Raj Kapoor : हिंदी सिनेमा के शोमैन कहे जाते थे अभिनेता और निर्देशक राज कपूर

राज कपूर ने ‘बरसात’, ‘श्री 420’, ‘जागते रहो’ व ‘मेरा नाम जोकर’ जैसी सफल फिल्मों का लेखन, निर्देशन और उनमें अभिनय भी किया था। राज कपूर को 1987 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया था।

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मेरा नाम जोकर, संगम, अनाड़ी, जिस देश में गंगा बहती है जैसी कई हिट फिल्में देने वाले राज कपूर ने मात्र 10 साल की उम्र में फिल्म इंकलाब से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी। इनके पिता पृथ्वीराज कपूर को कौन नहीं जानता? राज कपूर का जन्म 14 दिसंबर 1924 को पेशावर में हुआ था। इनका नाम रणबीर राज कपूर था पर बाद में यह राज कपूर के नाम से जाने गये। राज कपूर ने 1946 में आई फिल्म 'वाल्मीकि', 'नारद और अमर प्रेम' (1948) में भगवान श्री कृष्ण की भूमिका निभाई थी।

ऐसे मिली पहली फिल्म
राज कपूर को उनके पिता पृथ्वीराज कपूर ने डायरेक्टर केदार शर्मा की फिल्मों के सेट पर बतौर क्लेपर बॉय काम करने को कहा। राज कपूर ने भी पिता की बात मानकर यह काम शुरू कर दिया। उस समय फिल्म 'विषकन्या' की शूटिंग चल रही थी। इस दौरान गलती से राज कपूर का चेहरा कैमरे के सामने आ गया। इस गलती को ठीक करने की होड़ में राज कपूर का क्लैप बोर्ड उस सीन के अभिनेता की दाढ़ी में फंस गया, जिससे किरदार की दाढ़ी निकल गई।

इस बात पर डायरेक्टर केदार शर्मा बहुत नाराज हुए। उन्होंने राज कपूर को जोरदार थप्पड़ जड़ दिया। हालांकि, बाद में उन्हें इस बात का अफसोस भी हुआ। अपनी गलती को सुधारने के लिए केदार शर्मा ने राज कपूर के साथ फिल्म 'नीलकमल' साइन की। यहीं से राज कपूर के अभिनय करियर को उड़ान मिलती गई।

सोवियत संघ में राज कपूर का धमाल
यह बात तब की है जब राज कपूर की फिल्म 'आवारा' सोवियत संघ में रिलीज हुई थी। फिल्म का मशहूर गाना 'आवारा हूं' मानों जैसे सोवियत संघ में रहने वाले हर व्यक्ति की जुबां पर था। राज कपूर की बेटी ऋतु नंदा ने अपनी किताब 'राज कपूर द वन एंड ओनली शोमैन' में इस बारे में विस्तार से लिखा है। उन्होंने लिखा कि जब नेहरू अपनी पहली सोवियत यात्रा पर गए थे तो भीड़ उन्हें देख कर 'आवारा हूं' कहकर चिल्लाया करती थी। यह एक तरह से राज कपूर की दीवानगी का ही असर था। ऋतु ने जिक्र किया कि उस समय सोवियत संघ के प्रधानमंत्री बुलगानिन हुआ करते थे। एक कार्यक्रम में नेहरू के बाद बुलगानिन के बोलने की बारी आई तो उन्होंने 'आवारा हूं' गाना गा कर सुनाया था।

फिल्म की कहानी में राज कपूर अभिनीत पात्र एक झोपड़पट्टी में अपनी मां के साथ रहता है जिसे उसके अमीर पति (पृथ्वीराज कपूर) ने एक शक के आधार पर अपने घर से निकाल दिया होता है। इस फिल्म में शशि कपूर ने राज कपूर के युवा किरदार को निभाया था। ऋतु अपनी किताब में लिखती हैं कि फिल्म 'आवारा' की कहानी की थीम वर्ग भेद थी। 'आवारा' को ख्वाजा अहमद अब्बास ने लिखा था।

निर्देशन और एक्टिंग दोनों में कमाया नाम
24 साल की उम्र में फिल्म 'आग' के साथ उनका निर्देशन का पूरा हुआ। राज कपूर ने पर्दे पर पहली प्रमुख भूमिका 'आग' (1948) में ही निभाई थी जिसका निर्माण और निर्देशन उन्होंने स्वयं किया था। इसके बाद राज कपूर के मन में अपना स्टूडियो बनाने का विचार आया और चेम्बूर में चार एकड़ जमीन लेकर 1950 में उन्होंने आरके स्टूडियो की स्थापना की। राज कपूर ने 'बरसात', 'श्री 420', 'जागते रहो' व 'मेरा नाम जोकर' जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन व लेखन किया और उनमें अभिनय भी किया। राज कपूर को सन् 1987 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्रदान किया गया था।

साल 1960 में फिल्म अनाड़ी और 1962 में आई फिल्म जिस देश में गंगा बहती है के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार से सम्मानित किया था। सन 1971 में भारत सरकार द्वारा उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। 2 जून 1988 को नई दिल्ली में इस महान अदाकार ने आखिरी सांस ली।

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