6G की रेस में शामिल हुआ भारत, जानें क्या है यह टेक्नोलॉजी
भारत में 5G सर्विस लॉन्च हुए 6 महीने भी नहीं बीते कि 6G की बात की जा रही है। पीएम मोदी ने 6G का विजन डॉक्यूमेंट लॉन्च किया है। साथ ही, इसके लिए टेस्ट बेड और रिसर्च सेंटर का भी उद्धाटन किया है।

6G In India:पूरी दुनिया में सबसे तेजी से 5G सर्विस रोल आउट करने वाला देश भारत बन गया है। पिछले साल अक्टूबर में पीएम नरेन्द्र मोदी ने भारत में 5G सर्विस लॉन्च की थी। सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों को मार्च 2023 तक देश के कम से कम 200 शहरों तक 5G सेवा पहुंचाने का लक्ष्य दिया था। रिलायंस जियो और भारती एयरटेल ने अब तक 500 से ज्यादा शहरों में फिफ्थ जेनरेशन सर्विस को लॉन्च कर दिया है। यही नहीं, भारत ने अब 6G अर्थात सिक्स्थ जेनरेशन टेक्नोलॉजी की तैयारी भी शुरू कर दी है।
पिछले सप्ताह पीएम मोदी ने 6G का विजन डॉक्यूमेंट लॉन्च किया। साथ ही, इस अपकमिंग टेलीकॉम सर्विस के लिए टेस्ट बेड और इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन के लिए इनोवेशन सेंटर और एरिया ऑफिस का भी उद्धाटन किया। इंटरनेशनल टेलीकॉम यूनियन (ITU) के लिए रिसर्च और इनोवेशन सेंटर के उद्धाटन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि भारत में 5G सेवा शुरू होने के महज 6 महीनों के बाद ही हम 6G पर बात कर रहे हैं, यह भारत के दृढ़ आत्मविश्वास को दर्शाता है। भारत में सबसे तेजी से 5G रोल आउट हो रहा है। 6 महीनों के अंदर ही देश के 350 से ज्यादा शहरों में 5G सेवा शुरू हो चुकी है।
6G सर्विस का विजन डॉक्यूमेंट पेश करने के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि यह टेस्ट भारत के डिजिटल इंडिया (Digital India) मिशन को और ताकत देगा। यह नेक्स्ट जेनरेशन टेलीकॉम टेक्नोलॉजी मौजूदा डिजिटल टेक्नोलॉजी को मजबूती प्रदान करेगी। पिछले 9 साल में सरकारी और प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों ने देश में 25 लाख किलोमीटर लंबा ऑप्टिकल फाइबर का जाल बिछाया है। 2 लाख से ज्यादा ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर से जोड़ा जा चुका है। इसके अलावा 5 लाख कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) के जरिए लोगों को डिजिटल सर्विस प्रदान किया जा रहा है।
कैसे काम करती है 5G टेक्नोलॉजी?
5G जिसे पांचवीं जेनरेशन भी कहा जाता है। यह एक वायरलेस कनेक्टिविटी है, जिसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम यानी रेडियो तरंगों का इस्तेमाल होता है। यह नयी जेनरेशन की टेलीकॉम टेक्नोलॉजी है, जिसमें पुरानी सभी जेनरेशन यानी 1G, 2G, 3G और 4G (LTE) के मुकाबले ज्यादा तेजी से रेडियो तरंगों का आदान-प्रदान होता है। तकनीकी भाषा में इसे MIMO यानी मल्टीपल इनपुट और मल्टीपल आउटपुट कहा जाता है। मौजूदा 5G टेक्नोलॉजी 4G LTE (लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन) का अपग्रेडेड वर्जन है। यह लो, मिड और हाई फ्रिक्वेंसी बैंड्स पर काम करता है। इन तीनों बैंड्स की अपनी-अपनी खूबियां और नुकसान हैं।
लो फ्रिक्वेंसी बैंड्स में 600 से लेकर 2300 मेगाहर्ट्ज तक की रेडियो फ्रिक्वेंसी शामिल हैं, जो 4G स्पेक्ट्रम बैंड्स की तरह ही है। वहीं, मिड फ्रिक्वेंसी बैंड की बात करें तो यह 3300 मेगाहर्ट्ज की होती है। जबकि हाई फ्रिक्वेंसी बैंड 26 गीगाहर्ट्ज की होती है।
क्या है NSA और SA?
5G नेटवर्क दो तरह के होते हैं, जिनमें एनएसए (NSA) और एसए (SA) शामिल हैं। एनएसए में मौजूदा 4G नेटवर्क के इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल करके 5G सेवा को शुरू किया जाता है। फिलहाल दुनियाभर की ज्यादातर टेलीकॉम कंपनियां एनएसए यानी नॉन-स्टैंड अलोन 5G सर्विस रोल आउट कर रही है। भारत में एयरटेल ने भी एनएसए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके 5G सेवा शुरू की है।
वहीं, एसए यानी स्टैंड अलोन 5G नेटवर्क वास्तव में लॉन्ग टर्म इवोल्यूशन (LTE) का अपग्रेडेड वर्जन है, जिसमें टेलीकॉम कंपनियों को 5G सेवा शुरू करने के लिए अलग से इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना पड़ता है। यह 5G सर्विस ज्यादा खर्चीला होता है और एनएसए के मुकाबले ज्यादा स्पीड में इंटरनेट एक्सेस करने की सहूलियत देता है। भारत में रिलायंस जियो एसए यानी स्टैंड अलोन 5G नेटवर्क मुहैया करा रहा है।
6G क्या है?
5G की तरह ही 6G को छठी जेनरेशन की वायरलेस टेक्नोलॉजी कहा जाता है। यह भी 5G की तरह ही रेडियो तरंगों पर काम करेगा, लेकिन फिलहाल इस टेक्नोलॉजी का कोई आस्तित्व नहीं है। 2018 में 5G सर्विस कमर्शियल तरीके से लॉन्च करने के बाद इसके अगले जेनरेशन पर रिसर्च शुरू हो गया था।
6G में 5G के मुकाबले बड़ा अपग्रेड देखने को मिलेगा। जिस तरह से 5G में कई तरह के नेटवर्क को एक साथ लाने की क्षमता है वैसे ही 6G में भी यह क्षमता होगी, लेकिन 5G टेक्नोलॉजी में सभी तरह के नेटवर्क अपने आप शामिल नहीं होते हैं। जबकि 6G नेटवर्क में यह काम ऑटोमैटिक तरीके से होगा। इसमें 5G के मुकाबले 10 गुना तेजी से डेटा शेयर करने की क्षमता होगी।
6G के लिए भारत ने टेस्ट बेड लॉन्च किया है, जिसका मतलब है कि भारत में भी इस अगली जेनरेशन की टेलीकॉम टेक्नोलॉजी के लिए रिसर्च किया जाएगा। इस टेक्नोलॉजी पर सबसे पहले दक्षिण कोरिया और जापान में रिसर्च शुरू किया गया था। अब इस लिस्ट में भारत का नाम भी शामिल हो गया है।
6G कब तक लॉन्च होगी?
6G टेक्नोलॉजी के लिए अमेरिका, यूरोपीय यूनियन, रूस, चीन, सिंगापुर और अरब अमीरात ने रिसर्च करना शुरू कर दिया है। टेक्नोलॉजी कंपनियों की बात करें तो भारती एयरटेल, अंत्रिसू, एप्पल, एरिक्सन, फ्लाई, हुआवे, रिलायंस जियो, कीसाइट, एलजी, नोकिया, एनटीटी डोकोमो, सैमसंग, वोडाफोन-आइडिया, शाओमी ने भी संभावनाएं तलाशनी शुरू कर दी हैं।
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इन कंपनियों के साथ टेक्नोलॉजी इनोवेशन इंस्टीट्यूट और इंटरयूनिवर्सिटी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक सेंटर मिलकर रिसर्च कर रहे हैं। पिछले दिनों आई रिपोर्ट के मुताबिक, 6G को 2028 तक व्यावसायिक तौर पर लॉन्च किया जा सकेगा। यह टेक्नोलॉजी एडवांस आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग पर काम करेगी।
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