भूटान में सदियों से चली आ रही है राजा की परंपरा, एक ही परिवार के वारिस को मिलती है राज गद्दी
भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक अपनी पत्नी रानी जेटसन पेमा वांगचुक और बेटे जिग्मे नमाग्याल वांगचुक के साथ चार दिवस की भारत यात्रा पर आए हैं। राजा और रानी ने अपने पहले ही दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की लेकिन इस मुलाकात की पूरी लाइमलाइट नन्हें राजकुमार ले गए।
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नई दिल्ली। भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक अपनी पत्नी रानी जेटसन पेमा वांगचुक और बेटे जिग्मे नमाग्याल वांगचुक के साथ चार दिवस की भारत यात्रा पर आए हैं। राजा और रानी ने अपने पहले ही दिन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की लेकिन इस मुलाकात की पूरी लाइमलाइट नन्हें राजकुमार जिग्मे नमाग्याल ले गए। जिग्मे नमाग्याल वांगचुक परिवार के अगले वारिस हैं और आने वाले सालों में भूटान की कमान उन्हीं के हाथों में आएगी। पड़ोसी देश में राजा के सत्ता संभालने की परंपरा सालों से चली आ रही है। आइए आपको बताते हैं भूटान के बारे में और कुछ रोचक बातें...

भूटान में चलता है 'डुअल सिस्टम ऑफ गवर्नमेंट'
भूटान में डुअल सिस्टम ऑफ गवर्नमेंट चलता है। यहां लोगों द्वारा चुनी हुई सरकार और प्रधानमंत्री भी हैं लेकिन साथ ही देश का राजा भी होता है। ये राजा, जिसे ड्रुक ग्याल्पो भी कहा जाता है, ही सबसे ऊपर होता है और प्रधानमंत्री भी इनके नीचे आते हैं। 2008 के कानून के अनुसार, ड्रुक ग्याल्पो देश का प्रधान होता है। फिलहाल भूटान की गद्दी पर जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक विराजमान हैं।

वांगचुक परिवार के वारिस को मिलती है देश की कमान
वांगचुक परिवार सदियों से इस पद पर आसीन हैं। दक्षिणी एशिया में पड़ने वाले इस देश को उसका पहला राजा साल 1862 में मिला था। तब वांगचुक परिवार के उग्येन ने देश की सत्ता को संभाला था। इसके बाद से इसी परिवार के वारिस को देश की कमान सौंपी जा रही है। उग्येन के बाद उनके बेटे जिगमे ने देश की सत्ता संभाली।

सभी के चहेते हैं जिग्मे खेसर नामग्याल
जिग्मे के बाद कमान संभालने की बारी उनके बेटे की आई। उन्होंने अपने बेटे का नाम जिग्मे डोरजी रखा और इसके बाद सभी ने अपने नाम के आगे जिग्मे लगाना शुरू कर दिया। जिग्मे डोरजी, जिग्मे सिंग्ये और अब जिग्मे खेसर नामग्याल। भूटान के राजा जिग्मे खेसर ने अपने बेटे का नाम जिग्मे नमाग्याल वांगचुक रखा है जो अभी केवल 1 साल के हैं।

जब जिग्मे खेसर के दादा ने की थी नेहरू से मुलाकात
भारत और भूटान के रिश्ते अभी से नहीं, बल्कि सालों से हैं। जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक ने जहां देश के 14वें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की, वहीं उनके दादा यानि जिग्मे डोरजी वांगचुक ने देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु से मुलाकात की थी। ये मुलाकात साल 1954 में हुई थी। चारों तरफ से घिरे इस छोटे से देश के पास अपनी नौसेना नहीं है। वहीं भारत अपनी वायुसेना से भूटान की रक्षा करता है।

भूटान में 2008 में हुआ था पहला चुनाव
भूटान में पहला चुनाव साल 2008 में हुआ था। इससे पहले वहां राजा का ही शासन चलता था। इस पहले चुनाव में केवल दो पार्टियों ने हिस्सा लिया था, भूटान पीस एंड प्रॉसपैरिटी पार्टी और पीपल्स डेमोक्रैटिक पार्टी। अब तक वहां दो बार चुनाव हो चुके हैं। भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग तोबगे भी कई बार भारत की यात्रा पर आ चुके हैं।

खुशी के स्तर से जीवन स्तर नापने वाला पहला देश
भूटान दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है जो जीवन स्तर को जीडीपी नहीं, बल्कि ग्रॉस नेशनल हैप्पीनेस यानि खुशी के स्तर से नापता है। ये कॉन्सेप्ट राजा जिगमे सिंग्याए वांगचुक लेकर आए थे ताकि भूटान को दुनिया का सबसे खुशी देश बनाया जाए। भूटान में खुश रहने वालों की संख्या भारत से भी ज्यादा है। ये देश अपनी संस्कृति को बचाने के लिए दुनिया से काफी समय तक कटा रहा। भूटान की सरकार देश में पर्यटन को बढ़ावा तो देती है लेकिन उसके साथ ही उनकी संख्या को सीमित रखती है।

अपनी संस्कृति को बचाने के लिए भूटान ने उठाए कड़े कदम
भूटान में इंटरनेट, टीवी और स्मार्टफोन को भी काफी समय बाद इजाजत दी गई। भूटान ने अपने हरे-भरे जंगलों को बचाने के लिए भी काफी कड़े कानून बनाए हुए हैं। जहां भारत आज भी प्लास्टिक थैलियों पर रोक नहीं लगा पा रहा है वहीं भूटान में ये 1999 से ही बैन हैं। अपने जंगलों की रक्षा के लिए भूटान ने कानून बनाया है कि देश के 60 फीसदी हिस्से में जंगल होना चाहिए। भूटान दुनिया का पहला कार्बन नेगेटिव देश भी है। मतलब ये जितना कार्बन डाईऑक्साइड बनाता है, उससे ज्यादा अवशोषित करता है।
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