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NDRF: देश के अलावा विदेशों में भी बचाव एवं राहत अभियानों में एनडीआरएफ देता है सेवा

तुर्किये में आए भयंकर भूकंप के बाद बचाव कार्य में मदद के लिए भारत सरकार ने मानवीय आधार पर एनडीआरएफ की दो टीमें वहां भेजी हैं। यह दल मलबे में फंसे लोगों को बचाने सहित तुर्किये के प्रशासन को हरसंभव सहायता प्रदान करेगा।

Apart from the country, NDRF provides service in rescue and relief operations abroad.

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स अर्थात एनडीआरएफ) नागरिक सुरक्षा पुलिस बल है। इसका गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत खतरनाक आपदा स्थिति से निपटने के लिए एक भारतीय विशेष बल के रूप में हुआ था। यह बल किसी भी आपातकालीन या आपदा से निपटने में सक्षम है। यह अपनी विशेष ट्रेनिंग के दम पर बाढ़, तूफान, भूकंप जैसी हर प्राकृतिक आपदा में पीड़ितों की सहायता करता है।

एनडीआरएफ, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधीन आता है। एनडीआरएफ के प्रमुख को महानिदेशक के रूप में नामित किया जाता है। जोकि भारतीय पुलिस संगठनों से प्रतिनियुक्ति पर आईपीएस अधिकारी होता है। इसमें 12 बटालियन की पैरामिलिट्री लाइंस फोर्स होती है, जिसमें बीएसफ, सीआरपीएफ, सीआईएसएफ, आईटीबीपी और एसएसबी के जवान शामिल होते हैं। इस बल का आदर्श वाक्य 'आपदा सेवा सदैव सर्वत्र' होता है, जिसका अर्थ है सभी परिस्थितियों में सभी जगह सेवा करना।

लाखों लोगों के लिए बना संकट मोचन
17 वर्षों में एनडीआरएफ ने देश और विदेश में अभी तक 2095 अभियान चलाए हैं। इनमें आपदाओं में घिरे 114,492 लोगों की जानें बचाई गयी हैं। बाढ़ एवं अन्य आपदाओं से घिरे 552,857 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया हैं। साथ ही 3,352 शवों को भी मलबे और बाढ़ के पानी से निकाला है।

इसके अलावा इस बल ने देश और दुनियाभर में आपात स्थितियों में फंसे 8 लाख से अधिक लोगों को आपदाग्रस्त क्षेत्र से निकालने का काम भी किया हैं। 2010 के दौरान मायापुरी, दिल्ली में कोबाल्ट-60 रेडियोलॉजिकल को पुनः प्राप्त करने में एनडीआरएफ का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

एनडीआरएफ के अहम मिशन
16 जून 2013 को केदारनाथ में भारी बारिश और बाढ़ की भयंकर आपदा के कारण 4,400 से अधिक लोग मारे गए अथवा लापता हो गए थे। मंदाकिनी नदी की उफनती लहरों में रामबाड़ा का अस्तित्व समाप्त हो गया, लेकिन एनडीआरएफ ने इस त्रासदी में बड़ा राहत अभियान चलाया और केदारनाथ में कई यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।

सितम्बर 2014 में, मूसलाधार मानसूनी वर्षा के कारण आई बाढ़ से जम्मू और कश्मीर राज्य के 450 गांव पूरी तरह से डूब गए थे। जिसके बाद एनडीआरएफ ने 184,000 से भी ज्‍यादा लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इस दौरान एनडीआरएफ ने पीड़ित लोगों तक टेंट, खाद्य पदार्थ और पेयजल भी पहुंचाए थे।
विशाखापत्तनम में आए 2014 के हुदहुद तूफान ने दक्षिण भारत में बड़ी तबाही मचाई थी। इस तूफान का अलर्ट जारी होते ही एनडीआरएफ की 44 टीमें शहर और अन्य प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हो गई थी। इनमें 2000 से ज्यादा बचाव कर्मी और 220 से अधिक नौकाएं शामिल रही थीं।

जापान और नेपाल में भी बचाई जिंदगियां
2011 में जापान में आए भूकंप, सुनामी और न्यूक्लियर रिएक्टर डिजास्टर (ट्रिपल डिजास्टर) ने सबकुछ लगभग समाप्त कर दिया था। इस दौरान 19 हजार से ज्यादा लोगों की मौत के साथ ही संपत्ति का भी भारी नुकसान हुआ। फिर भी, माइनस 2 डिग्री के तापमान में काम करते हुए एनडीआरएफ ने मलबे में पीड़ितों की खोज सहित राशन बांटने में भूमिका निभाई। जापान में इस दौरान राशन की कमी हो गयी थी, इसलिए एनडीआरएफ टीम के सदस्यों ने राशन बचाने के लिए दिन में एक बार ही खाना खाया।

साल 2015 में आये एक विनाशकारी भूकंप ने पर्वतीय देश नेपाल में तबाही मचा दी थी। नेपाल की कई ऐतिहासिक इमारतों को भी इसमें नुकसान पहुंचा। भारत सरकार ने पड़ोसी देश की मदद के लिए ऑपरेशन मैत्री के तहत एनडीआरएफ की टीमें भेजी। जिसके बाद एनडीआरएफ के जवानों ने ऑपरेशन चलाकर कई पीड़ितों को मलबे से बाहर निकालकर उन्हें जीवित बचाया।

सार्क देशों में एनडीआरएफ की भूमिका
अन्य देशों के सुरक्षा बलों को समय-समय पर भारत का एनडीआरएफ आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देता है। जिसके कारण हाल ही के वर्षों में सार्क देशों में भारत एक आपदा प्रबंधन कर्मियों के प्रशिक्षण का केंद्र बन गया है।

देश में एनडीआरएफ की तैनाती
एनडीआरएफ के 12 ऑपरेशनल बटालियन देश के अलग अलग क्षेत्रों जैसे, गुवाहाटी (असम), कोलकाता (पश्चिम बंगाल), मुंडली (ओडिशा), अराकोनम (तमिलनाडु), पुणे (महाराष्ट्र), वडोदरा (गुजरात), गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), भटिंडा (पंजाब), पटना (बिहार), विजयवाड़ा (आंध्र प्रदेश), वाराणसी (उत्तर प्रदेश) और इटानगर (अरुणाचल प्रदेश) में स्थित हैं।

एनडीआरएफ की कुछ खास बातें
एनडीआरएफ की 12 बटालियनों में, हर एक में 1,149 कर्मी होते हैं। 9 संवेदनशील क्षेत्रों के अलावा अन्य शहरों में 28 क्षेत्रीय केंद्र हैं। हर बटालियन में 18 विशेषज्ञों की टीम होती है।

एनडीआरएफ के पास हर तरह की आपदाओं से निपटने के लिए इंटरनेशनल स्टैण्डर्ड के 310 तरह के उपकरण हैं। कड़ी ट्रेनिंग और उपकरण के कारण आज यह बल गहरे समुद्र और आग की घटनाओं को छोड़कर बाढ़, चक्रवातों और मलबे से बचाव कार्य, रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु चुनौतियों का सामना करने में भी काफी विशेषज्ञता हासिल कर चुका है।

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