Air Pollution: भारतीय शहरों की ‘हवा’ हुई पहले से साफ, फिर भी देश के 39 शहरों की स्थिति खराब
iQAir ने पिछले दिनों एक डेटा जारी किया है, जिसमें दुनिया के सबसे दूषित वातावरण वाले शहरों के नाम शामिल हैं। दुनिया के 50 सबसे प्रदूषित वातावरण वाले शहरों में से कई शहर भारत के हैं।

पिछले सप्ताह iQAir ने एक डेटा जारी किया था, जिसमें दुनिया के 50 सबसे ज्यादा प्रदूषित आब-ओ-हवा वाले शहरों की सूची जारी की गई। इस लिस्ट में शामिल सबसे दूषित हवा वाले 50 शहरों में से 39 शहर भारत के हैं। हालांकि, इनमें से ज्यादातर शहरों की एयर क्वालिटी साल 2021 के मुकाबले बेहतर हुई है।
सालाना औसत क्या कहता है
भारत के सबसे दूषित एयर क्वालिटी वाले शहरों में भिवानी सबसे ऊपर है। दिल्ली-एनसीआर के पास बसे इस शहर का 2022 में एवरेज PM 2.5 लेवल 92.7 रहा है, जो 2021 के 106.2 के मुकाबले कम है। वहीं, देश के सबसे दूषित वायु वाले शहरों में देश की राजधानी दूसरे नंबर पर है। एयर क्वालिटी के लिहाज के दिल्ली दुनिया का चौथा सबसे प्रदूषित शहर है। दिल्ली का PM 2.5 लेवल साल 2022 में औसतन 92.6 रहा है, जो 2021 में 96.4 था। देश की राजधानी दिल्ली की एयर क्वालिटी में भी मामूली सुधार हुआ है।
iQair की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में बिहार का दरभंगा तीसरे नंबर पर है। दरभंगा का PM 2.5 लेवल औसतन 90.3 रहा है, जबकि 2021 में यह 175.9 था।
बिहार की राजधानी पटना और मुजफ्फरपुर के बाद दरंभगा राज्य का सबसे बड़ा शहर है। हालांकि, दरभंगा में कोई इंडस्ट्री नहीं है फिर भी दरभंगा का नाम देश के तीसरे और दुनिया के छठे सबसे प्रदूषित शहरों में नाम होना चौंकाने वाली बात है। दरभंगा के अलावा देश के कई और छोटे शहरों के नाम दुनिया के 50 सबसे दूषित हवाओं वाले शहरों की लिस्ट में शामिल हैं, जिनमें छपरा, मुजफ्फरपुर, ग्रेटर नोएडा, धारूहेड़ा आदि के नाम हैं।
क्या स्थिति है भारत के अन्य शहरों की
भारत के बड़े यानी मैट्रो शहरों की बात करें तो राजधानी दिल्ली का ग्लोबल रैंक 4 है। इसके अलावा कोलकाता की रैंक 99 है और यहां PM 2.5 का लेवल 50.2 है। जबकि मुंबई की रैंकिंग 137 है, जहां PM 2.5 की मात्रा 46.7 है। बड़े शहरों में हैदराबाद की रैंकिंग 199 है, जहां PM 2.5 की मात्रा 42.4 है। दो और मैट्रो शहरों बेंगलुरू और चैन्नई की ग्लोबल रैंकिंग क्रमशः 440 और 682 है। इन दोनों दक्षिण भारतीय शहरों में PM 2.5 लेवल क्रमशः 31.5 और 25.3 रहा है, जो अच्छी बात है। आमतौर पर हवा में PM 2.5 की मात्रा 50 से कम होना सही माना जाता है। ऐसे में दिल्ली को छोड़कर देश के अन्य मैट्रो शहरों की एयर क्वालिटी अच्छी है।
PM 2.5 क्यों है खतरनाक?
PM 2.5 यानी हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर जिसका डायमीटर 2.5 माइक्रोन से कम या इसके बराबर होता है। ज्यादा PM 2.5 की मात्रा वाले हवा को इसलिए सेहत के लिए खराब माना गया है क्योंकि हवा में मौजूद 2.5 डायमीटर वाले सूक्ष्म कण आसानी से सांस के जरिए फेफडों में पहुंच जाते हैं और उसे नुकसान पहुंचा सकते हैं। PM 2.5 यानी पार्टिकुलेट मैटर 2.5 वाले सूक्ष्म कण में कई तरह के जहरीले और नुकसानदायक तत्व होते हैं, जो लंबे समय तक हवा में मौजूद रहते हैं और काफी दूर तक पहुंच सकते हैं।
हवा में मौजूद PM 2.5 से बड़े तत्व आसानी से नाक में मौजूद बालों से छन जाते हैं और फेफड़ों तक नहीं पहुंच पाते हैं, जिसकी वजह से इंसान को सांस लेने में किसी भी तरह की दिक्कत नहीं आती है। PM 2.5 तत्वों में ज्यादातर हैवी मेटल्स और माइक्रोऑर्गेनिजम यानी सूक्ष्म जीवाणु होते हैं, जो फेफड़े तक पहुंच जाते हैं और सांस संबंधी गंभीर बीमारियों, जैसे कि अस्थमा, कार्डियोवेस्कुलर डिजीज आदि का कारण बनते हैं। PM 2.5 के तत्व काफी जटिल होते हैं क्योंकि इनमें आर्गेनिक मैटर के साथ-साथ सल्फेट नाइट्रेट, अमोनियम साल्ट, कार्बन समेत कई मेटल कंपोनेंट मौजूद रहते हैं।
छोटे शहरों की हवा कैसे हुई प्रदूषित?
iQair की रिपोर्ट में भारत के कई टीयर-2 और टीयर-3 शहरों में PM 2.5 की ज्यादा मात्रा पाई गई हैं। सबसे हैरानी की बात यह है कि इनमें से कई शहरों में कोई बड़ी इंडस्ट्री नहीं हैं और न हीं वहां की जनसंख्या इतनी ज्यादा है कि PM 2.5 की मात्रा बढ़े, लेकिन फिर भी ये शहर इस लिस्ट में शामिल हैं। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। राजधानी दिल्ली के आस-पास के शहरों जैसे कि नोएडा, गाजियाबाद, फरीदाबाद, बल्लभगढ़, करनाल, कुरूक्षेत्र, मेरठ, बागपत आदि में इंडस्ट्रीयल जोन्स बनाए गए हैं। इन शहरों में मौजूद इंडस्ट्रीयल जोन्स से निकलने वाले प्रदूषित हवा में मौजूद PM 2.5 कण लंबी दूरी तक ट्रैवल करते हुए आस-पास के शहरों की आब-ओ-हवा को भी दूषित कर रही है।
इसके अलावा कम दबाब वाले क्षेत्रों में आस-पास के वातावरण से हवा तेजी से पहुंचती है, जिसकी वजह से भी वातावरण में मौजूद PM 2.5 कण इन क्षेत्रों में पहुंच जाते हैं और वहां की हवा को प्रदूषित कर देते हैं। iQair की रिपोर्ट में भारत के ज्यादातर शहरों में जून से लेकर सितंबर के बीच PM 2.5 की मात्रा 50 से कम मापी गई है। इस दौरान देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून पहुंचता है, जिसकी वजह से बारिश होती है और हवा साफ हो जाती है।












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