Article 356: राज्य सरकारों को भंग करने में कौन से प्रधानमंत्री रहे अधिक बदनाम?
दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गिरफ्तारी के बाद विपक्ष यह कहने लगा है कि मौजूदा केंद्र सरकार गैर बीजेपी दलों की सरकार को चलने नहीं देना चाहती। इसके पहले झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी इस्तीफा देना पड़ा था जब उन्हें जमीन घोटाले में गिरफ्तार किया गया था।

लोकसभा चुनाव 2024 से पहले विपक्षी दलों के इंडी गठबंधन के दो अहम सहयोगी दलों के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ इस कारवाई को उनके द्वारा लोकतंत्र के खिलाफ कारवाई बताया जा रहा है। लेकिन क्या पहली बार किसी केंद्र सरकार ने राज्यों की चुनी हुई सरकार के खिलाफ कोई कारवाई की है, या पहले भी इसके कई उदाहरण मौजूद हैं?
क्या है केंद्र का रुख?
केंद्र सरकार की ओर से भ्रष्टाचार के इन दोनों ही मामलों में 'कानून अपना काम कर रहा है' जैसे बयान सामने आए हैं। हालांकि, संविधान में केंद्र के पास यह अधिकार है कि किसी संवैधानिक संकट की स्थिति में चाहे तो राज्य की चुनी हुई सरकार को बर्खास्त कर सकता है।
भारतीय संविधान में राष्ट्रपति को यह शक्ति मिली हुई है। केंद्र राज्यपाल की सिफारिश पर ऐसा कर सकता है। यदि कोई राज्य सरकार संविधान में तय नियमों (उपबंधों) के मुताबिक नहीं चलती तो राष्ट्रपति आर्टिकल 356 के अंतर्गत राज्य के मुख्यमंत्री को हटाकर मंत्रिमंडल भंग कर सकते हैं, और संसद को संबंधित राज्य विधायिका की शक्तियों का प्रयोग करने के लिए कह सकते हैं। राष्ट्रपति इसके अलावा भी बहुत सारे संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इस संवैधानिक परिस्थिति को राष्ट्रपति शासन कहते हैं। इसमें राज्यपाल ही रोजाना के प्रशासन के प्रति जिम्मेदार होते हैं।
आर्टिकल 356 का पहली बार दुरुपयोग
संविधान के जानकार बताते हैं कि असल में इन खास परिस्थितियों के दौरान राज्य की सत्ता की डोर केंद्र सरकार के हाथों में होती है। इसलिए विपक्ष सबसे ज्यादा प्रधानमंत्री पर ही जुबानी हमले करता है। साल 1951 में पंजाब में आर्टिकल 356 का सबसे पहला इस्तेमाल हुआ था।
देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के शासन में 20 जून 1951 को आर्टिकल 356 का सबसे पहला इस्तेमाल पंजाब में किया गया था। तब पंजाब विधानसभा को 302 दिनों तक निलंबन में रखा गया था। हालांकि, केरल में 1959 में लोकतांत्रिक तरीके से कांग्रेस को हराकर चुनी गई देश की पहली कम्युनिस्ट सरकार को विधानसभा में स्पष्ट बहुमत होने के बावजूद बर्खास्त करने की घटना की सबसे ज्यादा चर्चा हुई थी।
कहा जाता है कि केरल के पहले कम्युनिस्ट सीएम ईएमएस नंबूरीपाद को नेहरू पसंद नहीं करते थे। इसलिए कथित मुक्ति संग्राम के बहाने केरल में उनकी बहुमत वाली सरकार बर्खास्त कर दी गई। तब इसका चारों ओर काफी विरोध हुआ था।
कब हुआ आर्टिकल 356 का सबसे ज्यादा इस्तेमाल
देश में 1970 और 1980 के दशक में केंद्र की विभिन्न सरकारों ने विपक्ष की सरकारों को गिराने के लिए आर्टिकल 356 का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया था। देश में आपातकाल लगाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर आर्टिकल 356 के सबसे ज्यादा दुरुपयोग का आरोप लगता है। इसके पीछे उनके बेटे संजय गांधी की राजनीतिक दखल का जिक्र भी किया जाता है। वरिष्ठ पत्रकार कुलदीप नैयर ने अपनी किताब 'इमरजेंसी की इनसाइड स्टोरी' में इसका विस्तार से उल्लेख किया है।
इंदिरा गांधी ने किया सर्वाधिक राज्य सरकारों को भंग
प्रधानमंत्रियों के शासन काल में आर्टिकल 356 लगाकर राज्य सरकारों को भंग करने के रिकॉर्ड की बात करें तो पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कार्यकाल के नाम आपातकाल के अलावा राज्यों की चुनी हुई सरकारों को बर्खास्त कर सबसे अधिक बार राष्ट्रपति शासन लगाने का भी रिकॉर्ड है। उन्होंने 22 महीने के राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान चार बार और कुल 48 बार आर्टिकल 356 का इस्तेमाल किया। आपातकाल के बाद 1977 में मोरारजी देसाई ने पहली गैर-कांग्रेसी गठबंधन सरकार बनाई। उनके शासन में भी नौ कांग्रेस-शासित राज्यों सहित 13 राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
चौधरी चरण सिंह के नेतृत्व में जनता पार्टी सरकार ने 1979 में चार बार राष्ट्रपति शासन लागू किया। 1980 में पीएम के रूप में इंदिरा गांधी की वापसी हुई तो कांग्रेस सरकार ने जवाबी कार्रवाई की और विपक्षी पार्टी की सरकारों वाले नौ राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाया। पीवी नरसिंहा राव और डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल में 11-11 बार राज्यों की सरकार गिराई गई। अयोध्या में बाबरी ढांचा विध्वंस के बाद पीएम नरसिंहा राव ने उत्तर प्रदेश समेत चार राज्यों में बहुमत वाली भाजपा सरकारों को बर्खास्त कर दिया था।
जवाहर लाल नेहरू के समय आठ, राजीव गांधी के समय 6, अटल बिहारी वाजपेयी के दौर में 5, चंद्रशेखर के समय 4, लाल बहादुर शास्त्री और वीपी सिंह के वक्त दो-दो बार और एचडी देवेगौड़ा के पीएम रहते एक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाया गया था।
पीएम मोदी के दो कार्यकाल में 10 बार आर्टिकल 356
साल 2014 में प्रधानमंत्री बने और दो कार्यकाल पूरा कर चुके नरेंद्र मोदी के समय में 10 बार आर्टिकल 356 का इस्तेमाल किया गया है। पीएम मोदी ने संसद में बीते साल 2023 में संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में दिए अपने भाषण में इसका जिक्र करते हुए कहा था कि कांग्रेस ने 90 बार क्षेत्रीय और विपक्षी सरकारों को गिराया था। इसमें सबसे ज्यादा बार इंदिरा गांधी ने राज्य सरकारें गिराई थीं।
नए राज्यों में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में नहीं भंग हुई सरकार
ऐतिहासिक तथ्यों के मुताबिक देश में छत्तीसगढ़ और तेलंगाना को छोड़कर सभी राज्यों में अब तक 132 बार राष्ट्रपति शासन लगाया जा चुका है। इसमें केंद्र शासित प्रदेशों में 19 बार का उपराज्यपाल शासन शामिल नहीं है। सबसे ज्यादा बार बिहार, उत्तर प्रदेश, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, ओडिशा, मणिपुर और केरल में राज्य सरकारें बर्खास्त की गई हैं। पंजाब और जम्मू कश्मीर में सबसे ज्यादा समय तक राष्ट्रपति शासन रहा है।
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