीर, नालंदा, बिहारीगंज और मधेपुरा के माध्यम से फोर्ब्सगंज से जोड़ रहा है। इसके अलावा पटना मेट्रो, पटना हवाई अड्डा विस्तार और एम्स दरभंगा भी ऐसी परियोजनाएं हैं, जिसके कारण बिहार की दशा और दिशा बदल सकती है।

गावों की दशा सुधारने पर मोदी का जोर
प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के सबसे प्रभावित वर्ग में आत्मविश्वास लाने और उनकी बुनियादी सुविधाओं को बहाल करने के विशेष प्रयास जारी हैं। पिछले 4-5 वर्षों में मिशन अमृत और राज्य सरकार की योजनाओं के तहत बिहार के शहरी क्षेत्रों में लाखों परिवारों को पीने का पानी उपलब्ध कराया गया है। आने वाले वर्षों में बिहार, देश के उन राज्यों में शामिल होगा, जहां हर घर में पाइप से जलापूर्ति होगी।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण रोजगार अभियान के तहत बिहार के ग्रामीण इलाकों में प्रवासी श्रमिकों के 57 लाख से अधिक परिवारों को पानी का कनेक्शन उपलब्ध कराया गया है। यही नहीं, बिहार में 100 से अधिक नगर निकायों में 4.5 लाख से अधिक एलईडी स्ट्रीट लाइटें लगायी गयी हैं।

राज्य के लगभग 20 बड़े और महत्वपूर्ण शहर गंगा नदी के किनारे स्थित हैं। नदी की स्वच्छता के लिए प्रधानमंत्री ने बिहार में 6000 करोड़ रुपये से अधिक की 50 से अधिक परियोजनाओं को हरी झंडी दी है। गंगा किनारे के गांवों को भी 'गंगा ग्राम' के रूप में विकसित किया जा रहा है।

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